Thursday, 9 October 2014

गजल

ब्रम्हसँ बेसी छागर उताहुल
हाथसँ बेसी आँचर उताहुल

मोन बहकि गेलै कोहबरमे
ठोरसँ बेसी आखर उताहुल

प्रेम मिलनमे नै छोट नमहर
धारसँ बेसी सागर उताहुल

घोघ कहैए एना सजू जे
दोगसँ बेसी बाहर उताहुल

रूप हुनक अनचिन्हारे सनकेँ
आँखिसँ बेसी काजर उताहुल

सभपाँतिमे 21+1222+2122 मात्राक्रम अछि।
मक्तामे एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि
"ब्रम्हसँ बेसी छागर उताहुल" ई एकटा मैथिली लोकोक्ति अछि।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों