Wednesday, 5 March 2014

गजल

हारलकेँ हरिनाम सोभै छै
लफुआ सभकेँ गाम सोभै छै

जकरा गाछी ने तँ बिरछी छै
तकरा आँगन आम सोभै छै

कानै कटिया खूब पासी लग
नबका घरमे जाम सोभै छै

जे कटलक गरदनि हमर सदिखन
तकरा मुँहमे राम सोभै छै

घुमलहुँ हम झोड़ा ल' हाटे हाट
बनियाँ सभहँक दाम सोभै छै

सभ पाँतिमे 22+222+1222 मात्राक्रम अछि।

अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतमे एकटा लघु अतिरिक्त लेबाक छूट लेल गेल अछि 

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों