Tuesday, 6 May 2014

गजल



आखर आखर जोड़ि जोड़ि कजीवनक ग्रन्थ लिखने छी
कोड़ो वाती तोड़ि तोड़ि कहम माघक जाड़ तपने छी

 
रखलौं जगमे पहिल डेग जखन सपना छोड़ि किछु नै छल
बड़ बड़ साँपक एतए धरि आबैमे जहर सहने छी

 
अप्पन जीवन केर जोड़ घटा सबटा एसगर केलौं
भूखे रहितो पेट हमर मुदा नै किनकोसँ मँगने छी

 
झोपड़ पट्टी केर भीत बनाबी दिन भरि अपन हाथसँ
दोसर दिन तोरैत लातसँ चण्डालक आँखि तकने छी

 
दू दूटा अठमासु दूध मुँहा भूखल हमर कोरामे
नै दुख सहि नेनाक देख मुँह प्रभुकेँ मनुसुमरने छी

 
(मात्रा क्रम : २२२२-२१२११-२२२२-१२२२, सभ पांतिमे)

 

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों