सोमवार, 14 जनवरी 2013

गजल

गजल 

देह काँपै देख एहन आतंककेँ
लोक पुतला बनल अनमन आतंककेँ

साँसमे गंधक घुसल खूनक पेय छै
देशमे बस बचल जीवन आतंककेँ

राम जानै आब केकर बलि पड़त तें
संग मिल सब करत सेवन आतंककेँ

छोड़ि देलक खेत पड़ता सब खेतिहर
बाढ़ि बनि एबे करत तन आतंककेँ

जीब रहलै अपन अपनौती लेल सब
आइ मीते बनल जोड़न आतंककेँ

घर अपन मजगूत करियौ विश्वासकेँ
चार अपने खसत एहन आतंककेँ

फाइलातुन-फाइलातुन-मुस्तफइलुन
2122-2122-2212
बहरे-जदीद

अमित मिश्र

गजल

गजल

मुइलहा चाममे दरद नै होइ छै
सुखक जिनगी कतौ नगद नै होइ छै

लूटऽ दे इज्जतसँ शोर केलासँ की
भीड़ छै बड मुदा मरद नै होइ छै

आगिमे जड़ल छै देशकेँ लोक सब 
क्रोधकेँ खूनमे शरद नै होइ छै

लाखमे एकटा होइ छै काजकेँ
सगर बाछा तँ नव बरद नै होइ छै

आश रहतै तँ नै हारि पेबै "अमित"
दैव सदिखन तँ बेदरद नै होइ छै

फाइलुन
212 चारि बेर सब पाँतिमे
बहरे-मुतदारिक

अमित मिश्र

गजल

गजल

चन्नोपर तँ दुनियाँ बसि सकै छै आब
लेबै ठानि यदि के रोकि सकतै आब

जीतक लेल मिसियो भरि तँ चाही भूख
भूखल शेर लऽग ई मृग कतसँ बचतै आब

मंदिर बनल ने मस्जिद बनल चौकपर
नव घरमे शराबक पानि बहतै आब

अपने घर तँ ठनका खसल भैयारीसँ
माँ बापो बटैया लागि जेतै आब

साहित्यो बपौटी बनल बिकतै "अमित"
सत्यक फेर देखू घेँट कटतै आब

मफऊलातु
2221 तीन बेर

अमित मिश्र

गजल

गजल

कखनो घटि सकै छैक घटना की करब
बरसै अनदिनो मेघ ठनका की करब

नै कहि राशि नक्षत्र कखन जेतै बदलि
घुर्णन तेज धीरेक रचना की करब

सामाजिक कते संकुचित भेलै आइ
मनुखक छै घृणा द्वेष गहना की करब

बहलै कतसँ ओ पवन जे छूलक मोन
स्वर्गक गप छलै फेर सपना की करब

छल सड़कपर घूमैत हत्यारा आइ
तैयो छूटि गेलै सरगना की करब

पूनम राति कोहबरमे दोसर चान
प्रेमे मात्र छै मूँह बजना की करब

मफऊलातु-मुस्तफइलुन-मफऊलातु
2221-2212-2221
बहरे-हमीद

अमित मिश्र

गजल

गजल

अनठेने रहू गप आइ परिस्थिति वश
छै बोलीसँ रण गरमाइ परिस्थिति वश

लक्ष्मी नै जनम लै सबहक घरमे तेँ
की रामे बनत भौजाइ परिस्थिति वश

कतबो क्रूर मोनक ई मनुखे छै तेँ
सगर प्रेम झटहा खाइ परिस्थिति वश

ककरो वश कहाँ छै समयक सुइयापर
जतऽ छै ओतऽ बड घुरियाइ परिस्थिति वश

टाका झूठपर आशा कर नै एखन
धधकै जे क्षणे सेराइ परिस्थिति वश

कृत्रिम जगतमे स्वार्थक जहरसँ मारल
तेँ एते "अमित" पगलाइ परिस्थिति वश

मफऊलातु-मफऊलातु-मफाईलुन
2221-2221-1222

अमित मिश्र

कता

कता

उड़नखटोला आबिते हेतै बौआकेँ उड़ेतै आइ
मेघक देशमे भोजन हेतै चन्ना धरि टहलि कऽ जेतै
आमक ठाढ़िपर झूला लागल खूब ऊँच झुलेतै आइ
जेतै उपर झूला छीप छुबिते बौआ आम तोड़ि कऽ खेतै
 

कता

कता

ओ ओहि पार बैसल करेलथि आँनलाइन प्रेम
झटहा एहन चलेलथि बिनु देखने मरि गेलौं
गप मीठ मीठ कऽ ओ तँ रचेलथि आँनलाइन प्रेम
ठंढ़ाएल प्रेमक आगिमे बुझू हम तँ जड़ि गेलौँ

रुबाइ

रुबाइ-154

ओ प्रेम करै छथि बहुत मुदा चुप चाप
हमहूँ बुझैत छी सब किछु अपने आप
कतबो अहाँ भागब मुदा भागि नै सकब
आखिर कहाँ छूटै छैक रंगक छाप

रुबाइ

रुबाइ-153

ज्वालामे अहाँक जड़ि जेबाक मन होइछ
कारी नैनमे गड़ि जेबाक मन होइछ
बस एक्कै बेर मीठ बोली सूनितौंह
आ तखने हँसति मरि जेबाक मन होइछ

रुबाइ

रुबाइ-152

एकर हार लिखल छै भोथ कपारमे
नै बूझै फरक साधु चोर चुहारमे
गलत प्रयोग करै छै अपन अधिकारक
तेँ भूखल रहि जाइ रिलिफक पथारमे

रुबाइ

रुबाइ-151

डूबल मिथिला पानिमे सब ठाँ कटान
लागल बान्हपर भीड़ भेड़िया धसान
सतमे ओ बड़ दरिद्र छै आइ लागल
जे समुदाय लेल बचल नै एक मचान

रुबाइ

रुबाइ-150

मैथिलक दबाइ बनल छै हरियर भाँग
बिनु बातक लड़ैत लड़खड़ाइते टाँग
सदिखन भकुआएल की करताह काज
तेँ पूर्ण नै होइ छै हिनकर सब माँग

रुबाइ

रुबाइ-149

फैसन दिश भागब तँ कतऽसँ सम्मान बचत
बंजर खेत बचत आ कतऽसँ धान बचत
दूधक लेल हेतै मारि आबि रहल दिन
ने मालक बथान आ ने किसान बचत

रुबाइ

रुबाइ-148

झूकैत पलक टीस जगा गेल हमरा
काँपैत ई ठोर शरमा गेल हमरा
कोना चुप रहितौँ रहले नै गेल तेँ
धड़कैत मोनसँ इलू बजा गेल हमरा

रुबाइ

रुबाइ-147

फूटल घैलसँ पानि बहै ठोपे ठोप
तहिना नैनसँ नोर खसै ठोपे ठोप
एहन घाव देलक कुकर्मी करेजपर
सदिखन देहसँ खून चुबै ठोपे ठोप

रुबाइ

रुबाइ-146

लाजक पर्दा फाड़ि देनै छै नव लोक
असली देह उघारि देनै छै नव लोक
सब चौकपर परसै छै मोनक नग्नता
मानवता आइ उखारि देने छै नव लोक

रुबाइ

रुबाइ-145

सोलहम वयस आ सोलहे श्रृंगार
झलकैत ताहिपरसँ प्रेमक पथार
हम पथिक भुतलेलौँ घरक आइ बाट
माया अनुपम देल दैवक अवतार

रुबाइ


रुबाइ-145

पानक पीकसँ खून सन लाल ई ठोर
कठगर दहीक छाल्ही सन तन मन गोर
संस्कारक लेबा तैपर चारि चान सन
स्वर्गे बुझू एतऽ उतरल भोरे भोर

रुबाइ

रुबाइ-144

भेँटक लावा सन हल्लुक मोन हमर
जोतल खेत सन कजेरक कोण हमर
तेँ ठकि लै छै दुनियाँ क्षणमे हमरा
लूटै हमरे घरकेँ खा नोन हमर

रुबाइ

रुबाइ-143

एगो सप्पत हम एगो अहूँ खा लिअ
एगो नव दुनिया आबि एतऽ बसा लिअ
देखू अपन करेज अहाँ लग राखि देलौँ
आब प्रेम पुष्पसँ एकरा सजा लिअ

रुबाइ

रुबाइ-142

कौड़ीक मोल बिका गेलै नोर हमर
हँसिते हँसिते कना गेलै नोर हमर
प्रेमक बदलामे भेटल दर्द एते
सबटा सऽख दूर बहा गेलै नोर हमर

रुबाइ

रुबाइ-141

शीशामे नै,देखू मोनक ऐनामे
सत सत बात देखब करेजक ऐनामे
मुँहपर लेपल ढोंग नै देखाइ दै छै
सबटा राज तँ भेटत नैनक ऐनामे
 




रुबाइ

रुबाइ-140

भागक कोँचा धेने कहू की भेटत
रणमे गुबदी देने कहू की भेटत
चड़फड़ रहब भीड़मे तखने जीबि सकब
बिन मेहनते केने कहू की भेटत

रुबाइ

रुबाइ-139

ने मरलौँ आइ चंचल नजरिक बाणसँ
ने मोहित भेलौँ कोइली सन तानसँ
ई यौवन रूप हमरा नै झड़केलक
पागल बनलौं अहाँ सन नीक इन्सानसँ




रुबाइ

रुबाइ-138

श्राद्धक ओरियानमे तँ घर बिका जाइ
आत्मा तखनो अतृप्ते हेरा जाइ
झूठक शान लेल जिनगी पहाड़ बनै
खिस्सापर लोक अपनाकें लुटा जाइ

कता

कता

जे नै नचनियाँ ओकरा नचाबै परिस्थिति
अपन मोनक नै चलै छै एहिमे फँसि कऽ
वीर मनुखकेँ छानि कऽ निकालै परिस्थिति
जेना माँछ निकालै मलहा कादोमे धसि कऽ

रुबाइ

रुबाइ-137

साड़ीसँ झाँपल धन देखार जुनि करू
भटकैत अछि चोर बड उघार जुनि करू
एलै जतऽसँ फैसन ओतऽ लागै नीक
मैथिल अहाँ एकरा भजार जुनि करू
 

रुबाइ

रुबाइ-136

विद्रोहक आगि जड़िते रहै घी ढारू
आशक लावा बनैत रहै बालु जाड़ू
सुनगत जा धरि करेज ता धरि जीबित छी
तेँ बेसी मृदु बनि अपनाकेँ नै मारू

रुबाइ


रुबाइ-135

कानै छै दुनियाँ बिसरि गेल हँसनाइ
यांत्रिक भेल मनुख नै छै खेल हँसनाइ
अपनहि हाथे काल बेसाहै मानव
पलखति नै गप लेल कहाँ भेल हँसनाइ

रुबाइ

बाल रुबाइ-39

जागल सुरुज लाल भऽ भेलै आब भोर
सोना हमर चान आब बिछौना छोड़
तोरा लेल राखल छौ हलुआ पूरी
नैना खोलि देख छै कुसियारक पोर

रुबाइ

बाल रुबाइ-38

डबरा भरल कुम्भी बेँग कुदै ताहिपर
गेना गाछ भरिगर कुकुर मुतै ताहिपर
आदति चलते सब बाझल एक्कै ठाम
राँगल छल कोठी बिलाइ सुतै ताहिपर

रुबाइ

बाल रुबाइ-36

नेना टहलै जुत्ता बाजै पोँ पोँ कऽ
सुनिते पाछू ताकै अटकी- मटकी लऽ
देखै पाछू दौड़ै आगू तेँ खसल
कानै फेरो खाटक पौआ जोरसँ धऽ

रुबाइ

बाल रुबाइ-35

छै जंगलापर ठाढ़ बौआ छऽड़ पकड़ि
बाहरक फूल तोड़ऽ चाहै हाथ नमरि
छै खेल रहल गाछ बौआ संग खेल
रगड़ा लऽ हवासँ दूर भऽ जाइ छै सम्हरि

रुबाइ

बाल रुबाइ-34

ऐ गाछसँ ओ गाछपर कूदै बानर
जामुन तोड़ि तोड़ि फेर फेकै बानर
टूटल ठाढ़ि तँ खसलै धम्म दऽ माटिपर
चोटो खा फेर गाछपर चढ़ै बानर

रुबाइ

बाल रुबाइ-33

हरियर पियर काँच पाकल मिठका आम
बिज्जू मालदह लाले सिनुरिया आम
झटहा मारै दाइ झटहा उपर लटकल
खसबो केलै तँ कौआक जुट्ठा आम आम

गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2012 ( गजल )


हमरा सूचित करैत इ परम हर्खक अनुभव भए रहल अछि जे अनचिन्हार आखर द्वारा प्रस्तुत "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2012 लेल ओस्ताद  पंकज चौधरी ( नवल श्री ) जीक मास  दिसम्बरमे प्रकाशित हुनक गजलकेँ देल जा रहल अछि। हुनका बधाइ। एहि सालक मुख्यचयनकर्ता छलाह ओस्ताद जगदीशचंद्र ठाकुर "अनिल"। हुनका धन्यवाद।


प्रस्तुत अछि ओस्ताद जगदीशचंद्र ठाकुर "अनिल" जीक टिप्पणी जे की हमरा मेलपर पठाएल गेल अछि।


पटना,
02.01.13                                                                                        
मैथिलीमे गजल लेखन तँ बहुत पहिनेसँ भ' रहल अछि मुदा गजल हेतु एकटा विशिष्ट मंचक अभाव छल। गजल-लेखनकें सशक्त, स्वस्थ, आकर्षक आ लोकप्रिय बनयबाक लेल वर्ष 2008 सँ "अनचिन्हार आखर"  द्वारा एकटा विशिष्ट मंच प्रदान करैत एहि दिशामे महत्वपूर्ण काज कएल गेल अछि। एहि लेल श्री आशीष अनचिन्हारजी धन्यवादक पात्र छथि । ओ एखनधरि प्रकाशित गजलक पोथी आ गजलकार सभसँ लोककें परिचय करौलनि आ गजल लेखन हेतु नव-नव लोककें सेहो प्रोत्साहित केलनि आ एहि लेल नव-नव आयोजन सेहो करैत आबि रहल छथि जेना परिचर्चा ,आन-लाइन मोशायरा, बाल गजल, गजल दिवस, कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान आदि। हुनक प्रयाससँ गजलकारक संख्यामे दिनानुदिन वृद्धि भ रहल अछि आ बहुत संख्यामे गजल लीखल जा रहल अछि । गजेन्द्र जी द्वारा मैथिलीमे गजलक व्याकरण प्रस्तुत कए गजल-लेखनक लेल उपयुक्त दिशा-निर्देश उपलब्ध करा क' उल्लेखनीय योगदान कैल गेल अछि ।गजलक ऐ अभियान एकटा यज्ञ थिक, उत्सव थिक । एहिमे जतेक गोटे भाग लेलनि सभ जीतल छथि, सभ प्रशंसाक पात्र छथि । मैथिलीमे गजलक भंडार भरबामे सबहक योगदान महत्वपूर्ण अछि ।गजल- लेखन मँगैत अछि अभ्यास । आनो-आनो गजलकारक रचना पढबाक -सुनबाक अभ्यास,  चिन्तन-मननक अभ्यास । अभ्यास अनैत अछि रचनामे धार, रचनामे माधुर्य आ आकर्षण, रचनामे व्याकरण आ भावक संतुलन।गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान वर्ष 2012 के अन्तर्गत अनचिन्हार आखर  पर 1273  रचना  प्रकाशित भेल । प्रत्येक मास  एकटा रचना चुनल गेल। 12 मासक 12 टा चूनल-बीछल रचना कें बेर- बेर पढलहुँ ।व्याकरणक दृष्टिटसँ अधिकांश गजल ठीक लागल ।व्याकरण आ भावक दृष्टिटसँ अमित मिश्रजी, जगदानन्द झा ‘मनु’जी, ओम प्रकाशजी, मुन्नाजी आ पंकज चौधरी "नवलश्री"  जीक  गजल नीक लागल । श्री प्रभात राय भट्ट,चन्दन झा,अनिलजी, राजीव रंजन मिश्र, कुन्दन कुमार कर्ण आ बाल मुकुन्द पाठकजी सँ और अधिक सुन्दर रचनाक अपेक्षा करैत छी । व्याकरण आ भावक अधिकतम संतुलनकें ध्यानमे रखैत दिसंबर 2012 मे प्रकाशित पंकज चौधरी "नवलश्री" जीक गजलकें पहिल स्थान पर राखल जा रहल अछि । एहि हेतु चौधरीजीकें बधाइ दैत छियनि आ एहि उत्सवमे भाग लेबवला सभ गोटेकें धन्यवाद दैत अनुरोध करैत छियनि जे परिणामक बिना चिन्ता कएने मैथिली साहित्यमे गजलक भण्डारकें भरबाले अपन-अपन योगदान  निरन्तर  दैत रहथि ।

उत्साह केर, उल्लास केर, उत्कर्ष केर
बिलहैत छी षुभकामना नव वर्ष केर ।


----------------जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल

गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2012 ( बाल गजल )


हमरा सूचित करैत इ परम हर्खक अनुभव भए रहल अछि जे अनचिन्हार आखर द्वारा प्रस्तुत गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल )बर्ख 2012 लेल विदुषी इरा मल्लिक जीक मास दिसम्बरमे प्रकाशित हुनक बाल गजलकेँ देल जा रहल अछि। हुनका बधाइ। एहि सालक मुख्यचयनकर्ता छलीह विदुषी प्रीति ठाकुर । हुनका धन्यवाद।


प्रस्तुत अछि विदुषी प्रीति ठाकुर जीक टिप्पणी जे की हमरा मेलपर पठाएल गेल अछि।

"ऐ गजलमे बाबी आ बच्चा सभक प्यार-दुलारक विवरण प्रभावित करैत अछि, बाल साहित्यमे शिक्षा देलाक आग्रह नै रहबाक चाही बाल सुलभ आनन्दक/ आश्यर्चक भाव रहबाक चाही, ओकर मोनकेँ पढ़बाक भाव/ सामर्थ्य रहबाक चाही, दुनियाँक चिन्ता-फिकिर नै उल्लास रहबाक चाही। आ ई सभ गुण इराजीक ऐ बाल गजलमे छन्हि। आ तेँ ई हमरा दृष्टिमे ऐ बर्खक सर्वश्रेष्ठ बाल गजल अछि। ऐकेँ आलावे द्वितीय स्थानमे रुबी झा आ तृतीयमे पंकज नवलश्रीक गजल नीक लागल।"


- प्रीति ठाकुर 



गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2012 ( आलोचना-समीक्षा )



हमरा सूचित करैत इ परम हर्खक अनुभव भए रहल अछि जे अनचिन्हार आखर द्वारा प्रस्तुत " गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" ( समीक्षा, आलोचना,समालोचना प्रभाग) बर्ख 2012 लेल ओस्ताद ओमप्रकाश जीक  प्रकाशित हुनक आलोचनाकेँ देल जा रहल अछि। हुनका बधाइ। एहि सालक मुख्यचयनकर्ता छलाह ओस्ताद राजदेव मण्डल। हुनका धन्यवाद।

प्रस्तुत अछि ओस्ताद राजदेव मण्डल जीक टिप्पणी जे की हमरा मेलपर पठाएल गेल अछि।

नमस्‍कार,
निर्णय करबाक अवसर भेटल। जइमे तीनटा श्री ओम प्रकाश झाक आ एकटा अमित मि‍श्र जीक लि‍खल आलोचना छल। सम्‍यक दृष्‍टि‍सँ देखला पछाति‍ ओम प्रकाश जीक ‘घोघ उठबैत गजल’ सभसँ नीक लगल।

राजदेव मण्‍डल
1-1-2013


सोमवार, 7 जनवरी 2013

रुबाइ

गोरी तोर मुस्कीमे छौ जहर भरल 

नै एना मुँह खोल कते घायल परल 

तोहर फुलझड़ी सन मारुक हँसी सुनि क

भेटत बाटपर कतेको छौंड़ा मरल 

                   ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

अपने एना अपने मूँह-17


मास दिसम्बर २०१२मे कुल ६२ टा पोस्ट भेल जकर विवरण एना अछि----

१) गजेन्द्र ठाकुर जीक कुल ९टा पोस्टमे ९टा पोथीक पी.डी.एफ फाइल देल गेल।

२) पंकज चौधरी नवल श्री जीक कुल १०टा पोस्टमे कुल १०टा गजल आएल।

३) बाल मुकुन्द पाठक जीक कुल ५टा पोस्टमे १टा हजल आ ४टा गजल आएल।

४) अमित मिश्रा जीक कुल २८टा पोस्टमे ८टा रुबाइ, ९टा बाल गजल, ३टा गजल, १टा कता आ ७टा बाल रुबाइ आएल।

५) जगदानंद झा मनु जीक कुल ६टा पोस्टमे ३टा रुबाइ आ ३टा गजल अछि।

६) आशीष अनचिन्हारक कुल ४टा पोस्टमे २टा सम्मान सम्बन्धी घोषणा, १टा अपने एना अपने मूँह, आ १टा पोस्टमे इरा मल्लिक जीक १टा बाल गजल आएल।

माहिया

 ऐ खेप एकटा नव विधापर गप्प करी। ऐ विधाक नाम थिक " माहिया " । ई विधा मूलतः पंजाबी साहित्य केर थिक आ पंजाबीसँ उर्दूमे आएल आ तकरा बाद सभ भाषामे पसरल। ई विधा मात्र तीन पाँति केर होइत छै जाहिमे पहिल पाँतिमे 12 मात्रा दोसरमे 10 मात्रा आ फेर तेसरमे 12 मात्रा होइत छै आ सङ्गे-सङ्ग पहिल पाँति आ तेसर पाँतिमे काफिया ( तुकान्त ) होइत छै... तँ देखी एकर संरचनाकेँ------

पंजाबीमे माहियाक पहिल पाँतिक संरचना अधिकांशतः 2211222 अछि मने दीर्घ-दीर्घ-लघु-लघु-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ।
तेनाहिते दोसर पाँतिक संरचना अछि 211222 दीर्घ-लघु-लघु-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ
आ फेर तेसर पाँतिक संरचना पहिल पाँतिक बराबर अछि मने 2211222 मने दीर्घ-दीर्घ-लघु-लघु-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ।

ओना ई अधिकांश संरचना अछि। ऐकेँ अलावे किछु हेड़-फेड़क संग आन-आन संरचना सेहो भेटैत अछि। मुदा ई निश्चित छै जे हरेक पाँतिमे दीर्घक बेसी संख्या रहने लयमे ई खूब आबि जाइत छै

माहिया छन्दमे अर्थक चारि तरहें विस्तार होइत छै...

१) या तँ पहिल आ दोसर पाँति मीलि कए एकटा अर्थकेँ ध्वनित करै आ तेसर पाँति अलग रहै,
२) या तँ दोसर पाँति आ तेसर पाँति मीलि कए कएटा अर्थकेँ द्वनित करै आ पहिल पाँति अलग रहै,
३) या तीनू पाँति मीलि कए एकटा अर्थकेँ ध्वनित करै
४) या दोसर पाँति एहन होइ जे पहिलो पाँति सङ्ग मीलि अलग अर्थ दै वा तेसर पाँति सङ्ग मीलि अलग अर्थ दै। 

माहिया छन्दक स्थायी अधार श्रृगांर रस थिक मुदा आधुनिक समयमे ई हरेक विषयमे लिखल जाइत अछि। उदाहरण स्वरूप देखू हमर दूटा माहिया---


१) तीरसँ ने तरुआरिसँ
हम डरै छी आब 
हुनक नजरिकेँ मारिसँ 


२) डोलैए मोन हमर
उठल आँखिसँ भाइ
करेज मथैए हमर


मैथिलीमे ई माहिया छन्द अज्ञात अछि.. आउ एकरो आगू बढ़ाएल जाए..... खास कए जे कवि श्रृगांर रसमे भीजल रहै छथि।

मंगलवार, 1 जनवरी 2013

MAITHILI VERSE- मैथिली पद्य संग्रह (गजल संग्रह सहित)

गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास दिसम्बर लेल )


हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास दिसम्बर लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास दिसम्बर लेल श्रीमती इरा मल्लिक जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ। 

ई पोथी तँ हम नै पढ़बै ई तँ बहुत मोटगर छै
मुदा लगैए पढ़हे पड़तै करची बड्ड पातर छै

मिठका पुआ पकबै बाबी छन-मन भनसा घरमे
जत्ते सुन्दरि हम्मर बाबी ततबे पूआ मिठगर छै

बनलै पूआ लगलै भूख गे बुढ़िया हमरा तँ बेसी दे
ई धानी पातक चटनी तँ लागै बहुत झँसगर छै

ओकरा तँ बाबी देलकै छोटकी पूआ वाह भाइ वाह
रे नंगटा देखही हम्मर थारी तँ खुब्बे भरिगर छै

नेना भुटका मगन भेल छै बाबी हँसै छै तरे-तर
हमरा लेल तँ देवी छै जकरासँ घर डटगर छै

कौआ रे नै कर लुप-लुप पूआ धेने छौ बाबी तोरो ले
गाछसँ तों निच्चा उतर आमक गाछ झमटगर छै

सरल वार्णिक २०




मास दिसम्बर 2012क लेल गजल सम्मान योजनाक पहिल चरण


हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास दिसम्बर  लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास  दिसम्बर  लेल पंकज चौधरी (नवलश्री)    जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।



गजल-३८

गढू आखर गजल कहियौ
अपन धुनमे रमल कहियौ

अजब छै रीत दुनियाकें
सुधाके सभ गरल कहियौ

करेजक काँट बनलै ओ
मुदा तैयो कमल कहियौ

पसरलै प्रीत नकली बड़
निमहले पर असल कहियौ

जँ गप हुनकर उठल कोनो
किए नैना भरल कहियौ

गमेलौं की तकर गप नै
कथी संगे रहल कहियौ

कियो दूसै करै निंदा
अपन मोनक जँचल कहियौ

रहल परिणाम प्रेमक की
किए चुप छी "नवल" कहियौ

*बहरे हजज/मात्रा क्रम:१२२२ 

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों