शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

गजल

प्रेम कलशसँ अमरित अहाँ पीया तँ दिअ

मुइल जीवन फेरसँ हमर जीया तँ दिअ

 

काल्हि नै बाँचत शेष जीवन केर किछु

एकटा अपने सन सुनर धीया तँ दिअ

 

जाइ छी हमरा आब चाही प्राण नै

मैरतो  बेरीया अपन हीया तँ दिअ

 

प्राण बिनु देहक हाल देखू आब नै

बाटपर ओगरने आँखिकेँ सीया तँ दिअ

 

एतबा चाही ‘मनु’ बिदाई अंतिम

प्रेममे बारल एकटा दीया तँ दिअ


(बहरे हमीम, मात्राक्रम  2122-2212-2212) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 



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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों