Saturday, 29 March 2014

गजल

मोनो बाँटि रहलै जमीन जकाँ
लच्छन सभ लगैए अमीन जकाँ

बितलै साँझ दिन भोर राति हुनक
चुप्पेचाप छथि ओ मशीन जकाँ

हमरा देखलथि आइ नीकसँ ओ
अजुका दिन लगैए सुदीन जकाँ

बुझिए गेल हेबै अहूँ तँ कने
मोनक बीच रेघा महीन जकाँ

आँखिक नोर एलै करेजसँ आ
हुनकर दर्द बनलै करीन जकाँ

सभ पाँतिमे 2221+22+121+12 मात्राक्रम अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों