Tuesday, 24 January 2012

गजल

गजब तोहर रूप गजब तोहर सिंगार गे छौंड़ी
कोना के करियौ हम चेहरा तोहर दीदार गे छौंड़ी


कामरूप के कय वरण एतेक इतराईत छे़ तू
ठुमकि ठुमकि जाइ छे कतय तोहर अभिसार गे छौंड़ी


वसंत ऋतु मे भेल वासन्ती गमकैत तोहर काया
इन्द्र देव के मोहित कय के गबै छे मल्हार गे छौंड़ी


सर्वस्व लुटेलौ तोरा पर अप्पन किछु नहि बांचल
आस तकबौ जिनगी भरि नै कर तू इन्कार गे छौंड़ी


रुक्मणी देखल रंभा देखल देखल शहर क छौंड़ी
पासंगो भरि नहि छौ कोई आई एहि संसार गे छौंड़ी

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों