Tuesday, 15 November 2011

गजल


देस मे स्त्रीगणक घटैत जनसंख्याक होहल्लाक बीच बढ़ैत बहिनक सेहनताक टीस
मैथिल लोकनिक सभ्यतर समाज मे की छैक एखनो जिवैत बहिनक सेहनताक टीस

अँगनाक अनघोल सँ हराइत लालदाय फ़ुलदाय सोनदाय केर प्रियगर पिहु बोल
कनियापुतरा, करियाझुम्मरि, कीतकीत आ पचीसी खेलवैत बहिनक सेहनताक टीस

महाअष्टमी, एकादशी, काली-दुर्गा-लक्ष्मी पुजा छैके एखनहुँ मैथिलक पैघे पावनि-तिहार
खीर रोटक पातरि आ कुमारि-भोजन लेल पात पर घटैत बहिनक सेहनताक टीस

राखि, भरदुतिया, सामाक दिन सहोदरक अभाव मे गोहनावैत बहिन सँ भावक आस
भायक योगक्षेम, समृद्धि आ औरदाक लेल अरपैन रचैत बहिनक सेहनताक टीस

कान्यादान मैथिल जीवन महात्त्म मे कहवैत छै वंश आ पितर-उद्धारक लेल महादान
परिणय संस्कार काल मे पवित्र लज्जाहोम केर लावा छिटैत बहिनक सेहनताक टीस

जनम-जन्मांतरक प्रारब्ध बुझी पुरखे लग सँ पिता धरौलनि पर देशक पियाक पाणि
दुरागमन दिन दुलहिन भs दारुण नैन नोरे-झोरे कनैत बहिनक सेहनताक टीस

उपनैन, मुरन, वियाह, दुरागमन सन जरजाजन सँ अलोपित होइत धी-सुवासिन
कनफुल, कंगन, हार, सिथफुल, पायल पहिरकेँ छमकैत बहिनक सेहनताक टीस

सासुरक सारि आ बहिनयैरक ननदि वर्गक पिहकारी केर सुखाइत खट्टमिट्ठ भाव
मधुर संबंध जाल सँ बिलायत सारि आ ओझाजीक रहसैत बहिनक सेहनताक टीस

एकलघर आ एक्के धी पर लिंग परीक्षण संग दुई पुत पर बच्चा-बन्नक बढ़लै रीत
"शांतिलक्ष्मी" कत्तs पेती घरै दु-बहिनक स्नेह-सुख मध्य रमैत बहिनक सेहनताक टीस

..........................वर्ण ३५..........................




No comments:

Post a Comment

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों