Tuesday, 22 November 2011

'गजल'

जिनगी की कहु एहेन अंजान बाट मे चलल जा रहल अछि
भोर ठीक सों भेल नहि मुदा सांझ ढलल जा रहल अछि

मोजर त खूब लागल छल गाछ मे
टुकला ठीक सों भेल नही मुदा मोजर झरल जा रहल अछि

कियो अन्न बिन तरपै अछि त कियो पानी बिन
ककरो पानी भेटल नई मुदा ककरो गिलास मे मदिरा भरल जा रहल अछि

ककरो चूल्हा अन्न बिन बुझायल अछि
महगा बेचे के चक्कर मे ककरो कोठी मे अन्न सरल जा रहल अछि

बाहारक लगाल आगी देखी सब कियो बुझायात
के बुझायेत मोनक आगी जे बिन धधरे जरल जा रहल अछि

कियो मरि के जिब रहल अछि
कियो जी के जेना मरल जा रहल अछि

रवि मिश्रा’भारद्वाज’
ग्राम : ननौर
जिला : मधुबनी

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों