गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

गजल


ई कमल सन नजरि जे लाजे झुकल अछि

प्राण लेलक हमर जे आँचर खसल अछि

 

देखलहुँ मोहिनी रूपक छवि जखन हम

भेल पहिनेसँ मनमे जेना बसल अछि

 

हम दुनू मिल जँ जीवनमे संग चलबै

प्रेम जग देखतै मनमे जे सजल अछि

 

सत कहै छी अहाँकेँ हम मानियो लिअ

बिन अहाँ सुन्न सगरो जीवन बनल अछि

 

छी मनक मित अहीँ हम्मर  सात जन्मसँ

हाँ सजन केर सुनि ली तेँ ‘मनु’ बचल अछि

 

(बहरे असम, मात्राक्रम  2122-1222-2122)

✍🏻जगदानन्द झा 'मनु'

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों