गजल
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नजरिमें नजरि तऽ मिलाक देखू
दीप नेहके तऽ जराक देखू
नजरिमें नजरि तऽ मिलाक देखू
दीप नेहके तऽ जराक देखू
दिल अखन कली अछि प्रिय अहाँकें
ओ कली अहाँ तऽ खिलाक देखू
चेहरा अहाँक चमैक जेतै
आँखिमें अहाँ तऽ बसाक देखू
दोहराक भेटत नहि जवानी
मोनमें उमंग जगाक देखू
बरसि पडत सावन जीनगीमें
हमर लेल रूप सजाक देखू
२१२-१२११२-१२२
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© कुन्दन कुमार कर्ण
www.facebook.com/kundan.karna
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Nice Ghazal
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