रविवार, 4 सितंबर 2011

गजल

दाम एतय सभ चीजक देब पड़ै छै
अधिकारक लेल झगड़ा कर' पड़ै छै

गज भरि जमीन जौ कौरव नहि देब' चाहय
पांडव के फेर लोहा लेब' पड़ै छै

कर्बला केर खिस्सा त' दुनियाँ जानै छै
धर्मक खातिर शीश कटाब' पड़ै छै

झगड़ा झंझट मानलहुँ नीक नहि होइ छै मुदा
जीब' खातिर ईहो कर' पड़ै छै

"गौहर" साधु ब'न' चाहैत अछि मुदा
दुर्जन के जे पाठ पढ़ाब' पड़ै छै

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों