Sunday, 5 October 2014

गजल

बितलै राति भेलै भोर गे बहिना
रहि गेलै पियासल ठोर गे बहिना

आसक नामपर खेपल अपन जीबन
के पोछत हमर दुख नोर गे बहिना

रहलहुँ राति भरि उसनैत अपनाकेँ
साँचे दुखमे छै बड़ जोर गे बहिना

गुड्डी बनि छलहुँ उपरे उपर सदिखन
के तोड़लकै नेहक डोर गे बहिना

अनचिन्हार देलक किछु निशानी आ
दुनियाँ लागै बस अंगोर गे बहिना

सभ पाँतिमे 2221+2221+222 मात्राक्रम अछि,
तेसर, चारिम आ मक्तामे 1-1टा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों