बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

गजल


धूप आरती हम अनलहुँ नहि 
जप-तप करब सिखलहुँ नहि 

सदिखन कर्तव्यक बोझ उठोने
अहाँक ध्यान किछु धरलहुँ नहि 

की होइत अछि माए पुत्रक नाता
एखन तक हम बुझलहुँ नहि

हम बिसरलहुँ अहाँकेँ जननी 
अहुँ एखन तक सुनलहुँ नहि

अपन शरणमे लऽ लिअ हे माता
ममता अहाँक तँ जनलहुँ नहि

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१३ )

जगदानन्द झा 'मनु' 

गजल



अहाँ सं हम प्रगाढ़ प्रेम करैत छि
अहाँ किएक इ अपराध बुझैत छि
जिन्गी अछि हमर अहींक नाम धनी
हमरा किएक बदनाम बुझैत छि
हमर आँखी अहांके दुलार करैय
नैन किएक हमरा सं झुकबैत छि
अछि मोनक मिलन प्रेमक संगम
अहाँ किएक प्रेम इन्कार करैत छि
हम छोड़ी देलहुं सब काज सजनी
बस अहींक नाम लिखैत रहैत छि
बिसारि देलहुं हम अलाह ईश्वर
प्रेम केर हम इबादत करैत छि
प्रेम छै पूजा,छै प्रेम सच्चा समर्पण
अहिं कें हम अपन जिन्गी बुझैत छि
................वर्ण -१४...................
रचनाकार :-प्रभात राय भट्ट

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल---



नेताक फाँसमे फँसल ई भारत भाए-भैय्यारी जकाँ

देखू छटपटा रहल माछ भरल अपियारी जकाँ


लोक तँ कटैए घिसिऔर महँगाइसँ मारल भ' क'

भावे मुदित मुदा स्वर निकलैछ फकसियारी जकाँ


आर्थिक उदारीकरण कमाइ आब लाखमे होइछ

मुदा वैश्विक परिस्थितिमे मोल लागए हजारी जकाँ


बिहारक सिरखारी बदलि गेल सन लगैए आब

श्रमिक घटलासँ कंपनी-मालिक लगै बिहारी जकाँ


आइ धिया-पुता घुमैए प्रशिक्षित बेरोजगार भ' क'

महँगाइमे आंशिक लाभ पाबि बुझैए दिहाड़ी जकाँ


आखर---20


मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

गजल

किछओ लीखु तs साथी एहन की, रहि रहि कs लाइक करत
फेक आईडी नीक फोटो, कमेन्ट करय लेल माइर करत

चैटिङ फेटिङ डेटिङ सेटिङ के परोगराम आ बात सुनू
जहाँ कमेन्ट पर चुप्पी साधु, मुँह बिचकौने माइन्ड करत

हमहूँ कम नै गच्चा दै मे, पुछलहूँ बियाह करबै की अहाँ
बिन दहेज जखने कहलहूँ की, लङ्क लागि उ भागि पडत

उमेद पिता के, माय के आशा, कोना कय इ सभ पुरा करतै
फिटफाट जिटजाट खाली मस्ती, कहुना कs कs बाईक चढत

देश-दुनियाँ, जिबन-दर्शन के, लियौ ने एकरा सs बात कते
समाज'क समस्या मे साथ माँगु, तs धीरे धीरे साईड धरत

आस'क घूर मिझारहल, अखनो किछ चिनगी जेना बाँकी छै
पजरै धधरा कहुना कs "स्वाती", जे इ जाड’क राइत कटत !!

गजल


अतृप्त,अथाह,अन्हारआ अंतर्द्वंद्वकेर मकर-जाल में,
विवशताक परिसीमामें ओझराएलअछि हमरजिनगी.

सदिखन रहैतछी नून-तेलक ओरीयानमें लागल,
स्रोतक निम्नतासँ खौन्झाएलअछि हमरजिनगी.

आशक बान्हलड़खड़ाएल अछि भासियैल धार सन,
पाइन बिनुमाछ जकांअकुलाएल अछिहमर जिनगी.

मंजिलक जीनापर चढ्यके अभिलाषसंजोगने,
शहरक दौर-भाग मेंबउयाएल अछिहमर जिनगी.

बसातक वेगसँ उड़ियाईतकागजक पन्नाजकां,
स्थिरताक चाहमें हडबड़ाएलअछि हमरजिनगी.

महत्वाकांक्षा केर टाट खाड़ करयके चक्करमें,
तृष्णाक खोहमें औनायेलअछि हमरजिनगी.

आधार-प्रश्नकमायाजाल मेंअनेरो फँसलासँ,
शब्दकोशक बनलजंजाल अछिहमर जिनगी.

परिस्थिति सँ तालमेल बैसाबैत,समयककोरा में,
सरस-कीचकफुलायल "पंकज" अछि हमर जिनगी.

गजल


चलल बाण एहन इ नैनक अहाँक, मरलौं हम।
सुनगल इ करेज हमर सिनेह सँ बस जरलौं हम।

भिडत आबि हमरा सँ, औकाति ककरो कहाँ छै,
जखन-जखन लडलौं, हरदम अपने सँ लडलौं हम।

हम उजडल बस्ती बनल छी अहाँक इ सिनेह सँ,
सिनेहक नगर मे सदिखन बसि-बसि उजडलौं हम।

हम तँ देखबै छी अपन जोर मुँहदुब्बरे पर,
कियो जँ कमजोर छल, पीचि कऽ बहुत अकडलौं हम।

अहाँ डरि-डरि कऽ देखलौं जाहि धार दिस सुनि लिअ,
सब दिन उफनल एहने धार मे उतरलौं हम।
फऊलुन (ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ)--- ५ बेर प्रत्येक पाँति मे।

गजल


फूल सँ कोमल अहाँ छी प्रियतम देखु केखनो मौलाएब नहि 
राखु सम्हारि कए एहि फूल केँ एकरा केखनो सुखाएब नहि 


हमरा लेल एलहुँ खुसी बनि, अहाँ कनिको बिसराएब नहि 
सदिखन हमरे ह्रदय में रहब, केखनो छोरि जाएब नहि 


चाहे मिलन हुए चाहे विरह, मिसियो भरि खिसियाएब नहि 
हमर धरोहर छी अहाँ प्रियतम  केखनो त ' मौलाएब नहि 


जे कियो केखनो अनर्गल कहे, अहाँ कनिको पतियाएब नहि 
इ समर्पित अहाँ केँ हमर, दोसर केँ केखनो सुनाएब नहि 


(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२४)
जगदानन्द झा 'मनु'  

गजल

सब खिड़की केवाड़ बंद एक टुकड़ा प्रकाश किया
अहां क छवि तोडि फेकलहू, एक टुकड़ा स्वास किया

प्राण पन्छी उडल तोडि क्षुद्र मोन के गलल पिंजर
नव आयाम स्वच्छन्द हवा मे एक टुकड़ा लाश किया

धधकैत करेज़क आगि के नोर नै सकल मिझाय
जरि सुड्डाह भेल त एक टुकड़ा एहसास किया

खुंडी खुंडी भेल विश्वास, सन्जोगल करेज़क पौती मे
उधिया गेल करेजे तखन एक टुकड़ा आश किया

निर्वाण भेल पीबि अंतिम घोंट जीवन शराब केर
तोड़ल माया जाल के आब एक टुकड़ा पियास किया

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल---



जुग बीति गलै लगबैत जोगारमे
मुदा पता नै की लीखल छै कपारमे

दिन बितेलौं दोस्तीए निमाहि हम तँ
तैयो छल हत्यारा अपने भजारमे

भाइ जे काटैए गरदनि सदिखन
ओ माथा टेकैए मंदिर-मजारमे

हे एना नै चलू हाथ छोड़ि बाटपर
बहि जाएब कहियो उन्टा बयारमे

जे बुझतै बितैत समय केर मोल
मुन्ना ओकरे दिन बिततै बहारमे

आखर-----14

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

गजल


अहाँ केँ हमर इ करेज बिसरत कोना।
छवि बसल मोन मे आब झहरत कोना।

हवा सेहो सुगंधक लेल तऽ जरूरी,
बिन हवा फूलक सुगंध पसरत कोना।

अहीं टा नै, इ दुनिया छै पियासल यौ,
बिन बजेने इ चान घर उतरत कोना।

जवानी होइ ए नाव बिन पतवारक,
कहू पतवारक बिना इ सम्हरत कोना।

हमर मोन ककरो लेल पजरै नै ए,
बनल छै पाथर करेज पजरत कोना।
मफाईलुन (ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ) ३ बेर प्रत्येक पाँति मे।

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल--

इ लोक कहैत हो किच्छो मुदा एहन बात भेल छै
जाहि नगरसँ गेल बिहारी ओ मसोमात भेल छै

आएल सुबुद्धि अपन श्रमकेर बूझल महत्व
आब तँ अपनो राज्यमे विकासक परात भेल छै

देखू जकरा नामपर माँगल गेलै सुख-सुविधा
देशमे ओ बेचारा तँ बहुत दिनसँ कात भेल छै

बोनिहार बिन अछि डुबल कतेको कंपनी देशमे
आब बुझू जे सभ अहंकारीकेँ पक्षाघात भेल छै

दोसरक बलें रहैए ओ बहुत कुदैत-फनैत
मुन्ना तँए साहित्यो ओकर बापक जिरात भेल छै

आखर-----19

अपने एना अपने मूँह-4

२०१२ केर मास जनवरीमे कुल ६६टा पोस्ट भेल जकर विवरण एना अछि---------
आशीष अनचिन्हारक कुल १८टा पोस्ट अछि। जाहिमे पुरस्कार संबंधी ३टा, नात १टा, कता १टा, रुबाइ ४टा, गजल ४टा, बन्द १टा, अपने एना अपने अपने मूँहक १टा पोस्ट अछि। संगहि-संग ३टा पोस्टमे रुबी झाक १टा, स्वाती लालक १टा, आ इरा मल्लिक जीक १टा गजल प्रस्तुत कएल गेल अछि।

मनीष झा "बौआ भाइ" केर २टा पोस्टमे २टा गजल, नितेश झा "रौशन" केर ३टा पोस्टमे ३टा गजल, ओम प्रकाशक ११टा पोस्टमे ११टा गजल, प्रभात राय भट्ट केर ७टा पोस्टमे ७टा गजल,अजय ठाकुर "मोहन जी"क १टा पोस्टमे १टा गजल, अमित मिश्रक १टा पोस्टमे १टा गजल, जगदानंद झा "मनु"क ८टा पोस्टमे ८टा गजल,गजदीश चंद्र ठाकुर "अनिल" जीक ३टा पोस्टमे ३टा गजल, भाष्कर झाक १टा पोस्टमे १टा गजल आ अनिल जीक १टा पोस्टमे १टा गजल अछि। मिहिर झाक ४टा पोस्टमे ३टा गजल आ १टा बन्द अछि।

गजेन्द्र ठाकुरक ६टा पोस्टमे ४टा दीक्षा भारती द्वारा गजेन्द्र ठाकुरक ४टा गजलक गायन प्रस्तुत कएल गेल अछि। १टा पोस्टमे सियाराम झा "सरस" जीक अंतर्वाता अछि जे प्रेमर्षि जी द्वारा लेल गेल अछि। १टा पोस्टमे अजहर इमामक मृत्यु सूचना देल गेल अछि।
मास जनवरी २०१२मे श्रीमती रूबी झा, स्वाती लाल, मनीष झा "बौआ भाइ", नितेश झा रौशन, अमित मिश्र मने पाँचटा गजलकार अनचिन्हार आखरक माध्यमें मैथिली गजलमे एलथि। जाहिमे २टा महिला छथि।


(श्रीमती रुबी झा जीक सभ पोस्ट हटा देल गेल अछि। हुनक रचना अ-मौलिक सिद्ध भेल अछि। हमर ई कहब नै जे हुनक सभ रचना एहने सन हेतन्हि मुदा ई हुनक अधिकांश रचना लेल अछि।

सादर
सम्पादक
 22/1/2013)

गजल




चंचल मोनक भीतर परम चैतन्य उर्जा सुषुप्त भेल अछि
मोह लोभ क्रोध रिस रागक तेज सं आत्मा सुषुप्त भेल अछि

दुष्ट मनुख आतुर अछि करैए लेल मनुखक सोनित पान
दानवीय प्रबृति केर दम्भ सं मानव रूप विलुप्त भेल अछि

जन्मलैत छलहूँ बालेश्वर, कुमारी कन्या पूजैत छल संसार
आयु बढ़ैत सभ सुमति बिसारि कुमति संग गुप्त भेल अछि

स्वार्थलिप्सा केर आसक्त मनुख जानी सकल नहीं जीवन तत्व
परालौकिक परमानन्द बिसारि सूरा सुंदरी में लिप्त भेल अछि

दुर्जन बनल संत चरित्रहीन महंथ बदलैत ढोंगी रूप
अकर्मनिष्ठक कुकर्म सं गुण शील विवेक सुषुप्त भेल अछि


....................वर्ण-२४......................................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

गजल

आगि लागल जेना हो बजारेमे
भांग घोरल जेना हो इनारेमे।

हम सूतल,पड़ल,निश्चिन्त छी
चुट्टी लागल जेना हो भराड़ेमे।

कोनाक' रहब सुखसं,शान्तिसं
बितैत गेल जिनगी नियारेमे।

नाचैए लोक घेरायल बाढिमे
ओ देखू मगन अछि उधारेमे।

मरि-मरिक' जीयब आबो कोना
अनिल सूनू गजल इशारेमे।

गजल



एकटा स्वपनपरी हाथ लेने गुलाब छै
चन्द्रमा सन मुह पर लगौने नकाब छै
रौशनी नुकाबी से नकाबक ऑकाद कहाँ
पारदर्शी चेहरा पर धेन आफताब छै
बिजलीक छटा सावन भादवक घटा छै
सोरह वसंतक जोवन पिने सराब छै
मदिरा में कहाँ जे हुनक अधर में मात
मातल जोवन रस छलकौने सराब छै
हुनक नयन मातली लगैछ मधुशाला
ठोरक पियाला में ओ जाम धेन वेताब छै
जाम पिबैलेल कतेको दीवाना बेहाल छै
रोमियो मजनू सब हाथ लेने गुलाब छै
हुनक जोवंक महफिल राग सजल छै
ओ श्रिंगार रासक गजल नेने किताब छै


..................वर्ण १६ ....................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गजल

‎हम बाजि रहल छी मायक कोखि सँ ,
हम सबटा सुनै छी बेशक कोखि सँ ,
कष्ट सहब हमर नियती बनल ,
मल- मुत्र खून सहै छी मायक कोखि सँ ,
मारि देब पहिल तीन बहिन जेकाँ ,
सुनि हँसि रहल छी मायक कोखि सँ ,
बेटी कए जौ मारबै यौ भलमानुष ,
बेटा जनमत कोन मायक कोखि सँ ,
हम बेटी छी दुर्गा छी सुनि लिअ अहाँ ,
आइ हुंकार भरै छी मायक कोखि सँ ,
बेटी कए जे केउ सम्मान नै करत ,
नै जनमS चाहब ओ मायक कोखि सँ ,
बेटी बिन बंश ककरो त' नै बढ़तै ,
जारि क' बंश मरै छी मायक कोखि सँ . . . । ।

गजल

ठोर लाल गोर गाल बबाल करै ,
कत्त' सँ रूप भेटल सबाल करै ,
अहाँ छी नव कली खुशबु भरल ,
लै छी अंगराई देखू हलाल करै ,
यौवन खतरा कए निशान सटल ,
देह चुमैत कपड़ा धमाल करै ,
मारि-झगड़ा फसि गेलै देखुयौ ने ,
एगो कनखी केहन कमाल करै ,
हमहूँ अहाँक दिवाना छी सजनी ,
देखू प्रेम सँ "अमित " खियाल करै . .
अमित मिश्र

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

गजल



अहाँ हँसैत रहि हमरा देखैत रहि
अहाँके नव-नव गीत सुनाबैत रहि

अहाँ रुसल रहि हम मनाबैत रहि
गुणगान अहाँकेँ  सगरो गाबैत रहि

अहाँ राति भरि निचैन सँ सुतल रहि
जागि उठिते अहाँ केँ हम देखैत रहि

अहाँ केखनो हँसियो सँ पाछु जे देखब
ताहिखन हम जीबैत नै मरैत रहि

हमर जिबन अहाँ लेल बनल अछि
जिबन भरि अहींके लेल जिबैत रहि

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१५)
जगदानन्द झा 'मनु'  : गजल संख्या-१६

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल---------



धार एखन धरि तँ उफानपर अछि
लोक ताका-ताकी करैत बान्हपर अछि

नहि जानि किओ केखनो जाएत भसिया
किओ कोठा पर किओ मचानपर अछि

कोठो बलाकेँ तँ नै बकसथिन्ह कमला
दूनू बगलीक बान्ह कटानपर अछि

भोर होइते मचि गलै गरद-मिसान
कोठा आ मड़इया दूनू भसानपर अछि

आखर-१५

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

गजल


अन्हारक की सुख बुझथिन इ इजोतक गाम मे सदिखन रहै वाला।
दुखे केँ सुख बना लेलक करेजक घातक दुख चुपे सहै वाला।

जमानाक नजरिक खिस्सा बनल ए आब तऽ करेज हमर सुनू यौ,
हुनकर नजरि कहाँ देखलक हमर करेजक इ शोणित बहै वाला।

कहै छै लाजक नुआ मे मुँह नुकौने रहल दुनियाक डर सँ अपन,
इ रीत अछि दुनियाक, तऽ एतऽ किछ सँ किछ कहबे करतै कहै वाला।

करू नै प्रकट अपन सिनेह मोनक, यैह हमरा ओ कहैत रहल,
किया हम राखब उठा केँ समाजक जर्जर रिवाज इ ढहै वाला।

अहाँ डेग अपन उठेबे करब कहियो हमर मोनक दुआरि दिसक,
बहुत "ओम"क बहल नोर, दुखक गरम धार मे गाम इ दहै वाला।
मफाईलुन (ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ) ५ बेर प्रत्येक पाँति मे।

मास जनवरी 2012क लेल गजल सम्मान योजनाक पहिल चरण

हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास जनवरी लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास जनवरीक लेल प्रभात राय भट्ट जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।


आइ हमर मोन एतेक उदास किएक
पानि लग रहितो मोनमे पिआस किएक

प्रभात संग पूनम आएत आस किएक
नै आएत से सोचि मोन उदास किएक

सिनेहक सागरमे हम नहेलहुँ नहि
तखन मिलन लेल मोन उदास किएक

हम प्रगाढ़ प्रेमक पराग लेलहुँ नहि
आइ प्रीतम मोन एतेक हतास किएक

हम मधुर मुस्कान संग हँसलहुँ नहि
आइ दिवा-स्वपन एतेक मिठास किएक



वर्ण--१६

गजल

हमर अहाँक संग भेल
सवय संसार तंग भेल

रहल शराब निसा नहि
एकर कतेक रंग भेल

परल मचान पर छलौं
अपन चुमान संग भेल

अपन पबैत संग छलौं
सगर कपार चंग भेल

भरल एतेक रंग देख
हमर करेज दंग भेल

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१२)
जगदानन्द झा 'मनु'  :  गजल संख्या-१५ 

गजल

आगि लागल जेना हो


घोरल जेना हो इनारेम


हम सूतल, पडल, निश्चिन्त


सोहरल जेना हो भराडेमे।


सुख सं रहब, शांति सं रहबबितैत


गेल जिनगी नियारेमे।


नाचैए लोक घेरायल बादिमो


देखू मगन अछि उधारेमे।


मरि-मरि क' जीयब आबो कोना


'अनिल' सूनू गजल इशारेमे।

रुबाइ



देखू हुनक आँखिसँ चूबि रहल शराब
आब तँ हरेक ठोरकेँ चूमि रहल शराब
ओ चाहैए पीबि ली सगरो जहान
अभागल सपनेमे पीबि रहल शराब


गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

गजल

डेगे-डेग ओ जमीन नापि रहल
कतS बिछाबी आसन भाँपि रहल

जनता कए ठगबाक लेल देखू
राम नामक राग अलापि रहल

भूत आ चाची कए डाईन बता कS
जोतषी बनि रूपैया छापि रहल

साँझ ओकर डेरा पर गेलौँ देखू
मांस मदिरा लुंगी सँ झाँपि रहल

कने पाखंडी जे हम कहि देलियै
देखू "अमित" कए शरापि रहल

आइ पकड़लक जखन पुलिस
देखू कोना थर-थर काँपि रहल


अमित मिश्र

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

गजल

बड मनभावन नयनक शोभा, काया श्याम वर्ण उत्किर्ण
सहसमुखी सौन्दर्यक अक्ष छनि, वक्ष समक्ष प्रेम उतीर्ण ।

पैघ केशक कलि फ़ूटित बनिकए खिलि प्रेमक किसलय
नख सिख दहक महक विराजत , हॄदय होयत विदिर्ण ।

मुसिक मुसिक मन उपवन विचरय सुन्दर सब नर- नारी
प्रेमालय केर छात्र गिरि कए भय जायत बहुधा अनुतीर्ण ।

प्रेम पथिक पथ जीवन बिसराए , पटकैत सदिखन माथ
बनि कवि आब सर्वत्र बौराए, दूषित देह लागै जीर्ण शीर्ण ।

- भास्कर झा 31/01/2012

गजल एवं आजाद गजल संग्रहक सूची

साल 1905मे प्रकाशित प.जीवन झाक नाटक "सुन्दर-संयोग"मे पहिल आधुनिक मैथिली गजलक दर्शन होइत अछि। आ तकरा बाद विभिन्न पत्र-पत्रिकामे विभिन्न शाइरक गजल प्रकाशित होइत रहल। मुदा गजल संग्रहक अभाव बराबर बनल रहल। एहिठाम हम मैथिलीमे एखन धरि प्रकाशित मैथिली गजल आ शेरो-शाइरीक संग्रहक सूची दए रहल छी। सूची दू तरहक अछि। पहिल सूचीमे एहन संग्रह अछि जाहिमे व्याकरणयुक्त गजल आ शेरो शाइरी अछि। दोसर तरहक सूचीमे एहन संग्रह अछि जाहिमे आजाद गजल आ शेरो-शाइरी अछि। तँ पहिने प्रस्तुत अछि पहिल सूची-------

मैथिली गजल संग्रहक पोथीक सूची--

चूँकि प्राचीन गजलकार सभहँक गजल संपादित पोथी सभमे अछि आ उपरमे ओकर चर्च भऽ चुकल अछि तँए ऐठाम हम तकर बादक बला पोथीक सभहँक विवरण दऽ रहल छी।

1)अहींक लेल (अक्षरवृतपर आधारित अछि। शाइर विजय नाथ झा, प्रकाशक-शेखर प्रकाशन, पटना -बर्ख 2008, मूल्य-150, ऐमे कुल 78 टा गजल आ 43 टा कविता अछि)।
2)अनचिन्हार आखर (सरल वार्णिक बहरपर आधारित अछि। शाइर आशीष अनचिन्हार, प्रकाशन वर्ष-2011, ऐमे कुल 30 पृष्ठक गजलक संक्षिप्त परिचय, 78 टा गजल, 32 टा रुबाइ, आ 2 टा कता अछि। ई श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित अछि, मूल्य 200 टका)।
3)धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ (सरल वार्णिक बहर आ अक्षरवृतपर आधारित अछि। शाइर गजेन्द्र ठाकुर, प्रकाशन वर्ष 2012, ऐमे कुल 58 पृष्ठक गजल शास्त्र आलेख, 1 टा रुबाइ, 2 टा कता आ 37 टा गजल अछि। ई श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित अछि)।
4)माँझ आँगनमे कतिआएल छी (सरल वार्णिक बहरपर आधारित अछि। शाइर मुन्ना जी, प्रकाशन वर्ष 2012, ऐमे कुल 50टा गजल आ 11 टा रुबाइ अछि। ई श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित अछि)।
5)नव अंशु (सरल वार्णिक बहर आ अक्षरवृतपर आधारित अछि। शाइर अमित मिश्र , प्रकाशन वर्ष 2012, ऐमे कुल 90टा गजल, 6 टा हजल आ 16 टा रुबाइ अछि। ई श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित अछि)।
6)मोनक बात (सरल वार्णिक बहर आ अक्षरवृतपर आधारित अछि। शाइर चंदन झा, प्रकाशन वर्ष 2012, ऐमे कुल 66 टा गजल, 2 टा हजल, 33 टा रुबाइ, 15 टा बाल गजल आ 1 टा कता। ई श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित अछि)।
7)कियो बूझि नै सकल हमरा (सरल वार्णिक बहर आ अक्षरवृतपर आधारित अछि। शाइर ओम प्रकाश, प्रकाशन वर्ष 2012, ऐमे कुल 87 टा गजल, 8 टा रुबाइ आ 1 टा कता। ई श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित अछि)।
8)नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर (सरल वार्णिक बहर आ अक्षरवृतपर आधारित अछि। शाइर जगदानंद झा मनु। प्रकाशक श्रुति प्रकाशन। प्रकाशन वर्ष 2014, विदेहक पोथी डाउनलोडपर ई-वर्सन प्रकाशित। प्रिंट रूप- बर्ख 2022, पल्लवी प्रकाशन, नर्मलीसँ)।
9)गजल गंगा (शाइर जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल, 2015, विदेहक पोथी डाउनलोडपर ई-वर्सन प्रकाशित)
10)नेपालक नोर मरुभूमिमे (शाइर बिंदेश्वर ठाकुर ऐमे 12टा गजल आ 28टा रुबाइ, कता समेत किछु स्वतंत्र शेर, लघुकथा, विहनिकथा आ कविता अछि, प्रकाशक श्रुति प्रकाशन, वर्ष 2014)
11) जे कहि नञि सकलहुँ (शाइर-दीप नारायण विद्यार्थी, मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति, मधुबनी, बर्ख-2014, मूल्य-125)
12) मोनक देहरिपर (शाइर-प्रदीप पुष्प, पल्लवी प्रकाशन, निर्मली, बर्ख-2020, मूल्य-200)
13)जंघाजोड़ी (शाइर आशीष अनचिन्हार, गजल संग्रह, ई भर्सन प्रकाशित)
14)कुमारि इच्छा (शाइर आशीष अनचिन्हार, गजल संग्रह, ई भर्सन प्रकाशित)
15)मैथिलीक प्रतिनिधि गजल (1905सँ 2022 धरि),संपादक गजेन्द्र ठाकुर एवं आशीष अनचिन्हार, ई-भर्सन प्रकाशित
“अनचिन्हार आखर” मैथिलीक पहिल आ एखन धरिक एकमात्र गजल केन्द्रित पत्रिका अछि। 



मैथिलीक आजाद गजलक पोथीक सूची--

1)उठा रहल घोघ तिमिर---बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर विभूति आनंद (प्रकाशन वर्ष June 1981, ऐमे कुल 34 टा गजल अछि आ ई भारती प्रकाशन, पटनासँ प्रकाशित अछि। मूल्य 3टका साधारण, 6 टका विशेष)
2)कान्ह पर लहास हमर---बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर कलानंद भट्ट (2ep.1983, ई किसुन संकल्प लोक, सुपौलसँ प्रकाशित अछि आ ऐमे कुल 48 टा गजल अछि। मूल्य 4टका)
3)मोमक पघलैत अधर---शाइर राम भरोस कापड़ि भ्रमर, प्रकाशन वर्ष1983। हमरा लग उपल्बध नै अछि।
4)लेखनी एक रंग अनेक ----बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर रवीन्द्रनाथ ठाकुर (15/8/1985, ऐमे कुल 109 टा गजल आ 7 टा कता अछि। ई पूर्वांचल प्रकाशन, पटनासँ प्रकाशित अछि। मूल्य 10 टका)
5)अवान्तर--बिना बहरक गजल सभ अछि ऐमे। शाइर मायानंद मिश्र, 1988
6)शोणिताएल पएरक निशान--बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर सियाराम झा सरस (1989, ऐमे कुल 48 टा गजल अछि। ई सरला प्रकाशन, मेहथसँ प्रकाशित अछि। मूल्य 12 टका)
7)पहरा पर इमान--बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर बाबा बैद्यनाथ (1989, ऐमे कुल 30टा गजल अछि)
8)लोकवेद आ लाल किला--बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। संपादक शाइर सियाराम झा सरस (प्रकाशन वर्ष 1990, ऐमे कुल 12 टा गजलकारक 84 टा गजल अछि। ई विद्यापति सेवा संस्थानसँ प्रकाशित अछि। मूल्य 12टका)
9)नागफेनी--बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर रमेश (1990, ऐमे कुल 58 टा गजल अछि। मूल्य 10टका समान्य, 15 टका पुस्तकालय)
10)गीत ओ गजल--बिना बहरक गजल सभ अछि ऐमे। शाइर शुधांसु शेखर चौधरी (ऐमे कुल 31 टा गजल आ 7 टा गीत अछि)
11)अपन युद्धक साक्ष्य--बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर तारानंद वियोगी (प्रकाशन वर्ष 1991, ऐमे कुल 40टा गजल अछि। ई चतुरंग प्रकाशन, बेगूसरायसँ प्रकाशित अछि। मूल्य 7 टका)। एही कथित गजल संग्रहक दोसर संस्करण 2016मे आएल जकर प्रकाशक किसुन संकल्प लोक अछि। अइमे कथित पुरना गजलक संग 25 टा नव कथित गजल सहो देल गेल अछि आ संगे-संग बारह टा गीत सेहो जोड़ल गेल अछि।
12)थोड़े आगि थोड़े पानि--बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर सियाराम झा सरस (प्रकाशन वर्ष nov.2008 ऐमे कुल 80टा गजल अछि। ई नवारम्भ प्रकाशन, पटनासँ प्रकाशित अछि। मूल्य 70टका)
13)गजल हमर हथियार थिक--बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर सुरेन्द्रनाथ (2008, ऐमे कुल 68 टा गजल अछि। ई नवारम्भ प्रकाशन, पटनासँ प्रकाशित अछि। मूल्य 70टका)
14)सूर्यास्तसँ पहिने--बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर राजेन्द्र विमल (प्रकाशन वर्ष-साल 2068, 2011, पृथु प्रकाशन, जनकपुर नेपाल, ऐमे कुल 96 टा गजल अछि। मूल्य 100 टका साधारण, 200 टका संस्थागत)
15)नवीन मैथिली गजल--हमरा लग उपल्बध नै अछि। शाइर अनन्त बिहारी लाल दस “इन्दु”
16)मधुर मैथिली गजल--हमरा लग उपल्बध नै अछि। शाइर अनन्त बिहारी लाल दस “इन्दु”
(इन्दु जीक संग्रहक जानकारी हमरा सरसजी द्वारा भेटल अछि हलाकिं हुनको लग दूनू संग्रह नै छन्हि)
17)बहुरुपिया प्रदेश मे ---बिना बहरक गजल संग्रह अछि ई। शाइर अरविन्द ठाकुर (प्रकाशन वर्ष-nov 2011, ऐमे कुल 66 टा गजल अछि। ई नवारम्भ प्रकाशन, पटनासँ प्रकाशित अछि। मूल्य 125 टका सजिल्द, 75 टका अजिल्द)
18)दुखक दुपहरियामे--बिना बहरक गजल सभ अछि ऐमे। गंगेश गुंजन (ऐमे 14 टा गजल सनकेँ किछु अछि)
19)संघर्षक पथ पर--अशोक दत्त (हमरा लग उपल्बध नै अछि)
20)चानन-काजर---बिना बहरक गजल सभ अछि ऐमे।। देवशंकर नवीन
21)आखर-आखर गीत----बिना बहरक गजल सभ अछि ऐमे। सियाराम झा सरस (ऐमे कुल 16 टा गजल आ 73 टा गीत अछि। ई सरला प्रकाशन, मेहथसँ प्रकाशित अछि)
22)सोम पदावली---बिना बहरक गजल सभ अछि ऐमे। शाइर सोमदेव
23)जे गेल नहि बिसरल--शाइर मोहन यादव, प्रथम संस्करण-जून 2015, प्रकाशक-मैथिली प्रेरणा परिषद, श्रीपुर, सकरी, दरभंगा, कुल 81 टा कथित गजल अछि अइमे।
24)साजन सिनेहिया (सतीश साजन, बर्ख-2017, नवारम्भ प्रकाशन, एहिमे गीत ओ कथित गजल दूनू अछि)।
25)टाँगल मोलायम रौद (रामेश्वर निशांत, बर्ख- 2017, नवारम्भ प्रकाशन)।
26)विश्वग्रामक वलिवेदीपर (अजित अजाद, बर्ख-2019, नवारम्भ प्रकाशन)
27)मीन तुलसीपात पर (अरविन्द ठाकुर, बर्ख- 2020, नवारम्भ प्रकाशन)
28)बाजब बदलि रहल छै (मनोज शांडिल्य, बर्ख-2020, नवारम्भ प्रकाशन
29)रखबार (बैकुंठ झा, बर्ख-2021, नवारम्भ प्रकाशन)
30)नब युद्धक ओरिआन (प्रेमचंद्र पंकज, बर्ख-2021, नवारम्भ प्रकाशन)
31)घर-घर इजोत रहय (तारानंद झा तरुण, बर्ख-2021, कामाख्या झिंगुर साहित्य कला परिषद, मलाढ़)
32)आबि रहल एक हाहि (कमल मोहन चुन्नू, बर्ख-2021, नवारम्भ प्रकाशन)
33)स्वेद-राग (संपादक-धीरेन्द्र प्रेमर्षि, बर्ख-2021, नवारम्भ प्रकाशन)

आजाद गजलक पैरोकार सभ एखन धरि कोनो आलोचना नहि लीखि सकलाह अछि। 

ई सूची अपना आपमे अपूर्ण अछि समय-समय पर अपेक्षित सुधार होइत रहत। अहूँ सभहँक सहयोग अपेक्षित अछि।


गजल


कुमुदिनी पर भँभर किये मंडराईय
यौ पिया कहू नए दिल किये घबराईय

भँभर कुमुदिनी सं मिलन करैत छैक
ये सजनी अहांक दिल किये घबराईय

मोनक बगिया में नाचैय मोर मयूर यौ
मोनक उमंग सं दिल किये घबराईय

अहाँक रोम रोम में अछि प्रेमक तरंग
प्रेमक तरंग सं दिल किये घबराईय

प्रीतक बगिया में कुहकैय छैक कोईली
मधुर स्वर सुनी दिल किये घबराईय

मोन उपवनमें भरल प्रीतक श्रिंगार
मिलन कय बेर दिल किये घबराईय


...............वर्ण:-१६...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 31 जनवरी 2012

गजल


जखन सँ खसल आँचर देखलहुँ हम
तखन सँ बुझू सबटा  बिसरलहुँ हम

होस रहल नै कतय छी कनिको अपन
आब तs अहीं में पूर्णतय रमलहुँ हम

दोख आँचरक नै ई  खुसनसीबि हमर
मोन में अहाँ कए अपन बनेलहुँ हम

अहाँ मानु नै मानु आँचर हमहि राखब
खसै छै कतेक खसै दियौ ठानलहुँ हम

सुकोमल काया बदन सुन्नर चन्दन सँ
आँचरक बहाने अहाँ केँ  जानलहुँ हम

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१६)
जगदानन्द झा 'मनु' : गजल संख्या -१४



तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों