Wednesday, 28 December 2011

गजल

जे रुप अछि जे रंग अछि
देखिकs दुनियाँ दंग अछि

आँखिक आगा छबी अंहिके
भेटब कोना उमंग अछि

दुर देश हम प्राणप्रिये
हृदय अहिंक संग अछि

आँहा बिन दिबाली, होली की
भेल जिनगी बेरंग अछि

निठुर समय बितै कोना
मोन उडैत पतंग अछि

नव उर्जा सँs प्रेम भरब
मोन मे नव तरंग अछि

अमर प्रेम के गीत गेबै
बाजय मोन मृदङ्ग अछी

छी प्राण अंहि हे जन्म भूमि
भ्रम हमर तs भंग अछि

जे रुप अछि जे रंग अछि
देखिकs दुनियाँ दंग अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों