बुधवार, 13 जून 2012

गजल



सगरे दुनिया छै पसरल आब विकल हारल मनुख
कतहु समाज और कतहु करेज से मारल मनुख

तम तम चेहरा सगरे हँसी ठोढ से उडि गेल जेना
कतहु पडल कतहु कनैत शोणित ढारल मनुख

सरकारी तंत्र के फेरा मे आब लोक भेल छैक बेदम
टाका गनैत चप्पल घसबैत मरै छै थाकल मनुख

पाहुन देखि दरबज्जा पर होएत छैक मोन विखिन्न
स्वार्थ तकैत चहुकात भेल अपने से बारल मनुख

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों