Tuesday, 26 February 2013

गजल

गजल-1.44

जड़ि जड़ि कऽ तन घर भरि इजोत केने छै
मरि मरि कऽ अन्तो धरि इजोत केने छै

साधनक खगता हो तँ पैंच लै छै सब
चन्नो दिनकरसँ लड़ि इजोत केने छै

बोली नजरिकेँ बूझि सकल नै नैना
आखर करेजक हरि इजोत केने छै

परसैत रहियौ निज कला जँ भेटल अछि
गाछो धरापर फड़ि इजोत केने छै

ने खूनमे धधरा बचत नगर भरिमे
जँ प्रेम बाती जड़ि इजोत केने छै

पीड़ा प्रबल छै प्रसब लऽग जँ आयल छै
नेनाक कानब बरि इजोत केने छै

मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन-मफाईलुन
2212-2212-1222

अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों