आबि प्रेमक अमरित अहाँ पीआ तँ दिअ
मुइल जीवन फेरसँ हमर जीआ तँ दिअ
काल्हि नहि बाँचत शेष जीवन केर किछु
आइ सुंदर सन एकटा धीआ तँ दिअ
जाइ छी हमरा आब चाही प्राण नहि
पात मुँहमे तुलसीक आ बीआ तँ दिअ
प्राण बिनु देहक हाल देखू आब नहि
बाट ओगरने आँखिकेँ सीआ तँ दिअ
आब चाही हमरा तँ ‘मनु’ अंतिम बिदा
प्रेममे बारल एकटा दीआ तँ दिअ
(बहरे हमीम, मात्राक्रम 2122-2212-2212)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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