Saturday, 25 October 2014

गजल



उधारक बेर हमहीं रहबै
हिसाबक बेर हमहीं रहबै

रहै जजमान कतबो किनको
प्रसादक बेर हमहीं रहबै

सबूतक ढेरपर नाचत सभ
फसादक बेर हमहीं रहबै

पिया देतै भने अमरित ओ
पियासक बेर हमहीं रहबै

कियो बनबे करत सिंदूर
पिठारक बेर हमहीं रहबै

सभ पाँतिमे 1222+122+22 मात्राक्रम अछि।

अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघुकेँ संस्कृत हिसाबें दीर्घ मानल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों