Tuesday, 1 January 2013

मास दिसम्बर 2012क लेल गजल सम्मान योजनाक पहिल चरण


हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास दिसम्बर  लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास  दिसम्बर  लेल पंकज चौधरी (नवलश्री)    जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।



गजल-३८

गढू आखर गजल कहियौ
अपन धुनमे रमल कहियौ

अजब छै रीत दुनियाकें
सुधाके सभ गरल कहियौ

करेजक काँट बनलै ओ
मुदा तैयो कमल कहियौ

पसरलै प्रीत नकली बड़
निमहले पर असल कहियौ

जँ गप हुनकर उठल कोनो
किए नैना भरल कहियौ

गमेलौं की तकर गप नै
कथी संगे रहल कहियौ

कियो दूसै करै निंदा
अपन मोनक जँचल कहियौ

रहल परिणाम प्रेमक की
किए चुप छी "नवल" कहियौ

*बहरे हजज/मात्रा क्रम:१२२२ 

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों