Tuesday, 22 March 2011

गजल


अंतहीन अंत ऐ सोचनीक होइए
भासो नै बनैए नै चित्र पूर होइए

ऐ रंग आ तरंगक नै भेटैए बाट
सोचैत भँसियाइत मगज फटैए

नै बाजैए बाट जे छोड़ि चललौं कतऽ
आँखि बाजैए बिनु बजने बुझबैए

आदति जे लागल वेदना सहबाक
गेंठ बनैए से सोहनगर लगैए

ई गुमकी बढ़ल खत्म हएत की
खरचण्डाली प्रेम पिसीमाल भेलैए  

1 comment:

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों