Thursday, 21 February 2013

गजल



फेर एलै दिवाली लेबै फटक्का
फोरबै मिल कए सभ मारत ठहक्का

बड़ रमनगर बुस’ट नव अनलन्हि मामा
देखते सभ भऽ गेलै कोना कऽ बक्का

घीक लड्डू दुनू हाथे दैत भरि भरि
अपन बेटाक कोजगरामे तँ कक्का

दौड़ चलबैत सासुरकेँ फटफटिया
हरसँ भरि थालमे सौंसे फसल चक्का

आइ कुसियारक ट्रककेँ परल पाँछा
संगमे ‘मनु’क गामक छौंड़ा उचक्का

(बहरे असम, मात्रा क्रम- २१२२-१२२२-२१२२)
जगदानन्द झा ‘मनु’                 

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर वहा वहा क्या बात है अद्भुत, सार्थक प्रस्तुरी
    मेरी नई रचना
    खुशबू
    प्रेमविरह

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों