Friday, 7 March 2014

गजल

आरे तिरपित पारे तिरपित
कनही कुक्कुर माँड़े तिरपित

सुस्ता रहलै सरकार चुना
देशक जनता ठाड़े तिरपित

मनबैए मधुमास धनिकबा
हम्मर भाग अखाढ़े तिरपित

दुन्नू साँझ उठौना लागल
बाछी हमर लथारे तिरपित

जोर अछार हुनक आँगनमे
हमर दुआरि सुखाड़े तिरपित

सभ पाँतिमे 222+222+22 मात्राक्रम अछि।

दूटा अलग-अलग लघुकेँ एकटा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।
ई गजल अनचिन्हार आखरमे सरल वार्णिक रूपमे प्रस्तुत भ' चुकल अछि।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों