Wednesday, 26 March 2014

गजल

ताकू ने एना अहां तरुआरिक धार टूटि जेतै      
घूमू ने पाछू अहां सब जर जंजाल छूटि जेतै

बैरी बनि गेलहुँ अहां तीतल नैना कहै कथा किछु
बूझब नहि जे मरम नेहक हमरे भाग फूटि जेतै

नेसल दीया रातिये प्रीतक गेलै मिझाय भोरहि
लाजो बाचत कोन विधिये बीचे बाट लुटि जेतै

अपनहि बीतल बिसरि के ताली बजबै हँसी हँसी मे
ऎ जग के .ई  रीत छै बारै ले तखन जूटि जेतै

२२२ २२१२ २२२ २१२ १२२

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों