Saturday, 11 January 2014

गजल

गजल

सभ लागल रही साल बीतैत रहल
बिलमल नै कनी साल बीतैत रहल
  
अछि झोँका चलल प्रश्नकेँ एक सए
भेटल की कथी साल बीतैत रहल

बस देखा क' चलि गेल सपने त' बुझू
जनि सुन्नरि परी साल बीतैत रहल

अछि शुरुआत पुनि देह मरदनसँ धियक
टूटल नै कड़ी साल बीतैत रहल

आबो व्यर्थ नै होइ राजीव समय
नबका किछु करी साल बीतैत रहल
  
222 1221 22112 

@ राजीव रंजन मिश्र 

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों