शुक्रवार, 28 जून 2013

गजल

गजल-५४

अनकर कहल मानब कते
खा-खा ठेस कानब कते

बस किछु दिनक जिनगी त' नै
दिन जिनगीक गानब कते

छोडू पुरनका राग सभ
ऐ सिट्ठीसँ र'स छानब कते

बिनु साधनक की साधना
थूकसँ सातु सानब कते

चाही अपन अधिकार जे
माँगू "नवल' ठानब कते

>बहरे मुक्तबिज/मात्रा क्रम : २२२१-२२१२
(तिथि-१७.०२.२०१३)
©पंकज चौधरी (नवलश्री)

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों