Thursday, 24 April 2014

गजल

पानि एना बरसल रे सुगबा
खेत ओक्कर सुक्खल रे सुगबा

भोट पड़लै ढ़ाकी के ढ़ाकी
लोकतंतर तरसल रे सुगबा

धाह लगलै एते चमड़ीमे
बिलसँ ओ सभ निकलल रे सुगबा

बस अकासे बाँचल फाइलमे
माटि चम चम चमकल रे सुगबा

कामिनी कंचन कादम्बक संग
मोन सभहँक बहसल रे सुगबा

सभ पाँतिमे 2122+222+22 मात्राक्रम अछि

अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतमे एकटा अतिरिक्त लघु लेबाक छूट लेल गेल अछि।


सुझाव सादर आमंत्रित अछि

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों