Tuesday, 26 February 2013

गजल

गजल-1.45

ने हम इम्हर छी आ ने उम्हर छी
बीच्चे सरितामे भासल असगर छी

भावक साँचामे आखर ढालै छी
हम कवि नै छी सुच्चा कारीगर छी

जीवन मानै बीड़ी सिगरेटेकेँ
मोनक हारल आ हृदयक पाथर छी

ने आस्तिक बनलौं ने नास्तिक बनलौं
मंदिरमे सीढ़ी चढ़ि भागल नर छी

हवणक कुण्डसँ बहराइत उष्मा हम
घी-तीलक संगे स्वाहा आखर छी

देशद्रोहक साटल चिप्पी तनपर
स्वर्गक केबारसँ सटि बैसल बाहर छी*

ढहलै "अमित"क घर बनलै अनको नै
दाहर पैसल जतऽ ओ चऽर चाँचर छी

दस टा दीर्घ सब पाँतिमे
*जकरा फाँसीक सजा भेटल होइ ओकर मोनक गप अछि

अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों