गुरुवार, 15 जून 2023

गजल

अहाँ सुनबै जँ नहि  हम केकरा कहबै

पिया जुलमी हमर दुख हम कते सहबै 

 

सखी बहिना  अहाँके प्रेममे छूटल 

पिया हम आब कोना असगरे रहबै

 

निहोड़ा आब करु हम कोन विधि सजना 

सगर उसरैग एही भक्त पर ढहबै

 

विरहके आगिमे जरि मरि रहल छी हम

अहाँ आइब करेजामे कखन गहबै

 

रहत नेहक वचन नै यादि ‘मनु’ जा दिन

जहर माहुर अछैते पानिमे बहबै 

(बहरे हजज, मात्रा क्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

सोमवार, 22 मई 2023

गजल

जइ समय जइ काल दुश्मन जा रहल छल जान लेने
ठीक तखने दोस पहुँचल ढेर ढाकी ज्ञान लेने

पाइ जेबीमे नै रहने बुझि लियौ उन्टे रहत गति
मूँह पाकत पानि पीने हाथ पाकत चान लेने

ओकरा हमहीं सिखेलहुँ रूप बदलब रंग बदलब
अंतमे चलि गेल हमरे मूँह हमरे कान लेने

मूर्ख चुनि लिअ यदि अहाँकेँ अछि जगतमे सुखसँ रहबाक
खूब पछताइत रहब हमरे जकाँ विद्वान लेने

नौकरीसँ प्राण बाँचल छै गरीबक बात मानू
देखि लिअ हालति हुनक जे सभ रहथि खरिहान लेने

सभ पाँतिमे 2122-2122-2122-2122 मात्राक्रम अछि। ई बहरे रमल मोसम्मन महजूफ़ अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। दू शेरमे गजलक मान्य छूट लेल गेल अछि। 

बुधवार, 1 मार्च 2023

गजल

जँ हम मरि जाइ कनिको नै अहाँ कानब 

बितल जे संग ओ सगरो  खुशी गानब 

 

करेजामे नुकोने छी कतेको दुख 

हमर सामर्थ जे मुँहपर हँसी आनब

 

जहर पी दर्द के हम चिन्हलौ दुनियाँ

नदीमे ठेल सिखने लोक अछि छानब 

 

द कर्जा मांगि देखू एक दिन ककरो 

सगर दुनियाँक माया छन्नमे जानब 

 

भरोसा प्रेम दोस्ती नाम मतलबकेँ 

कपट ‘मनु’ भेषमे सब एतए दानब

(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222)

 ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023

गजल

भरोसपर जते टुटल इजोरिया
अलग तते अलग रहल इजोरिया

मलाइ चाटि बेस फाटि गेल जे
बना रहल तकर महल इजोरिया

अधीर भेल नीक नीक लोक सभ
जखन जखन हुनक रुसल इजोरिया

बजारमे गुलाम भेल रौद सभ
मुदा कहीं टिकल रहल इजोरिया

जकर भरोसपर उड़ल अकासमे
तही विकास तर दबल इजोरिया

सभ पाँतिमे 12-12-12-12-12-12 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

भक्ति गजल

आई महाशिवरात्रि केर शुभ अवसर पर श्री शिवकेँ कृपासँ प्रस्तुत अछि एकटा शिव गजल, भक्ति गजल 

गजल 

चलू देखब हे बहीना शिवकेँ 

अपन गौरीकेँ सजनमा शिवकेँ 

 

सभक ई खाली भरै छथि झोली 

सरण आइब जे सुमरला शिवकेँ 

 

गरीबोकेँ छथि इहे सुननाहर 

दियौ जल भरि एक लोटा शिवकेँ 

 

मनुख दानव देव आ प्रेतात्मा 

सगर दुनिया मिल मनेला शिवकेँ 

 

सिया रामोकृष्ण हुनके पुजलनि 

बनेलनि सगरो अराध्या शिवकेँ 

 

कृपानिधि कैलाशवासी जय भव

चरण वंदन जग रचैता शिवकेँ 

 

मनोरथ सब पूर्ण करता शम्भू 

कहल ‘मनु’ जे मनसँ भजता शिवकेँ 

(मात्राक्रम- 1222-2/ 1222-2)

सुझाव, मार्गदर्शन व आलोचना सादर आमंत्रित अछि। की एही मात्राक्रमकेँ बहरे गोविंद मानल ज सकै छै ?

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

गजल

मात्र अर्पित करू भावना भक्तिमे
आर कोनो नै हो भूमिका भक्तिमे

डूबि गेलै सकल ओहदा भक्तिमे
भूतपति लोककर साधना भक्तिमे

पार्वती या उमा अम्बिका या सती
छै बनल किछु कथा उपकथा भक्तिमे

देहमे मोनमे प्राणमे छै बसल
सर्वगोचर सुधी चेतना भक्तिमे

दूर दूरे रहल ई निगेटिभ जगत
भेल हमरा बहुत फायदा भक्तिमे

शम्भु शंकर सदाशिव उमापति अभव
सर्वदा टारलनि आपदा भक्तिमे


सभ पाँतिमे 212-212-212-212 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम अछि। गजलमे मान्य छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

रविवार, 5 फ़रवरी 2023

गजल

जखन कखनो जे सोचब हमरा

अपन लअगेमे पायब हमरा

 

हमर गजलक आखर तनमनमे

कचोटत तँ अहाँ ताकब हमरा 

 

अलग छी एखन कोनो गप नै

हृदयमे सदिखन देखब हमरा


दुनू दू तन  एक्के जिनगी छी

अहाँ कखनो नै बिसरब हमरा


अहाँकेँ हम छी कहलौं जे ‘मनु’

कि मुइला बादो मानब हमरा 

 

(बहरे गोविंद, मात्राक्रम 1222-222-22, सभ पाँतिमे। दोसर शेरकेँ दोसर पाँतिमे दूटा अलग-अलग लघुकेँ दिर्ध मानक छुट लेल गेल अछि)

 ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

गजल

देश अमरित राज्य अमरित नेत धरि अमृताह छै
ताहि बादो लोक सभ एना किए मरखाह छै

नोर हुनकर नोर हमरो फर्क भेटत किछु मुदा
नोर हुनकर देर धरि चुप आ हमर अगुताह छै

बाँस छीलल हो कि बेछिल्ले मुदा हेतै असरि
के कहाँ आ के कते से आब नै परवाह छै

आस टुटतै संग छुटतै बात ई बूझल रहै
संग तइयो देल कारण जिद्द बड़ जिदियाह छै

खकसियाहा केर चक्करमे हमर सपना रहल
फेर कहलह आँखि के सपने बहुत झड़काह छै

सभ पाँतिमे 2122-2122-2122-212 मात्राक्रम अछि। ई बहरे रमल मोसम्मन महजूफ़ अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2023

गजल

जखन दरबार बनि गेलै
तखन किछु चार बनि गेलै

जहर पीने रही एना
गलाकेँ हार बनि गेलै

भरोसापर रहल लटकल
भरोसा भार बनि गेलै

रहै इच्छा बनब करुणा
मुदा खुंखार बनि गेलै

टुटल बहिनोइकेँ नै मान
धनी लग सार बनि गेलै


सभ पाँतिमे 1222-1222 मात्राक्रम अछि। ई बहरे हजज मोरब्बा सालिम अछि। गजलमे मान्य छूट लेल गेल अछि।सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

रविवार, 29 जनवरी 2023

गजल

दर्द देखायब करेजाक मानब की

काल्हि सपनोमे हँसी छोरि कानब की

 

प्रेम पुरुषक छैक गोबर अहाँ कहलौं

चीर देखायब करेजा तँ गानब की

 

दोष सभमे नहि  कतउ एकमे हेते

संग हमरो ओहिमे आब सानब की

 

आइ छै अन्हार सगरो अहाँ कहलौं

आँखि मुनि संसारमे जोत आनब की

 

किछु भरोसा  प्रेममे कय अहाँ देखूँ

होइ छै की नेह ई ‘मनु’सँ जानब की


(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

 ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

सोमवार, 16 जनवरी 2023

RSS ( राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) केर प्रार्थनामे छन्द

RSS ( राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) वा कि भाजपासँ जुड़ल मैथिलकेँ ई बुझले नहि हेतनि कि संघ केर प्रार्थना सेहो छन्दमे छै। भुजंगप्रयात नामक छन्द जकरा गजलमे बहरे मुतकारिब कहल जाइत छै ताहीमे संघ केर प्रार्थना लिखल गेल छै। एकर सूत्र भेल 122-122-122-122 तँ देखू ई रचना जे कि संघ केर प्रार्थना छै-

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥१॥

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम्
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्णमार्गम्
स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्॥२॥

समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम्
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥३॥

शनिवार, 14 जनवरी 2023

जगदानन्द झा ‘मनु’क पच्चीस टा रुबाइ एक्केठाम

रुबाइ १
आँचर नहि उठाबू आँखिसँ पीबय दिअ
हम जन्मसँ पियासल करेज जुड़बय दिअ

ताड़ीसँ  बेसी निसा  अहाँक  हँसीमे

प्रेमक निसामे अपन कनी जीबय दिअ

 

 

रुबाइ २

पीलौं हम तँ लोक कहलक शराबी अछि 

एतअ के नहि कहु बहसल कबाबी अछि

बुझलौं अहाँ सभ   दुनियाक ठेकेदार 

हमरो  आँखिसँ देखू की खराबी अछि  

 

 

रुबाइ ३

दर्दक दबाई बिना जीब कोना कय
फाटल करेजकेँ हम सीब कोना कय

सगरो जमाना भेल दुश्मन शराबक

सबहक सोंझा आब तँ पीब कोना कय


 

 

रुबाइ ४

पीलौं शराब तँ दुनियाँ कहलक बताह 

बिन पीने ई दुनियाँ भेल अछि कटाह

जे नहि पीलक कहाँ अछि ओकरो महल

पीबिए क' किएक नहि बनि जाइ घताह

 

 

रुबाइ ५

भेटल नहि सिनेह   तेँ शराबे पीलौं

दर्शन हुनक हरदम गिलासमे केलौं 

के अछि कहैत शराब छैक खराब ‘मनु’

बिन रहितौं हुनक शराबेसँ हम जीलौं

 

 

रुबाइ ६

पीलौं नहि तँ की छै शराब बूझब की 

बिन पीने दुनियाँमे करब तँ करब की 

सभ अछि एक दोसरकेँ खून पीबैत 

खून छोड़ि शराबे पी कय देखब की 

 

 

रुबाइ ७ 

एतेक नेहमे लीबैत किएक छी

दुनिया पुछलनि हम जीवैत किएक छी 

सभ बुझला उत्तर ‘मनु’ अहूँ इ जुनि पूछू 

दिन राति एतेक पीबैत किएक छी 

 

 

 

रुबाइ ८

कर्जा कय क जीवन हम जीव रहल छी 

फाटल अपनकेँ कहुना सीब रहल छी 

सभ किछु लूटा कय ‘मनु’ अपन जीवनकेँ

निर्लज जकाँ हम ताड़ी पीब रहल छी   

 

 

 

रुबाइ ९

गोरी तोहर काजर जान मारैए 
छौंरा सभ सगर हाय तान मारैए 
पेएलक बड़ भाग काजर विधातासँ 

तोहर आँखिमे कते शान मारैए 

 

 

रुबाइ १०

लाली मानि कय अहाँ ठोरसँ लगा लिअ

आँखिक अपन  करीया काजर बना लिअ

एना जुनि अहाँ   कनखी नजरिसँ देखू
प्रियतम बना ‘मनु’केँ करेजसँ लगा लिअ

 

रुबाइ ११

फूसियो जँ कनी अहाँ इशारा करितहुँ

भरि जीवन हम अहीँक बाटमे रहितहुँ

मुस्कीमे अहाँक अपन मोन लूटा क’

तरहत्थीपर जान लेने  हम अबितहुँ

 

 

रुबाइ १२

साँवरिया पिया अहाँ ई की कएलहुँ   

साउन चढ़ल छोड़ि चलि कोना गएलहुँ

शीतल हवा बहल सिहरैए हमर तन

कोना रहब बिनु अहाँ बुझि नै पएलहुँ  

 

 

रुबाइ १३

गोरी तोर मुस्कीमे छौ जहर भरल 

नै एना मुँह खोल कते घायल परल 

तोहर फुलझड़ी सन मारुक हँसी सुनि क

भेटत बाटपर कतेको छौंड़ा मरल 

 

 

रुबाइ १४

तोरा देख सुन्नरी सीटी बजैए

धरकन बंद ई कतेकोकेँ करैए

परमाणु बम दुनिया फालतू बनेलक

तोहर कनखीसँ मनुख लाखो मरैए

 

 

रुबाइ १५

जे घाव अहाँ हमर करेजकेँ देलहुँ

सबटा ओ दर्द दुनियाँसँ नुका लेलहुँ  

मुस्कीसँ हमर नै बुझू जे हम खुश छी

खूनक घुट अहाँक खुशीमे पी गेलहुँ

 

 

रुबाइ १६

घुमि कनखीसँ कनीक अहाँ ताकि देलहुँ

तन मन अपन एहिपर हम हारि देलहुँ

नहि आब बैकुंठकेँ रहि गेल इच्छा

सगरो अहाँकेँ लेल ‘मनु’ बारि देलहुँ

 

 

रुबाइ १७

नाथक पजारल नेह धधैक रहल अछि

असगर करेजा हमर तड़ैप रहल अछि 

लगने कोन अहाँसँ हम नेह लगेलौं

प्रेमक गरमीसँ देह बरैक रहल अछि

 

 

रुबाइ १८

दुनिया नहि पुछलकै केहनो बात नहि

राखू हियामे  ई तेहनो बात नहि

चिन्है छै समाज सगरो धनीकेकेँ

‘मनु’केँ जँ जाइ बिसरि एहनो बात नहि


 

रुबाइ १९

तोरा नहि हम छोड़लौं नहि हम बेवफा

तोरा बिन नहि मरलौं नहि हम बेवफा

तोहर प्राण गेल बुझि नहि जीवैत ‘मनु’

बिन काठीए जरलौं  नहि हम बेवफा

 

 

रुबाइ २०

आपस क दे ओ हमरा  हमर बितल दिन

किरया तोरा द दे   ओ सगर बितल दिन

रहि जाएब आब असगरे तोरा बिन

नै यादि करब संगे तोहर बितल दिन

 

 

रुबाइ २१

छी हम जरैत   की अहाँ प्रकाशित रही

सुख लेल अहाँक खुशीसँ हम आँच सही 

बातीकेँ जरैत   ई दुनिया देखलक

बनि तेल हम तँ जरलौं दुख कतेक कही

 

 

रुबाइ २२

पागल हम दुनियामे पियार तकै छी

भलमानुस सब सगर वेपार तकै छी

नै कोनो दाम मनुख आ मनुखताकेँ

स्वार्थी लोकसँ ‘मनु’ सरोकार तकै छी

 

 

 

रुबाइ २३

बाबूजीक करेजमे  सदिखन रहलहुँ

तन मन धन हुनक सगरो हम पेएलहुँ 
दाही पानि रौदसँ सदिखन बचेलन्हि

सेबाक बेड़मे हम परदेश भगलहुँ 

 

 

रुबाइ २४

बाबूजी देह जान सबटा  देलन्हि 
जे किछु छी एखन बाबूजी केलन्हि
भूखे रहि अपने   हमर पेट भरलन्हि
सुधि बिसरि अपन हमरा मनुख बनेलन्हि

 

 

रुबाइ २५

फगुआ अहाँक बिनु कतेक बेरंग अछि 

बाँकी बस अहाँक यादेटा संग अछि

एही दुनियासँ जहन अहाँ चलि गेलौं 

बुझलौं कतेक कठिन जीवनक जंग अछि


✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों