सोमवार, 28 सितंबर 2020

गजल

पानिमे पानि परसल जाइए
आगिमे आगि बाँटल जाइए

शब्दपर शब्द लीखल जाइए
अर्थ बस अर्थ छूटल जाइए

भेल कोंढ़ीक चर्चा रातिमे
भोरमे फूल लोढ़ल जाइए

छै अपन ढेप माटिक मोल नै
आनकेँ सोन बूझल जाइए

आसमे चुप रहैए बेरपर
बेरपर ढोल पीटल जाइए

सभ पाँतिमे 212-2122-212 मात्राक्रम अछि।



शुक्रवार, 18 सितंबर 2020

गजल

नाम हुनका लग लिखा गेल हमरो
आब की हेतै बुझा गेल हमरो 

दाम अपने हम लगेलहुँ अते कम
जे अपन जीवन लिया गेल हमरो 

भेल छल शुरुए शुरूमे तते जे 
अंतमे सप्पत खुआ गेल हमरो 

रंग हुनकर देखि दुनियों कहल आ
बेरपर कहबी फुरा गेल हमरो

के रहत के नै रहत से कहत के 
आइ देखू भोज खा गेल हमरो

सभ पाँतिमे 2122-2122-122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

मंगलवार, 15 सितंबर 2020

गजल

सत्ता के मातल नेता एलै दुआर हे

दुखमे ई झड़कल जनता फोड़ल कपार हे


रचनामे साधु छै जीवनमे किछु आर हे 

एहनकेँ माने बुझियौ बड़का छिनार हे


नोरे छै कोसी कमला गंगा किनार हे

नोरेमे घोरल गेलै सिंदुर पिठार हे 


आँगनमे रेखा पड़तै भेलै विचार हे 

अपने के केलक पहिने अपने शिकार हे 


मुद्दा तँ लीखै तेना जेना सरकार हे

सरकारक आगू भेलै बंदे बकार हे 


सभ पाँतिमे  22-22-22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। ई गजल लोकधुनपर आधारित अछि।

सोमवार, 14 सितंबर 2020

गजल

खाली जेबी लोक लग

छुच्छे थारी लोक लग


दिन दुपहरिया हम कहब

रातुक पारी लोक लग 


सिस्टम सेहो चुप रहल

सिस्टमशाली लोक लग


किम्हर गेलै फूल सभ

छै फुलडाली लोक लग


ई सभ बुझलक अंतमे

संकट भारी लोक लग


सभ पाँतिमे 22-22-212 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 





बुधवार, 9 सितंबर 2020

गजल

चानन टिक्का आर मसुआइ
अजगुत खेला भाइ रे भाइ

दुनियाँ माने अतबे बूझू
झूर झमेला लाइ लपटाइ

ई सभ भेलै लेकिन फेरो
की सभ हेतै दाइ गे दाइ

सुख के माने तिलबा हेतै
दुख के माने लाइ चुड़लाइ

हुनके जकाँ हम हाथ जोड़ल
हुनके जकाँ हमहूँ नितराइ

सभ पाँतिमे 22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

बुधवार, 2 सितंबर 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-33

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी। एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू। अजुका गीत अछि 'खिलौना, जानकर तुम तो, मेरा दिल तोड़ जाते हो"। एहि गीतक हरेक पाँतिमे 1222-1222-1222-1222 मात्राक्रम अछि। ई फिल्म "खिलौना" केर गीत अछि। गीतकार छथि आनंद बक्षी। संगीतकार छथि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल। गायक मो.रफी। ई फिल्म 1970मे आएल रहै जाहिमे संजीव कुमार, मुमताज, शत्रुघ्न सिन्हा आदि कलाकार छलथि।

खिलौना, जानकर तुम तो, मेरा दिल तोड़ जाते हो
मुझे इस, हाल में किसके सहारे छोड़ जाते हो

मेरे दिल से ना लो बदला ज़माने भर की बातों का
ठहर जाओ सुनो मेहमान हूँ मैं चंद रातों का
चले जाना अभी से किस लिये मुँह मोड़ जाते हो

गिला तुमसे नहीं कोई, मगर अफ़सोस थोड़ा है
के जिस ग़म ने मेरा दामन बड़ी मुश्किल से छोड़ा है
उसी ग़म से मेरा फिर आज रिश्ता जोड़ जाते हो

खुदा का वास्ता देकर मना लूँ दूर हूँ लेकिन
तुम्हारा रास्ता मैं रोक लूँ मजबूर हूँ लेकिन
के मैं चल भी नहीं सकता हूँ और तुम दौड़ जाते हो

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।  ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--

रविवार, 30 अगस्त 2020

गजल

जेहन जेहन भेलै मति

तेहन तेहन भेलै गति


खाली सम्बन्धे टुटलै

जीवनमे छै अतबे क्षति


नै छै कियो जनता लेल

प्रधानमंत्री राष्ट्रोपति


कनियें रस आ बहुते बिख

रखने रहला हमरा प्रति


हम्मर हिनकर जिनकर हो

छै ईहो अति ओहो अति


सभ पाँतिमे 22-22-22-2 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। ई बहरे मीर अछि। 


शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

गजल

बसबिट्टी सन घनगर दुख
बाँसे सन छै नमहर दुख

गोपी बनि ललचाबै सभकेँ
ई टिकुला दुख मज्जर दुख

हुनका हिस्सा सीसो सभ
हमरा हिस्सा पीपर दुख

हारल दुख हमरा भेटल
जीतल जीतल हुनकर दुख

बहुते दिन सुख लग रहितो
रहिए गेलै असगर दुख

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शनिवार, 22 अगस्त 2020

गजल

हुनकर आँखिक अतबे सपना

हिंदू मुस्लिम चमरा बभना


साहित्य आ कि राजनीतिमे

अबिते रहलै अदना पदना


अधरतियामे हमहूँ देखल

एकै भेलै अरघा बदना


नोर नोर नोर नोरे नोर

अतबे लिखने रहथिन विधना


दुख भेटल रहै मुँहदेखाइ

दुक्खे रहै हमर मुँहबजना


सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि

गुरुवार, 20 अगस्त 2020

गजल

 छै अमीरक दिक्कत हीरा सोन दिक्कत

आ गरीबक दिक्कत माँड़े नोन दिक्कत


कोना पुरतै सिंदूर सभ इच्छा लेल

रहतै किछु इच्छा कुमारि तँ कोन दिक्कत


हमहूँ मानि लेलहुँ ओहो मानि लेलक

अइ दुनियाँमे देह दिक्कत मोन दिक्कत


किनको खातिर ई कर्जो भेलै तगमा

किनको खातिर सबूत बला लोन दिक्कत


बिना जनने बिना बुझने उल्टा प्रभाव छै

तांत्रिक सभ लग जोग दिक्कत टोन दिक्कत


सभ पाँतिमे 222-222-222-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि।

सोमवार, 17 अगस्त 2020

मैथिली गजल

राति चुप अछि आ गगन के ओ चान चुप अछि

फेरि  के  आँगनसँ   मुँह  ई   दलान  चुप  अछि

छोड़ि  के  चलि  गेला  जहियासँ  सभके  बाबा
माँछ-पोखरि,   खेत-गाछी,  मचान   चुप  अछि

बाजि  के  टप  टप   अहाँ  पैघ   नै  भ'  जायब
पैघ  अछि  ओ जे  कि सागर समान  चुप अछि

रूप  हुनकर  "मीर"  के सब  गजलसँ  बढ़ि  के
तँइ  हमर  सब शे'र  बनि  के अकान  चुप अछि

फेर   छी   सबटा   समयक  ई   आर   किछु  नै
शोर  चुप्पी अछिक' रहल  आ  जुबान चुप अछि

~आशुतोष मिश्रा 'अज़ल'

मात्रा क्रम:-२१२२ २१२२ १२१ २२

सोमवार, 3 अगस्त 2020

गजल

गहुमन बली अजगर गली
धामन बली साँखर गली

नेहक धनी जाइत रहल
आँचर गली काजर गली

बगुला भगत भेटल बहुत
बाहर गली भीतर गली

कोना चलब अतबे कहू
हिनकर गली हुनकर गली

आएल रहथिन देवतो
पापक महल पामर गली

सभ पाँतिमे मात्राक्रम 2212-2212 अछि।

गुरुवार, 30 जुलाई 2020

गजल

अपना सन नै लागल अनचिन्हार
अनका लग ई बाजल अनचिन्हार

रचनामे कनियों नै रहलै धाह 
सुविधा रसमे डूबल अनचिन्हार

बहुते बाजल लेकिन काजक बेर
नाँगरि सुटका भागल अनचिन्हार

बदलत सभ कहियो बाजल ई बात
अलमीरामे राखल अनचिन्हार

पक्का हेतै ई चिन्हारक काज
सोझा सोझी बाजल अनचिन्हार

सभ पाँतिमे 222-222-222-1 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

मंगलवार, 21 जुलाई 2020

मैथिली गजल


फूसि  के  आगू   कते  ई   सच  लचार  अछि
आबि   ठोरक   कोनटा  तँइ  धेने  ठार  अछि

ओस  गाल  पर, जेना  पनिसोखा  उगल अइ
आँखिमे  ओकर  हमर  जीवन  के  सार अछि

अइ जँ  ई जिनगी  नदी  सभहक  तखन  फेर
दुःख-सुख   एकर  बुझू   दूटा   किनार  अछि

सब  कियो  अहि  जगमे   ऋणी  ओकरे  अइ
मृत्युपर  जिनगी  अपन  सभहक  उधार अछि

ई बसात अइ आकि अछि पायल के छम-छम
भ्रम  में  छी  जे  कियो  आयल  त  द्वार अछि

~आशुतोष मिश्रा 'अज़ल'

बह्र-ए-रमल मुसद्दस सालिम

फ़ाइलातुन् फ़ाइलातुन् फ़ाइलातुन्

वज़्न:-२१२२/२१२२/२१२२


गजल

जिनगी छैक अनमोल रे मन
माटि मे नहि तू रोल रे मन

बंद कोठरी गुमसि उठइ छै
द्वार हृदय के खोल रे मन

नेना क अधबोलिया बाजब
कान मे मिसरी घोल रे मन

चोरिक धुन पर गाबि रहल सब
गीतोक अटपट बोल रे मन

भेल चुनाव क गहमा-गहमी
फूजि रहल आब पोल रे मन

घरक झगड़ा आयल चौक पर
पसरल आब भरि टोल रे मन

मलिन मोन आ रूप सजाबै
गुदरी पर जना ख़ोल रे मन

घोघ छै तनने बीत भरि के
बजै छै पटपट लोल रे मन

बरिसय मेघबा झिहिर झिहिर क
पपिहा करय अनघोल रे मन

सोना सन के काया पाबि क
बोल छै कबकब ओल रे मन

✍️✍️✍️जयंती कुमारी













शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

नचारी (शिव‌ भजन/ भक्ति गीत)

हाथ डमरू कान कुण्डल शीर्ष शोभै चान हे
बैसि पर्वत पर धरै एकान्तमे शिव ध्यान हे

रुद्र माला बांहि पहिरल बाघ छाला जांघमे
साँप धारण कण्ठ केने देह मातल भांगमे
पाप नाशक धर्म रक्षक जग करै कल्याण हे
हाथ डमरू कान कुण्डल...................

नैन खुजिते फूल बरसै ठोर बजिते प्रेम यौ
इन्द्र नारद भक्त बनि पूरा करै सब नेम यौ
शुद्ध रहिते भाव सहजे देत सब वरदान हे
हाथ डमरू कान कुण्डल...................

हाथ डमरू कान कुण्डल शीर्ष शोभै चान हे
बैसि पर्वत पर धरै एकान्तमे शिव ध्यान हे

2122-2122-2122-212
(बहरे रमल मुसम्मन महजूफ)

© कुन्दन कुमार कर्ण

सोमवार, 13 जुलाई 2020

गजल

अपना हकमे सुविधा लिखने
हमरा हकमे विपदा लिखने

फैक्ट्री चलतै इंटरनेटी
खेती हेतै कदबा लिखने

हमरो अनुभव रखने रहियौ
काँटे भेटत रस्ता लिखने

अनका भरसे कत्ते रहबै
दुनियाँ बदलत अपना लिखने

बैसल रहने किछु नै भेटत
मकता पूरत मतला लिखने

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शनिवार, 11 जुलाई 2020

गजल

अहाँ बिना सिन्दुर पिठार की हेतै
अहाँ बिना पावनि तिहार की हेतै

अहीं हमर छी देवता अहीं स्वामी
अहाँ बिना जीवन सकार की हेतै

भरोस नै अछि जे कखन अहाँ आयब
अहाँ बिना बिन्दी कपाड़ की हेतै

कते करी असगर पुजाक तैयारी
अहाँ बिना सौंसे हकार की हेतै

बहुत फरल अछि आम आउ ने गामे
अहाँ बिना फारा अचार की हेतै

मात्राक्रम अछि 1212-2212-1222 मुफाइलुन-मुस्तफइलुन-मुफाईलुन

शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

गजल

भुखिया दुखिया भूखे मरतै  सैह कहू ने
कोठीक  धान धयले रहतै  सैह कहू ने

एना मे गरीब गुरबा सब  मारल जेतै
हाकिम सब अप्पन घर भरतै सैह कहू ने

एकटा कोरोना सँ जिनगी  तबाह  भेलै
दोसर धरतै तब की हेतै सैह कहू ने

नानी धन बइमानी धन की रहलै ककरो
कफन छोड़ि किछुओ नहि जड़तै  सैह कहू ने

ढउआ तँ उड़िया रहल छै हावामे 'लाला'
जे छै थितगर वैह पकड़तै सैह कहू ने

2222-2222-2222 मात्रा क्रम बहरे मीर पर आधारित सुझाव सादर आमंत्रित

अरुण लाल दास
01 जून ,2020

मंगलवार, 7 जुलाई 2020

गजल

कहबौ तोरा अपने घरक बात
लगतौ तोरा अपने घरक बात

अइ खाली खाली घरमे सदिखन
तकतौ तोरा अपने घरक बात

काशी केर ठक सभ आब गेलै
ठकतौ तोरा अपने घरक बात

घुमा फिरा कऽ पहिल बलिदान लेल
चुनतौ तोरा अपने घरक बात

बेरा बेरी संदेहक आँखिसँ
पढ़तौ तोरा अपने घरक बात

सभ पाँतिमे 22-22-22-22-2 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सोमवार, 29 जून 2020

गजल

करिते रहलै मारि बात
धरिते रहलै डारि पात

हुनकर हँसी चूड़ा दही
हुनकर तामस दूध भात

एक दू तीन चारि पाँच
केने छै अनेको घात

कनी सुगंध कनी अवाज
पसरि गेलै चारू कात

बिच्चे बैसल धनी मनी
बाँकी सभ तँ काते कात

सभ पाँतिमे 22-22-22-2  मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

बुधवार, 24 जून 2020

गजल

बाहर बाहर जोड़ल भतार
भितरे भीतर टूटल भतार

छै मृगतृष्णा सन के विकास
इम्हर उम्हर दौड़ल भतार 

इच्छा माने पूरा समान 
किम्हर जेतै परिकल भतार

लेने हेतै सभटा हिसाब
चुप्पे रहि रहि कानल भतार

हमरा आने देलक समाद
अपने लोकक दागल भतार

सभ पाँतिमे 22-22-22-121 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।


सोमवार, 22 जून 2020

गजल

पानि कादो थाल की छै
बोनि उपजा टाल की छै

प्रश्न ईहो पूछि देलक
आर कहियौ हाल की छै

साधि लेलक दर्द सभटा 
राग सुर आ  ताल की छै

घीचि लेतै प्राण सभहक
जीह की छै खाल की छै

गेल सौतिन फेर पोखरि
माछ पुछतै जाल की छै


सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि।

गुरुवार, 18 जून 2020

गजल

जनबल धनबल छलबल मोन
कत्ते सहतै निर्बल मोन

सदिखन चाहै पापक ओट
सुंदर निश्छल निर्मल मोन

गर्जन तर्जन वर्जन सूनि
चुप्पे रहलै कलबल मोन

हमरे हिस्सा थाकल देह
हमरे हिस्सा चनकल मोन

अनका खातिर अनचिन्हार
हमरा खातिर दगधल मोन

सभ पाँतिमे 22-22-22-21 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सोमवार, 15 जून 2020

गजल

भूमिपर अघोषित आपदा छै
आदमीसँ बेसी देवता छै

मोक्ष लेल साधल मोहमाया
साधनासँ बेसी वासना छै 

मोन मरि कऽ एलै देह खातरि
जीबि जाइ अतबे कामना छै

रत्न सागरक मंथनसँ भेटल 
ई उठा पटक संभावना छै

मोनमे बसल छै मोन हुनकर
संग लेल ई प्रस्तावना छै 

सभ पाँतिमे 212-122-2122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शनिवार, 13 जून 2020

गजल

हरी नाम सुमिरन हरी नाम कीर्तन
हरी नाम पूजन हरी नाम वंदन

हरी नाम माथो हरी नाम चंदन
हरी नाम मूँहो हरी नाम दर्पण

हरी नाम बरतन हरी नाम भोजन
हरी नाम देहो हरी नाम पोषण

हरी नाम धरती हरी नाम मेघन 
हरी नाम गर्मी हरी नाम शीतन

हरी नाम  बाहर हरी नाम आँगन
हरी नाम दुनियाँ हरी नाम जनजन

सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि। जनसाधारण लेल हरि केर उच्चारण हरी कएल गेल अछि। सभ भारतीय मानसमे सदासँ उपस्थित अछि हम एकरा मात्र गजलक हिसाबसँ रखलहुँ अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

शुक्रवार, 12 जून 2020

गजल

मनोबल मनोरम बना देत निश्चित
मनोकामना सभ पुरा देत निश्चित

नियम ई सदा मोन राखब अहाँ हम 
अपेक्षा उपेक्षित बना देत निश्चित

कते रोकि रखतै कते दाबि सकतै
बहल नोर दुनियाँ जरा देत निश्चित

कनी आचरण ठीक रखबै तँ अनुभव 
गजल नीक सुंदर कहा देत निश्चित

कियो आइ पूजा करैए मुदा ओ 
विसर्जन कऽ जल्दी भसा देत निश्चित

सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

बुधवार, 10 जून 2020

गजल

पुछारी करा गेल हेतै
बुढ़ारी बना गेल हेतै

अचानक मिझा घूर भागल
जरूरे दगा गेल हेतै

कनी देखलहुँ बाट सरगक
दिबारी जरा गेल हेतै

अबैए गमक किछु अजीबे
कि सुइटर बुना गेल हेतै

विलंबित रहल ताल सभहक
कहीं द्रुत गबा गेल हेतै

सभ पाँतिमे 122-122-122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

मंगलवार, 9 जून 2020

गजल

सजल नयन मिथिलेश हो मालिक
कमल नयन अवधेश हो मालिक

हुनक कहब छनि जे ई सभ हमरे
हमर बचल कुन देश हो मालिक

दशा दिशा के तय करत अहि ठाँ
सड़ल गलल परिवेश हो मालिक

कनी मनी छनि आचरण हुनकर
बहुत बहुत उपदेश हो मालिक

नवे नवे अफसर नवे भाषण
सुनल सुनल संदेश हो मालिक

सभ पाँतिमे मात्राक्रम 12-1222-1222 अछि।  सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

गजल

गतिहत संगत झंझट डेरा
मतिहत पंगत अगबे फेरा

अपने पुरखा कहने रहथिन
करनी जनिअह मरनी बेरा

एना मरतै आलू कोबी
ओना मरतै झिमनी घेरा

बहुते नखरा राँगल जंतुक
शेरक मुद्रा बैसल शेरा  

एकै पेटक तीनू बच्चा
सरदर तख्ता खुहरी चेरा

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आममत्रित अछि।

सोमवार, 8 जून 2020

गजल

घड़ी दू घड़ी जे बिता गेल भमरा
बहुत बात हमरा सिखा गेल भमरा 

गमक लीखि देबै मधुर रस परागो
जदी गाछ फूलक पटा गेल भमरा 

निमाहब कठिन छै हलाहल समाने
अपन आन खातिर बिका गेल भमरा 

हमर टीस लेलक अपन टीस देलक
तकर बाद किम्हर नुका गेल भमरा

रहै दाग पुरना मुदा दर्द नवके
हवन कुंड लग सकपका गेल भमरा 

सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

शनिवार, 6 जून 2020

गजल

इष्ट सीता इष्ट राघव
इष्ट राधा इष्ट माधव

चैत वैशाखक युगल छवि 
अष्टमी छै मास भादव 

आस देलनि रास रचलनि
मुग्ध देवो मुग्ध मानव

नाम रावण नाम कंसे 
नष्ट केलनि दुष्ट दानव 

हित मनुष्यक चाहलथि ओ
एक रघुकुल एक यादव  

सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।  

गजल

आइ जे इतिहास हेतै
काल्हि से उग्रास हेतै

पाइ बिन अतिचार मानू
पाइ बिन मलमास हेतै

की जरूरी हारि मानी
आस रखने रास हेतै

बूझि गेलहुँ बात हुनकर
दोसरे सभ खास हेतै

छल अभयमुद्रा बहुत दिन
आब ओ संत्रास हेतै

सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।  

शुक्रवार, 5 जून 2020

गजल

अस्त्र हुनकर चालबाजी
शस्त्र हुनकर जालसाजी

डेग डेगक आस रखने
लोक खातिर वेद राजी

चुप भऽ देखै अंग दहिना
वाम खेलै तीख बाजी

सैंत बैसल छी हँसी हम
खूब उछलै नोर पाजी

खूब बंटाधार हेतै
खेल मुकुटक ताज ताजी

सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

गुरुवार, 4 जून 2020

गजल

मोन बनलै शांतिवादी
पेट बनबै क्रांतिकारी

एक राजा एक रानी
बाद बाँकी दास दासी 

ई जमा हमरे जमा अछि
आँखि भारी पीठ भारी

की कऽ सकतै से तँ कहियौ
दोस्त बनलै काठ आरी

भाग ओकर एहने छै
एकभुक्ते एकचारी

सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

बुधवार, 3 जून 2020

गजल

शत्रु सम अभ्यास ताकै
लाशमे उल्लास ताकै

बीचमे छै मोह माया
कातमे संन्यास ताकै

बेचलक जे माघ फागुन
घुरि कऽ ओ मधुमास ताकै

आर पारक खेल हेतै
नित नवल विश्वास ताकै

जानि ने की बूझि दुनियाँ
वास्तविक आभास ताकै

सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

मंगलवार, 2 जून 2020

गजल

लंफ लंफा संगमे नै
ढेर शंका संगमे नै

आपरूपी इष्ट भेटल
धैर्य हमरा संगमे नै

ई उपासे ओ उपासे
पैंट अंगा संगमे नै

पाइ कोठा फ्रीज सोफा
बीत बिग्घा संगमे नै

काँट हँसलै देखि अतबे 
फूल भमरा संगमे नै
 
बोझ परहक आँटी सनक ई शेर--

देह पूरा ठीक लेकिन
रीढ़ हमरा संगमे नै

सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

शनिवार, 30 मई 2020

© कुन्दन कुमार कर्ण


शुक्रवार, 29 मई 2020

गजल

पानि मँगिते रौद धधकल
रौद मँगिते पानि बरसल 

मोन बुझिते देह उमकल
देह छुबिते मोन बहसल

पाँच बर्खक आस अतबे
धोधि उपजल पेट अफरल

चास केहन बास केहन
फूल रोपल काँट उपजल

ई समय केहन समय छै
प्राणमे छै प्राण अटकल

सभ पाँतिमे 2122-2122 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

मंगलवार, 26 मई 2020

गजल

डोकहर वासिनी ग्रामिणी भगवती 
दुखहरी सुखकरी राज राजेश्वरी

मातृदेवी युगल उर्वरी कामिनी
सुंदरी माधुरी काम कामेश्वरी

शालिनी मालिनी शेखरी रागिनी
रुचिकरी शुचिकरी नाद नादेश्वरी

धर्मदा अर्थदा कामदा मोक्षदा 
जयकरी शुभकरी योग योगेश्वरी

कंकिनी काकिनी कोटरी साधिके
शंकरी सहचरी सर्व सर्वेश्वरी

सभ पाँतिमे 212-212-212-212 मात्राक्रम अछि।

शुक्रवार, 22 मई 2020

गजल

माथा छाती हाथो माछ
रसमे डूबल अधरो माछ 

देखू भेलै केहन भाग
पोखरि कूदै तरलो माछ

अगड़ा पिछड़ा चक्कर चालि
पोठी बनतै रहुओ माछ

अनकर पोखरि कत्ते आस
देलक धोखा अपनो माछ 

केहन केहन हेतै जाल
से सभ जानै नवको माछ

सभ पाँतिमे 22-22-22-21 मात्राक्रम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

गुरुवार, 21 मई 2020

हलिउड/इङ्गलिश फिल्मक गीतमे मिटर (छन्द/बहर)

मात्र हिन्दी फिल्ममे नै इङ्गलिश फिल्मी गीत सबमे सेहो मिटरक भरपूर प्रयोग भेल छै । निच्चा देखू हलिउडक सुपर डुपर हिट फिल्मक अतिलोकप्रिय गीत जे कि गीतक दुनियामे बहुतो रेकर्ड कायम करैत रेकर्डिङ्ग इन्डस्ट्री एशोसियन अफ अमेरिकाद्वारा शताब्दीक गीत(song of the century) मे समावेश भेल छै । एहि गीतक मुखडा आ मुखडाक पैटर्न जतए दोहराएल छै ततए एक किसिमक(6-6-8-6-6-8) आओर अन्तरा आ अन्तराक पैटर्न जतए दोहराएल छै ततए एक किसिमक(7-9-7-6-8) शब्दांश संख्या(syllable count), अर्थात मुखडा आ अन्तरामे दू अलत-अलग मिटरक प्रयोग भेल छै ।

Movie: Titanic (1997)
Lyrics: Will Jennings
Vocal: Celine Dion
Music: James Horner

Every night in my dreams
I see you, I feel you,
That is how I know you go on
Far across the distance
And spaces between us
You have come to show you go on

Near, far, wherever you are
I believe that the heart does go on
Once more you open the door
And you're here in my heart
And my heart will go on and on

Love can touch us one time
And last for a lifetime
And never let go till we're one
Love was when I loved you
One true time I hold to
In my life we'll always go on

Near, far, wherever you are
I believe that the heart does go on
Once more you open the door
And you're here in my heart
And my heart will go on and on

You're here, there's nothing I fear,
And I know that my heart will go on
We'll stay forever this way
You are safe in my heart
And my heart will go on and on


Scansion:

6-6-8-6-6-8
Eve/ ry/ night/ in/ my/ dre/ams…………………..…….6 syllables
I/ see/ you/ I/ feel/ you………………....………………….6 syllables
That/ is/ how/ I/ know/ you/ go/ on………………...8 syllables
Far/ ac/ ross/ the/ dis/ tance…………………………....6 syllables
And/ spa/ ces/ bet/ ween/ us……………………...…...6 syllables
You/ have/ come/ to/ show/ you/ go/ .…..……….8 syllables


7-9-7-6-8
Near/ far / wher/ ev/ er/ you/ are…………………..….7 syllables
I / be / lieve / that / the / heart/ does/ go/ on…..9 syllables
Once/ more/ you/ o/ pen/ the/ door…………………7 syllables
And/ you're/ here/ in/ my/ heart……………………….6 syllables
And /my/ heart/ will/ go/ on/ and/ on…………..….8 syllables
6-6-8-6-6-8
Love/ can/ touch/ us/ one/ time…………………..……6 syllables
And/ last/ for/ a/ life/ time…………..…………………….6 syllables
And/ ne/ ver/ let/ go/ till/ we're/ one….…………….8 syllables
Love/ was/ when/ I/ loved/ you…………………………6 syllables
One/ true/ time/ I/ hold/ to……………………………….6 syllables
In/ my/ life/ we'll/ al/ ways/ go/ on……………………8 syllables


7-9-7-6-8
Near/ far / wher/ ev/ er/ you/ are……………………...7 syllables
I / be / lieve / that / the / heart/ does/ go/ on…..9 syllables
Once/ more/ you/ o/ pen/ the/ door…………………7 syllables
And/ you're/ here/ in/ my/ heart……………………….6 syllables
And /my/ heart/ will/ go/ on/ and/ on……………...8 syllables


7-9-7-6-8
You're/ here/ there's/ no/ thing/ I/ fear……………..7 syllables
And/ I/ know/ that/ my/ heart/ will/ go/ on……...9 syllables
We'll/ stay/ for/ ev/ er/ this/ way…………………….…7 syllables
You/ are/ safe/ in/ my/ heart………………………….....6 syllables
And/ my/ heart/ will/ go/ on/ and/ on…………...…8 syllables

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-32

फिल्म: शिकारी (2000)
शाइर: समीर
गायक: कुमार सानु
संगीतकार: आदेश श्रीवास्तव
मुख्य कलाकारः गोविन्दा, करिशमा कपुर

बहर-ए-मुतकारिब मुसम्मन सालिम (122 x 4)

बहुत ख़ूबसूरत गज़ल लिख रहा हूँ
तुम्हे देखकर आजकल लिख रहा हूँ

मिले कब कहाँ, कितने लम्हे गुजारे
मैं गिन गिन के वो सारे पल लिख रहा हूँ

तुम्हारे जवां ख़ूबसूरत बदन को
तराशा हुआ इक महल लिख रहा हूँ

न पूछों मेरी बेकरारी का आलम
मैं रातों को करवट बदल लिख रहा हूँ

तक्तीअः

बहुत ख़ू / बसूरत / गज़ल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122
तुम्हे दे / खकर आ / जकल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

मिले कब / कहाँ कित / ने लम्हे / गुजारे
122 / 122 / 122 / 122
मैं गिन गिन / के वो सा / रे पल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

तुम्हारे / जवां ख़ू / बसूरत / बदन को
122 / 122 / 122 / 122
तराशा / हुआ इक / महल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

न पूछों / मेरी बे / करारी / का आलम
122 / 122 / 122 / 122
मैं रातों / को करवट / बदल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-31


फिल्म: आवारगी (1990)
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक: गुलाम अली
संगीतकार: अनु मलिक

मात्राक्रमः 1222-1222-1222-1222 (बहर-ए-हजज)

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला

बड़ा दिलकश बड़ा रंगीन हैं ये शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर ने गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

मैं इस दुनिया को अक्सर देखकर हैरान होता हूँ
न मुझसे बन सका छोटा सा घर दिन रात रोता हूँ
खुदाया तूं ने कैसे ये जहां सारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

मेरे मालिक मेरा दिल क्यूँ तड़पता है सुलगता है
तेरी मर्ज़ी तेरी मर्ज़ी पे किसका ज़ोर चलता है
किसी को गुल किसी को तूने अंगारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

यही आग़ाज़ था मेरा यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था मुझे नाकाम होना था
मुझे तक़दीर ने तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

तक्तीअः

चमकते चाँ/द को टूटा/ हुआ तारा/ बना डाला
122 2/1 2 22/ 12 22/12 22
मेरी आवा/रगी ने मुझ/को आवारा/ बना डाला
12 22/12 2 2/ 1 222/12 22

बड़ा दिलकश/ बड़ा रंगी/न हैं ये शह/र कहते हैं
12 22/12 22/ 1 2 2 2/1 22 2
यहाँ पर हैं/ हज़ारों घर/ घरों में लो/ग रहते हैं
12 2 2/122 2/ 12 2 2/1 22 2
मुझे इस शह/र ने गलियों/ का बंजारा/ बना डाला
12 2 2/1 2 22/ 1 222/12 22

मैं इस दुनिया/ को अक्सर दे/खकर हैरा/न होता हूँ
1 2 22/1 22 2/ 12 22/12 22
न मुझसे बन/ सका छोटा/ सा घर दिन रा/त रोता हूँ
1 22 2/12 22/ 1 2 2 2/1 22 2
खुदाया तूँ/ने कैसे ये/ जहां सारा/ बना डाला
122 2/1 22 2/ 12 22/12 22

मेरे मालिक/ मेरा दिल क्यूँ/ तड़पता है/ सुलगता है
12 22/12 2 2/ 122 2/122 2
तेरी मर्ज़ी/ तेरी मर्ज़ी/ पे किसका ज़ो/र चलता है
12 22/12 22/ 1 22 2/1 22 2
किसी को गुल/ किसी को तू/ने अंगारा/ बना डाला
12 2 2/12 2 2/ 1 222/12 22

यही आग़ा/ज़ था मेरा/ यही अंजा/म होना था
12 22/1 2 22/ 12 22/1 22 2
मुझे बर्बाद होना था मुझे नाकाम होना था
12 22/1 22 2/ 12 22/1 22 2
मुझे तक़दी/र ने तक़दी/र का मारा/ बना डाला
12 22/1 2 22/ 1 2 22/12 22

सोमवार, 18 मई 2020

गजल

पूरा धरती नापल ओ
चुप्पे चुप्पे कानल ओ

सुर  लयकारी अनकर छै
अनके आशे नाचल ओ

सभटा माया हुनके छनि
चट हारल पट जीतल ओ

बिख माहुर ओ कीदन खा
कनियें कनियें बाँचल ओ 

बड़का दुख अनचिन्हारक 
चिन्हारक छै दागल ओ

सभ पाँतिमे 222-222-2 मात्राक्रम अछि (बहरे मीर)। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों