Monday, 13 January 2014

गजल

गजल

जिनगी जतरा छै मानि चलल हम
पोथी पतरा नै गानि रहल हम

देखल ककरो नै चाँकि कनिकबो
डाहल मोनक निज आप जरल हम

कनकन ठंढीमे ठिठुरल महि धरि
नेहक धधरा ने तापि सकल हम

टोकल ककरो नै गाम नगर बस
नै झूकल आ नै कात हटल हम 

धरनी ज्ञानक थिक स्वर्णकलश बुझि
ठोपे ठोपे बुरिलेल चखल हम 

गुमसुम अपनामे राजीव पड़ल नित
कबिलाहाकेँ कुटिचालि गमल हम 

२२२२ २२१ १२२ 
@ राजीव रंजन मिश्र 

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों