Wednesday, 12 October 2011

गजल

आइ काल्हि सब दिस भ्रष्टाचार छै
चोर लूटेरा सबहक ई संसार छै

लाख करोड़ो अरबो खाकै बैस गेला
सुनै छियै ओकरे सबहक सरकार छै

उज्जर उज्जर कपड़ा सुन्दर सुन्दर बात
जनता के ठगबाक ई हथयार छै

लाख लगा क' जीती करोड़ो पाबी फेर
राजनीति नहि छै आब ई व्यापार छै

घाव नहि अछि आब सड़ैत सड़ैत कैँसर भ' गेल
काटू ई सभ आंग के ई बेकार छै

गांधी नेहरु लाल बहादुर कत' गेला
ई युग के ओहने नेता दरकार छै

ककरा पर आब आस राखू के अछि अप्पन
साधु लगैए जे चोरक सरदार छै

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों