शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015

विश्व गजलकार परिचय शृंखला-2


डा. बलराम शुक्ल


(बलरामजी अपन परिवारक संग)

असिस्टेण्ट प्रोफेसर
संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली 110 007
मो. 09818147903
ईमेल संकेत– shuklabalram82@gmail.com
जन्म  – 25 सितम्बर 1981, गोरखपुर (भारत)
अध्ययन–
स्नातक(2001) – संस्कृत, अंग्रेजी साहित्य, मध्यकालीन इतिहास
               गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर
परास्नातक(2003)– संस्कृत (व्याकरणशास्त्रमे विशेषज्ञता)
                दिल्ली विश्वविद्यालय , दिल्ली
                (विश्वविद्यालयमे सर्वप्रथमस्थान आ एखन धरिक रिकार्ड अंकक
                 उपलब्धि आ ऐ लेल सी डी देशमुख स्वर्णपदक प्राप्त)
शोध (2007)   –   व्याकरण तथा भाषाविज्ञान
                 दिल्ली विश्वविद्यालय , दिल्ली
   (शोधक विषय – वाक्यार्थ : "भारतीय सिद्धान्तों का रेलेवेंस सिद्धान्त के सन्दर्भ में विश्लेषण "।
(रेलेवेंस पाश्चात्त्य भाषाशास्त्रमे प्रतिपादित एकटा वाक्यार्थ सम्बन्धी एकटा नवीन सिद्धान्त छै । जकर प्रतिपादन Dan Sperber तथा Dierdri Wilson नामक विद्वान केलखिन्ह । एकर प्रमुख कथ्य ई छै कि प्रत्येक भाषिक संवाद रेलेवेंसक गारण्टीसँ युक्त होइत छै, मुदा ओ  सभ रेलेवेंसकेँ निश्चित करऽ बला तत्व सभहँक परिगणन नै केन छथि । प्रस्तुत शोधमे भारतीय सिद्धान्त सभहँक सहायतासँ ऐ सिद्धान्तकेँ दृढतर करबाक प्रयत्न कएल गेल छै। )
प्रमाणपत्र (2008) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य , दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली ।
                             विश्वविद्यालयमे प्रथम स्थान ।
डिप्लोमा (2009) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य , दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली ।
                             विश्वविद्यालयमे प्रथम स्थान ।
एडवांस डिप्लोमा (2010) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य , दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली ।
                             विश्वविद्यालयमे प्रथम स्थान ।
उच्चतर अध्ययन (2011) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य , फ़ारसी भाषा एवं साहित्य विकास
                            केन्द्र , तेहरान – ईरान ,  प्रथम स्थान ।
परास्नातक(2012) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य  (प्राचीन साहित्यमे विशेषज्ञताक संग)
                             दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली ।
                             विश्वविद्यालयमे प्रथम स्थान, फ़िरदौसी स्वर्ण पदक प्राप्त  ।

अध्यापन – अनुभव
2014सँ असिस्टेण्ट प्रोफेसर संस्कृत – संस्कृत विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय , दिल्ली
2005सँ 2014 – असिस्टेण्ट प्रोफेसर संस्कृत, हिन्दू कालेज , संस्कृत विभाग , दिल्ली
                           विश्वविद्यालय दिल्ली ।
                           व्याकरण , भाषाविज्ञान , साहित्य तथा दर्शन केर निरन्तर अध्यापन ।
                           पांचटा शोधार्थीक शोध निर्देशन ।
2004 – असिस्टेण्ट प्रोफेसर  संस्कृत, हंसराज कालेज , दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली –7
2004सँ अद्यावधि– दिल्ली विश्वविद्यालय एवं पत्राचार महाविद्यालयमे संस्कृत व्याकरणक निरन्तर अध्यापन ।


उपलब्धियां–
2013– राष्ट्रपति द्वारा युवा संस्कृतविद्वानक रूपमे “बादरायण व्यास पुरस्कार ” सम्मानित ।
2011– द्वितीय ईरान विश्वकवि सम्मेलनमे भारतक प्रतिनिधित्व करबाक हेतु तेहरान तथा
           शीराजमे आमन्त्रित । अन्य सांस्कृतिक गतिविधि लेल ईरानक विभिन्न शहर सभमे छः 
          बेर भाग ग्रहण। 
2011– दर्शन विभाग – लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पुनश्चर्या कार्यक्रममे निम्नोक्त  
           विषयपर अभिभाषण लेल आमन्त्रित–
          . भारतीय भाषा दर्शन की प्रमुख समस्यायें ।
          . वैयाकरणों की भाषा दृष्टि ।
2009– सांस्कृतिक संस्था आरोही  द्वारा उर्दू कवि फैज अहमद फैजख जन्म शताब्दीक
          अवसरपर व्याख्यान लेल आमन्त्रित ।
2004 सँ अद्यावधि – संस्कृत भारती संस्था द्वारा संस्कृत माध्यमसँ संस्कृत व्याकरणपर वक्तृत्
           लेल अनेक बेर आमन्त्रित ।
2005 – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा शोध लेल वरिष्ठ शोधवृत्ति प्रदत्त ।
2003 – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा शोध लेल कनिष्ठ शोधवृत्ति प्रदत्त ।
2003– विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण ।
संगोष्ठी सभमे प्रस्तुत शोधपत्र –
2015– लोहिया महाविद्यालय चूरूमे प्रस्तुत– प्रातिशाख्यों पर आधुनिक जगत् में हुए शोध
            कार्य।
2014– राष्ट्रिय संस्कृत संस्थानमे प्रस्तुत– संस्कृत में अनूदित फ़ारसी साहित्य।
2011 –  संस्कृत विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे प्रस्तुत–   
             मौलाना रूमी की मस्नवी में पञ्चतन्त्र की प्रस्तुति ।
2011– शिब्ली कालेज आजमगढ द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे  प्रस्तुत –
             संस्कृत साहित्य में मुहम्मद ।
2011– अन्तर्राष्ट्रिय संस्था वेव्स द्वारा आयोजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत –
            वेदान्त का आधुनिक जीवन में उपयोग ।
2010– इन्द्रप्रस्थ महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत –
            वेदाध्ययन में व्याकरण का योग ।
2010– लेडी इर्विन कालेज , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत–
             प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली ।
2009– लेडी इर्विन कालेज , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत–
            जीवन पद्धति के रुप में भारतीय दर्शन – एक विहंगम दृष्टि ।
2008– मिराण्डा हाउस , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत–
            आधुनिक संस्कृत साहित्य में छन्दों की प्रवृत्ति ।
कार्यशालायें–
2015– संस्कृत विभाग , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित  विभिन्न दर्शनमे
            प्रतिबिम्बित मीमांसाक सिद्धान्त विषयपर कार्यशाला।
2011– संस्कृत विभाग , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित वाक्यपदीयपर आयोजित 
            कार्यशाला ।
2011– संस्कृत विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ब्रहमसूत्रपर आयोजित
            कार्यशाला ।
2011– ईरान सांस्कृतिक भवन , दिल्ली द्वारा आयोजित फ़ारसी तथा सामान्य पाण्डुलिपि
            विज्ञानपर आयोजित कार्यशाला ।
2009– दिल्ली विश्वविद्यालयक उच्चशिक्षा विकास विभाग द्वारा आयोजित ओरियेण्टेशन
            कोर्स ।
 2006– सर्वदर्शनसंग्रह विभाग , लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ  द्वारा आयोजित
            माथुरी पञ्चलक्षणीपर कार्यशाला ।


प्रकाशन –
2014– मुहतशम काशानीक फ़ारसी मर्सिया केर हिन्दी पद्यानुवाद– रामपुर रज़ा लाइब्रेरी,
            रामपुर, उत्तरप्रदेश।
2013–अमृतरस– एक जायज़ा , उर्दू शोधपत्र, तस्फ़िया इण्टरनेशनल जर्नलमे प्रकाशित।
2013– शाकुन्तल–  एक फ़ारसी रूपान्तरण, नाट्यम् मे प्रकाशित ।
2013– भारतीय तथा पाश्चात्त्य वाक्यार्थ सिद्धान्त – प्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली ।
2013 – कल्पवल्ली  (आधुनिकसंस्कृतकाव्यसंकलन)मे सात टा कविता प्रकाशित – साहित्य
             अकादमी ।
2012– पञ्चतन्त्र व मौलाना, फ़ारसी शोधपत्र, मेह्रो नाहीद  शोधपत्रिकामे, तेहरान, ईरानसँ
            प्रकाशित।
2011 – ‘इश्क ओ आतश’ ( फ़ारसी कविताक संग्रह ) –मिदहत प्रकाशन , तेहरान ,ईरान ।
2010–2011– तीन कवितायें अर्वाचीन संस्कृतम् मे प्रकाशित ।
2009– ‘आधुनिक संस्कृत साहित्य संचयन’ ( आधुनिक संस्कृत रचना सभहँक संग्रह ) –
            विद्यानिधि प्रकाशन , दिल्ली ।
2009– पण्डित अम्बिका दत्त व्यासजीक जन्म  सार्द्धैकशतीक अवसरपर स्मारिका केर
           सम्पादन तथा प्रकाशन ।
2008– हिन्दी कवि राजेश जोशी पर आधारित पुस्तकमे एकटा लेख – ‘नीतिशतक – एक
           पुनर्रचना’ केर प्रकाशन ।

शीघ्रप्रकाश्य–
  1– संस्कृत काव्य ‘लघुसन्देशकाव्यम्’ – राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थान , दिल्लीसँ ।
  2– फ़ारसी गजलक नवीन संकलन – ईरानकल्चर हाउस , दिल्लीसँ।
भाषाज्ञान–
1–हिन्दी – अवगमन, संवाद, लेखन , पठन, रचनात्मक लेखन ।
2– संस्कृत – अवगमन, संवाद, लेखन , पठन, रचनात्मक लेखन ।
3– अंग्रेजी – अवगमन, संवाद, लेखन , पठन ।
4– फ़ारसी – अवगमन, संवाद, लेखन , पठन, रचनात्मक लेखन ।
5– उर्दू  –    अवगमन, लेखन , पठन, रचनात्मक लेखन ।
    एकर अतिरिक्त प्राकृत तथा अपभ्रंशों मे हस्तक्षेप ।

  ऐ सभहँक अतिरिक्त दिल्लीक अनेक महाविद्यालय सभहँक सांस्कृतिक प्रतियोगिता सभमे अनेकशः निर्णायकक तौरपर आहूत एवं अनेक सांस्कृतिक समितिक पदाधिकारी ।

हिनक दू टा रचना--

१

तेरे रू-ए-रौशन को शम्स[1] ही कहा जाये

रात की तरह गेसू गर न गिर्द हों छाये


जब उलझ गयीं ज़ुल्फ़ें आपकी ख़यालों से

तब तब अपनी नज़्मों के ज़ुल्फ़ हमने सुलझाये


तोड़ दो मनादिर[2] को तोड़ दो मसाजिद[3] को

ताकि लामकाँ[4] अपने हर मकाँ में रह पाये


मेरे शेर ऐसे हैं जिस तरह कोई बच्चा

कहना और कुछ चाहे और कुछ ही कह जाये


मेरे शेर जिसके हैं वो भी जाने महफ़िल काश

साथ साथ मह्फ़िल के मेरे शेर सुन पाये


[1] सूरज

[2] मन्दिरों

[3] मस्जिदों

[4] गृहविहीन (परमेश्वर)

२
आशिक़ हुए, असीर[1] हुए, मुब्तिला[2] हुए

देखो तुम्हारे इश्क़ में, हम क्या थे क्या हुए


फ़रहादे कोहकन[3] हो कि मजनूँ फ़िगारतन[4]

हम आशिक़ी में सबसे बहुत पेशपा[5] हुए


खींचे है ताबे इश्क़ तो रोके है उसको शर्म

इक मुल्के हुस्ने नाज़ पे दो पेशवा[6] हुए


ईफ़ा ए अह्दे चर्ख़[7] तग़य्युर[8] है इसलिये

जितने भी बे वफ़ा हुए सब बा वफ़ा हुए


मारे थे जितने पहले रक़ीबाने तेग़ज़न[9]

सब इस जनम में ले निगहे सुर्मासा[10] हुए


[1] बन्दी

[2] दुर्गति ग्रस्त

[3] पहाड़ काटने वाला फ़रहाद

[4] क्षतविक्षतशरीर मजनूँ

[5] आगे

[6] हाकिम

[7] भाग्यचक्र की शर्तें मानना

[8] परिवर्तन

[9] तलवारबाज़ दुश्मन

[10] कजरारी


हिनक फारसी रचना पढ़बाक लेल ऐठाम आउ--http://drbshukla.blogfa.com/



विश्व गजलकार परिचय शृंखलाक अन्य भाग पढ़बाक लेल एहि ठाम आउ--  विश्व गजलकार परिचय 

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2015

गजल



नीपल पोतल चिक्कन चुनमुन
बेटी हम्मर गुनगुन गुनगुन

ता थइ ता थइ थैया थैया
पायल बाजै रुनझुन रुनझुन

कानै खीजै रूसै फूलै
फेरो नाचै छुनछुन छुनछुन

दौड़ै सदिखन अँगने आँगन
खसितो रहलै ढ़ुनमुन ढ़ुनमुन

पढ़तै लिखतै करतै काज
ऐमे नै किछु गुनधुन गुनधुन

सभ पाँतिमे आठ टा दीर्घ अछि।
अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु संस्कृत परंपरानुसार दीर्घ मानल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2015

गजल



हर हर गंगा
घर घर दंगा

हमहूँ नँगटे
ओहो नंगा

चमचा चमची
बस दरभंगा

टूटल चौकी
फाटल अंगा

नेता एलै
भेलै पंगा

सभ पाँतिमे चारिटा दीर्घ अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

रविवार, 18 अक्टूबर 2015

गजल

आँचर आ खोंइछमे बस मुसकियाइत रहल अनचिन्हार
अँकुरी जकाँ सुख कि दुखमे बँटाइत रहल अनचिन्हार

हम ओइ हाथक सहारे बहुत दिन बिता लेबै आब
जै हाथपर मेंहदी बनि लिखाइत रहल अनचिन्हार

बेकार छै धार पोखरि नदी आ इनारो ऐठाम
ओकर हँसी आ खुशीमे नहाइत रहल अनचिन्हार

संबंध छै मोन संबंध छै देह संबंधे जान
बड दूर तैयो लगेमे बुझाइत रहल अनचिन्हार

छुलकै कियो जानिए बूझि सोचल विचारल मोनसँ
तँइ खुब्बे बड़ देर धरि जुड़ाइत रहल अनचिन्हार

सभ पाँतिमे 2212-2122-122-12-2221 मात्राक्रम अछि

मतला आ मकतामे दू-दू टा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015

गजल


हम बड़का वामपंथी छी
जोगाड़ी दामपंथी छी

किछु चिखना चीखि बोतल संग
नालीकेँ जामपंथी छी

नित हमरा स्त्री प्रसंगक चाह
हम असली कामपंथी छी

गाँधीकेँ मारि बैसल जे
से हमहीं रामपंथी छी

करतै ओ काज भरि भरि दिन
हम खाली नामपंथी छी

सभ पाँतिमे 222+2122+2 मात्राक्रम अछि
दोसर आ तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि।

बुधवार, 30 सितंबर 2015

रुबाइ



जेना किसान खेत खरिहान चाहै छै
अमीन सभ केबाला खतियान चाहै छै
पंडित मुल्ला सभ मंत्र अजान चाहै छै
तेना हमर देह ओकर परान चाहै छै

सोमवार, 28 सितंबर 2015

गजल



सुक्खल सुक्खल घाम भेटत
हड्डी हड्डी चाम भेटत

गौरी शंकर सीता संगे
सेवा केने राम भेटत

कैंचा कौड़ी सभकेँ चाही
बुड़िबक बनने दाम भेटत

हड़तालक महिमा बुझै छी
धरना देने धाम भेटत

सोहागक बाते अलग छै
महुआ भेने आम भेटत

सभ पाँतिमे 2222-2122 मात्राक्रम अछि

दोसर आ तेसर शेरमे एक-एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

शनिवार, 26 सितंबर 2015

विश्व गजलकार परिचय शृंखला-1


सौरभ पांडेय





जन्म-3    Dec.1963

जन्म स्थान- देवघर, झारखंड

पिता- श्री सुरेश चंद्र पांडेय
माता- श्रीमती कमला पांडेय

मूल निवास,द्वाबा, बलिया उत्तर प्रदेश

सौरभ जी मैथिली सहित भोजपुरी आ हिंदीक समान अधिकारी छथि। ई मूलतः भोजपुरी आ हिंदीमे गजल लिखै छथि। गजलक अलावे आन विधा (  मुख्यतः छंद)मे सेहो रचनारत छथि। ई पत्रिका ओपन बुक्स आन-लाइन डाट काम केर प्रबंधन समीति केर सदस्य छथि। विश्वगाथा नामक पत्रिकाक सलाहकार मंडल ओ परामर्शदात्री समूहक सदस्य सेहो छथि। हुनक एकटा कविता संग्रह - "इकड़ियाँ जेबी से" आ छंदक विवेचना शास्त्रक रूपमे "छंद मंजरी" पोथी प्रकाशित छनि।छंद मंजरीकेँ छंदक कार्यशाला कहल जाए तँ कोनो गलत नै।  ऐके अतिरिक्त "परो को खोलते हुए" ऐ पोथीक संपादक छथि।

बिहार राज्य विद्युत परिषद्सँ अपन पिताक अवकाश प्राप्त केलाक बाद सौरभजी करीब पचीस सालसँ इलाहाबादमे छथि आ वर्तमानमे भारत सरकारक विभिन्न योजनाक कार्यरूप देबए बला संस्थाक नेशनल हेड छथि।

ऐ श्रृंखलाक माध्यमसँ हुनक दू गोट गजल (एकटा भोजपुरी आ एकटा हिंदी) दऽ रहल छी---

भोजपुरी गजल

२१२२ १२१२ २२
साफ़ बोले में बा हिनाई का ?
काहें बूझीं पहाड़-राई का ?

चाँद-सूरज में दोस्ती कइसे ?
धंधा-पानी में ’भाई-भाई’ का ?

सब इहाँ जी रहल बा स्वारथ में
हमहुँ जीहीं त जग-हँसाई का ?

चाँद ह ऊ, भला सितारन के -
कवनो इहवाँ सभा बोलाई का ?

आजु साहित्य का मुनाफ़ा हऽ
गीत कइसन ? ग़ज़ल-रुबाई का ?

मुट्ठिये के पकड़ बतावे ले
फेर में ई बीया कलाई का ?

खुदकुशी के हुनर में माहिर हम
कामना का ? कहऽ बधाई का ?

खून मूँहे जे कवनो के लागल
एः के मालूम बा, दवाई का ?

हिन्दी गजल

दुआएँ अग़र अपनी फ़ितरत निभा दें
सुराही व पत्थर की सुहबत करा दें ॥

अभी तक दीवारों में जीता रहा है
उसे खिड़कियों की भी आदत लगा दें ॥

मिला जो उसी पे मुहब्बत लुटाए
चलो बावरे को तिज़ारत सिखा दें ॥

खुदाया गये दिन पलट के न आयें
न आएँ, न सोयी वो चाहत जगा दें ॥

नहीं ये कि बहती बग़ावत लहू में
मग़र जब भी चाहें हुक़ूमत गिरा दें ॥

नमो ब्रह्मऽविष्णु नमः हैं सदाशिव
सधी धड़कनों में अनाहत गुँजा दें ॥

रची थी कहानी कभी कृष्ण ने, वो -
निभाएँ, महज़ अब न भगवत करा दें ॥

हमारी कहानी व चर्चे हमारे
अभी तक हैं ज़िन्दा, बग़ावत करा दें ॥

बयाँ ना हुई अपनी चाहत तो क्या है |
चलो ज़िन्दग़ी को मुहब्बत बना दें ॥

रहा दिल सदा से ग़ुलाबोरुमानी |
हमें तितलियाँ क्यूँ न ज़हमत, अदा दें ॥


गुलिस्ताँ सजे यूँ कि ’सौरभ’ सहर हो |
कहो क्यारियों में वो उल्फ़त उगा दें ॥

************
--सौरभ

विश्व गजलकार परिचय शृंखलाक अन्य भाग पढ़बाक लेल एहि ठाम आउ--  विश्व गजलकार परिचय 

शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

रुबाइ



जगैत रहलहुँ हम राति भरि ओकरा बिना
तकैत रहलहुँ हम राति भरि ओकरा बिना
इम्हर ओम्हर एकै हाल से बुझाएल
कनैत रहलहुँ हम राति भरि ओकरा बिना

रुबाइ



हमर गाममे बहुत धुरंधर छै घरे घर
नाला पोखरि धार समुंदर छै घरे घर
गाछ पात डारि फूल बिया खेत खरिहान
दालि भात अचार चहटगर छै घरे घर

गुरुवार, 24 सितंबर 2015

अपने एना अपने मूँह-34

जनवरी 2015सँ अगस्त 2015 धरि
जनवरीमे कुल बारह टा पोस्ट भेल जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक तीनटा गजल, एकटा भक्ति गजल अछि। जगदानंद झा मनु जीक एकटा बाल गजल अछि। आशीष अनचिन्हारक एकटा अपने एना हपने मूँह, दूट बाल गजल, दूटा गजल, एकटा रुबाइ आ एकटा भक्ति गजल अछि।
फरवरीमे कुल ९टा पोस्ट अछि जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक एकटा गजल, एकटा इंटरव्यू आ एकटा सम्मानक विवरण अछि। जगदानंद झा मनु आ राम कुमार मिश्रजीक एक-एकटा गजल अछि।आशीष अनचिन्हारक तीन टा गजल आ एकटा बाल गजल अछि।
मार्चमे कुल तीन टा पोस्ट अछि जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक दूटा गजल आ आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि।
अप्रैलमे कुल एकटा पोस्टमे आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि।
मइमे कुल तीन टा पोस्ट भेल जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक दूटा गजल आ आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि।
जूनमे कुल आठ टा पोस्ट अछि जैमे बाल मुकुंद पाठकजीक पाँच टा गजल, कुंदन कुमार कर्णजीक एकटा वीडियो आ एकटा गजल अछि। आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि।
जुलाइमे कुल चारि टा पोस्ट अछि जैमे बालमुकुंद पाठक जीक दूटा गजल आ आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि। एकटा गजलकराक परिचय अछि

अगस्तमे कुल आठ टा पोस्ट भेल जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक चारिटा ओ आशीष अनचिन्हारक चारि टा गजल अछि।

रविवार, 20 सितंबर 2015

गजल

भक्ति गजल

भक्ति पियास दियौ हे मैया
मुक्ति हुलास दियौ हे मैया

जय जगतारणि सभ दुख हारणि
सुख के आस दियौ हे मैया

दुखमे डूबल सगरो दुनियाँ
बस उगरास दियौ हे मैया

ज्ञानक जोती हीरा मोती
कंठक भास दियौ हे मैया

बचि जेतै दुनियाँ के लाज
ई बिसबास दियौ हे मैया

सभ पाँतिमे 22+22+22+22 मात्राक्रम अछि।
दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।
अंतिम शेरक अंतिम लघुकेँ संस्कृत परंपरानुसार दीर्घ मानल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

बुधवार, 16 सितंबर 2015

रुबाइ



अनचिन्हारक हाथमे अनचिन्हारक हाथ
छै सिनेह भरल छातीपर घमाएल माथ
केखनो हटबै केखनो सटबै अपन ठोर
ऐ तरहें अनचिन्हार केलक हमरा सनाथ

मंगलवार, 15 सितंबर 2015

रुबाइ


सच झूठकेँ टकरेलासँ भरम टुटि जाइ छै
जेना पाथरसँ नमहर घैलो फुटि जाइ छै
टूटब आ जूटब बहुत कठिन छै दुनियाँमे
ई आँखिकेँ टकरेलापर शरम टुटि जाइ छै

सोमवार, 14 सितंबर 2015

रुबाइ



चुपचाप रहल बड़ी देर धरि हमरा देखि कऽ
जेना कि कोनो फूल चुप हो भमरा देखि कऽ
फेर केबाड़ बंद कऽ नाचल बहुत असगरे
लागल जे मजूर नाचल हो बदरा देखि कऽ

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

शनिवार, 12 सितंबर 2015

गजल


जकरे हाथमे किछु सत्ता छलै
तकरे हाथमे बड़ कत्ता छलै

कागजपर लिखल छै फागुन सही
गाछे गाछ पीयर पत्ता छलै

छै हड़ताल धरना अनशन बहुत
तैपर सैलरी बड़ भत्ता छलै

फाटल सनकेँ मोनक कागज मुदा
नीके नीक कपड़ा लत्ता छलै

असली चीज पिलुआ खदबद करै
तैपर मोट सुंदर गत्ता छलै


सभ पाँति 22221-22-2212 मात्राक्रम अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिक एकटा दीर्घकेँ लघु मानल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

बुधवार, 9 सितंबर 2015

गजल-50

तोहर याद नै आबै तँइ पी लए छी हम
जिनगी आब दारुमे डुबि जी लए छी हम

मतलब कोन छै हमरा दुनियासँ तोरा बिनु
अपनेमे मगन रहि ककरो की लए छी हम

दर्दक अन्हरीयामे पिअबाक मानक नै
कहियो काल कम कहियो बेसी लए छी हम

छै अलगे मजा स्वर्गक चुमनाइमे बोतल
तोहर ठोर बुझि नित चुमि सजनी लए छी हम

मजबूरी कहू या आदति या नियत कुन्दन
बस दुनियाक आगू बनि नेही लए छी हम

मात्राक्रम : 2221-222-22-1222

© कुन्दन कुमार कर्ण

http://kundanghazal.blogspot.com

गुरुवार, 3 सितंबर 2015

गजल

हमहीं साध्य हमहीं साधक हमहीं साधना छी
हमहीं भाव हमहीं भावक हमहीं भावना छी

छै परिणाम निश्चित रूपें ऐठाँ छै प्रमाणो
हमहीं कर्म हमहीं कारक हमहीं कामना छी

ऐ हाथें लियौ आ बँटियौ सौंसे एक रंगे
हमहीं भीख हमहीं याचक हमहीं याचना छी

बेकारक झमेला नै हुअए से मोन राखू
हमहीं धर्म हमहीं धारक हमहीं धारणा छी

चलि रहलै घमंडेमे जे सदिखन तकरा कहियौ
हमहीं सेव्य हमहीं सेवक हमहीं ताड़ना छी

ताड़ना=दंड

सभ पाँतिमे 2221-222-222-2122 मात्राक्रम अछि।
अंतिम शेरक पहिल पाँतिममे एकटा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

सोमवार, 31 अगस्त 2015

गजल

आइ हमरा बुझा रहल अछि
छै कियो जे नचा रहल अछि

भरि जनम जाल बनि कऽ रहलहुँ
अंतमे ओ बझा रहल अछि

आइ किछु काल्हि किछु तँ परसू
किछु ने किछु सभ बचा रहल अछि

किछु तँ छै बात जे टुकुर टुक
ओकरे दिस  तका रहल अछि

राति दिन भोर साँझ दुपहर
नाम तोरे रटा रहल अछि

सभ पाँतिमे 2122-12-122 मात्राक्रम अछि

 चारिम शेरक दोसर पाँतिमे एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

गुरुवार, 27 अगस्त 2015

गजल

कली त खिलल मुदा फुला नै सकल
हृदयसँ गुलाब बनि लगा नै सकल

वसंत बहार सन पहर छल मुदा
सिनेहसँ बाग ओ सजा नै सकल

कथीक कमी छलै हमर नेहमे
खुशीसँ किएक ओ बता नै सकल

बताह बनाक छोडि हमरा चलल
पियास हियाक ओ बुझा नै सकल

नसीब हमर खराब कुन्दन छलै
हिया त मिलल अपन बना नै सकल

मात्राक्रम : 12112-1212-212

© कुन्दन कुमार कर्ण

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गजल

जहिना दीपमे तेल जरूरी हए छै
तहिना नेहमे मेल जरूरी हए छै

जितबा लेल जिनगीक जुआमे मनुषकेँ
अपने किस्मतक खेल जरूरी हए छै

नेहक बाटपर जाइ बड़ी दूर तेहन
विश्वासक चलब रेल जरूरी हए छै

हितमे काज केनाइ समाजक असलमे
लोकप्रिय बनै लेल जरूरी हए छै

बिनु संघर्ष जिनगीक मजा कोन कुन्दन
कहियो काल किछु झेल जरूरी हए छै

मात्राक्रम : 2221-221-122-122

© कुन्दन कुमार कर्ण


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गजल

करितै नेह जँ केओ अथाह हमरो
रहितै मोन खुशीमे बताह हमरो

नेही एक बनी हमहुँ साँच ककरो
अछि जिनगीक रहल आब चाह हमरो

बनि घटवाह निमन भेट जाइ संगी
हेतै पार सफलताक नाह हमरो

कविता गीत गजल आ अवाज सुनिते
कहितै लोक जखन वाह वाह हमरो

मिलिते आइ नजरि ओकरासँ कुन्दन
मोने मोन भऽ गेलै निकाह हमरो

मात्राक्रम : 2221-122-121-22

© कुन्दन कुमार कर्ण


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गजल

ओकर यादक आइ फेरो विर्रो उठल हियामे
उडिया गेलौं हम बिहारि प्रेमक बहल हियामे

जादू मौसमकेँ असर केलक मोन पर हमर जे
आस्ते–आस्ते दर्द मिठगर नेहक बढल हियामे

अन्चोकेमे चान दिस ई चंचल नजरि कि गेलै
छल पूनमकेँ राति सूरत ओकर सजल हियामे

जा धरि ठठरी ठार रहतै मरिते रहब अहाँपर
खाइत शप्पत हम कहै छी प्रिय ई गजल हियामे

मोनक सेहन्ता हमर छल ललका गुलाब कुन्दन
ककरा सभ किछु भेटलै ऐठाँ जे रहल हियामे

मात्राक्रम : 2222-2122-2212-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

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मंगलवार, 25 अगस्त 2015

गजल

गजल

दंगा हुनके महिमा छै
सहमल कोसी कमला छै

खुब्बे बरसल आगि सखी
साबन भादब महिना छै

बदलल छै सरकार मुदा
सभ किछ जहिना तहिना छै

इंजन डिब्बा कानि रहल
रूकल रूकल पहिया छै

बेर कुबेरक घरमे आब
दैया मैया बहिना छै

सभ पाँतिमे 222-222-2मात्राक्रम अछि
दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु अतिरिक्त छूट जकाँ अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

रविवार, 23 अगस्त 2015

गजल



छूटल छाटल अनचिन्हार छलै
बूड़ल बाड़ल अनचिन्हार छलै

मोनक बक्सा खोलि कऽ देखलकै
साँठल सूठल अनचिन्हार छलै

सी लेलक ओ अप्पन छाँहो धरि
फाटल फूटल अनचिन्हार छलै

खूजल रहलै सभहँक हाथ मुदा
नाथल नूथल अनचिन्हार छलै

चलि गेलै चिन्हार तखन बुझलहुँ
बाँचल बूचल अनचिन्हार छलै

सभ पाँतिमे 222-222-222 मात्राक्रम अछि
दूटा लघुकेँ एकटा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

गजल

आइ फेरो दोस्ती के बहन्ना ताकि लै छी
नेह छोहक हेड़ाएल पन्ना ताकि लै छी

बड़ निहारै छथि ओ राहु केतुक संग शनिकेँ
हम अझक्के अपना लेल चन्ना ताकि लै छी

देहमे तरकारी ठोरमे छै दालि भात
आँखिमे हम चटनी संग सन्ना ताकि लै छी

लोक बेगरते मरि जेतै से मंजूर मुदा हम
अपना काजक खातिर सेठ धन्ना ताकि लै छी

घुरि कऽ एबे करतै प्रेम अनचिन्हार संगे
स्वागतक खातिर अँगना दलन्ना ताकि लै छी

सभ पाँतिमे2122-2221-2221-22 मात्रा क्रम अछि।


तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघुकेँ संस्कृत परंपरानुसार दीर्घ मानल गेल अछि।
चारिम शेरक दूनू पाँतिमे एक-एक ठाम दीर्घकेँ लघु मानल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

बुधवार, 15 जुलाई 2015

गजलकार परिचय शृखंला भाग-41








नाम : सुनील कुमार झा

पिता : श्री शंकर झा
माता : इंदिरा देवी
जन्म : 4/5/1988, सोनबरसा राज, सहरसा, बिहार
स्थायी पता - ग्राम पोस्ट : सोनबरसा राज, जिला - सहरसा, बिहार - 852129
ई मेल - njha61@gmail.com
शिक्षा : नैनपन केर शिक्षा अपन गाम स शुरू केलोंउ आ हाई स्कूल केर बाद कोनो नीक साधन नई हैबाक कारण ए. एन इंटर कॉलेज, दुमका स इंटर केर पढाई विज्ञान विषयक संग पूरा केलों। फेर शिक्षा लेल दिल्ली एलोऊ मुदा एतोका रंग में रंगी क नौकरी पकैड़ लेलोंउ, अखन McCann World Group  में सहायक छी, आ इग्नू स पर्यटन म स्नातक कए रहल छी।
साहित्य : विद्यार्थी जीवन से  कविता लेखन मे बड़ रूचि छल, स्कूल आ कॉलेज के कैकटा मंच पर अपन कविता पाठ कए चुकल छी। 2010 स अंतरजाल पर विदेह स जुड्बाक मौका भेटल, किछु गजेन्द्र जीक मार्गदर्शन स किछु लिखय लेल प्रेरित भेलोंउ, इ हमर सौभग्य अछि जे विदेह पर हमर किछु रचना क चुनल गेल, हालाकिं ओतेक नीक नै मुदा साहित्यिक जीवन केर सुरुआत एतेय स पूर्ण रुपें भेल। फेर फेसबुक केर विदेह ग्रुप पर आशीष जी भेट भेल आ अनचिन्हार आखर हमरा आकर्षित केलक, आ आशीष जीक मार्गदर्शन स अनचिन्हार आखर पर अपन गजल, रुबाई लिख लागलहूँ, अखन किछु दिन स ग़ज़ल स दूर भए गेल छी, अर्थक पाछू बेकल रहैत छी त समय के सेहो आभाव लगैत अछि, ओना नीक शुरुवात के लेल अनचिन्हार आखर पर गज़लक स्कूल केर संगोपान्गाय अध्यन म लागल छी, गुरुदेव क आशीर्वाद स फेर एही विधा आ आयब।  साहित्य केर एकटा नव आवाम देबय लेल हम सदिखन  आभारी रहब श्री गजेन्द्र ठाकुर जी आ आशीष जीकँ।


सुनीलजी विदेह आ अनचिन्हार आखरसँ जुड़ल पुरान गजलकार, हाइकूकार ओ मुकरीकार छथि (संपादक)।

मंगलवार, 14 जुलाई 2015

गजल

जे जानि रहल
से मानि रहल

जकरा भेटै
से फानि रहल

नेता चंदा
बड़ टानि रहल

जनता चादरि
सन तानि रहल

अनचिन्हारो
किछु ठानि रहल

सभ पाँतिमे 22+22 मात्राक्रम अछि।
दू टा अलग-अलग लघुकेँ मिला कऽ एकटा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

बुधवार, 1 जुलाई 2015

गजल

आनक सुख देखि क' कानि रहलै लोक
अपनाकेँ भाग्यहीन मानि रहलै लोक

आमदक स्त्रोत नै, खर्चक द्वार बहुतो
एक्कै पाइ बेर-बेर गानि रहलै लोक

बिसरि अपन भाषा, अपन संस्कारकेँ
अंग्रेजी संस्कृति एत' आनि रहलै लोक

पीबि लेलक घोरि-घोरि लाज-लेहाजकेँ
तनिको नै पैघकेँ गुदानि रहलै लोक

गाम-गाम जरि रहल दंगा-फसादमे
घूमि-घूमि जग्गह ठेकानि रहलै लोक

वर्णिक बहर, वर्ण-15

गजल

प्रेममे मीता, बेरबाद छी हम
मूल छथि ओ, अनुवाद छी हम

प्रीतक भाषा, हुनका ठोर अछि
आ दुख भीजल संवाद छी हम

सुखक जिनगी संग काटलहुँ
दुखमे किए, अपवाद छी हम

प्रीतक फसलि, जरलै खेतमे
गिरहत ओ, खाली खाद छी हम

हुनकासँ एहने संबंध, जेना
ओ दिल्ली, आ इस्लामाबाद छी हम

वर्ण-12

रविवार, 28 जून 2015

गजल

गजल

सोहाग आ भाग सन
हम गीत तों राग सन

लटपट रहब बस कनी
हम भात तों साग सन

कनियें बुनाइत रहब
हम सूत तों ताग सन

सदिखन रहब संगमे
हम चैत तों फाग सन

दुनियाँमे बड़ झगड़ा छै
हम तों तँ उपराग सन

सभ पाँतिमे 2212+ 212 मात्राक्रम अछि
अंतिम शेरक पहिल पाँतिमे शब्दक अंतिम दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

शुक्रवार, 26 जून 2015

गजल


नै हरियर नै पीयर छै बेरंगक ई जीवन
नै नोनगर नै मधुर छै बेढ़ंगक ई जीवन

मुहँ बान्हल नदी नै मिलत कहियो जलधिमे
ओहने व्याकुल बेकार बेउमंगक ई जीवन

की सुनत लोक गीत नाद आ की सुनत गजल
पीड़ा कराह सुनि भेल बेतरंगक ई जीवन

कठपुतली भ' नाचै लोक लोकक आँगुर पर
एहि ठाँ गोर हाथ रहितो अपंगक ई जीवन

आब जीयल दुलर्भ छै महँगी आ बइमानीसँ
भेल भ्रष्ट्राचारी तराजूक पासंगक ई जीवन

सरल वर्णिक बहर ,वर्ण 18
© बाल मुकुन्द पाठक

गजल


छै सगरो अन्हार ,किछु नै सुझा रहल अछि
आब केम्हर जाउ ,किछु नै फुरा रहल अछि

मीठ-मीठ गप्प कहि ,जे सत्ता धरि पहुँचल
ओ अंगुरी पर जनताके नचा रहल अछि

जहियासँ फाँट पड़लै खेतसँ घराड़ी धरि
अपनो घर तँ आन सन बुझा रहल अछि

जे रहैत छल शानसँ यौवनमे सभ दिन
ओ बुढ़ारीमे भूखसँ बिल-बिला रहल अछि

जाहि माटिक संस्कारसँ लोक गेलै चान धरि
ओहि माटिके खराब ओ बता रहल अछि

स्वार्थेटा पैघ भेलै आब आजुक व्यवहारमे
पाइ-पाइ लेल लोक -वेद बिका रहल अछि

 वर्ण-17

 © बाल मुकुन्द पाठक

गजल

खाली फूसिक व्यापार हम देखलहुँ संसारमे
हाल सत्यक लचार हम देखलहुँ संसारमे


की टी.वी. ,की अखबार ,सभमे एतबे समाचार
चोरि ,हत्या ,बलात्कार ,हम देखलहुँ संसारमे

जखनेसँ दंगा भेल ,जाति-पाति केर नाम पर
चमकैत तलवार ,हम देखलहुँ संसारमे

की हाट ,की बजार , छै सभ पर महगी सवार
भूखे जिनगी पहाड़ ,हम देखलहुँ संसारमे

मोन पड़ै घर-द्वार ,गामक पोखरिक मोहार
आ ओ पावनि-तिहार ,हम देखलहुँ संसारमे

सगरो व्याप्त अत्याचार ,छै अनठेने सरकार
सूतल हवलदार , हम देखलहुँ संसारमे

वर्ण-18
  © बाल मुकुन्द पाठक

गजल‬

मोनक बेथा ने ककरोसँ कहू
एहि मामिलामे अहाँ चुप्पे रहू

टीस कतबो किए ने बढ़ि जाए
मोने-मोन कानू, मोने-मोन सहू

प्रेमसँ समाज, प्रेमेसँ संसार
प्रेमसँ अहाँ सभक संग रहू

पैघक बात खराबो जौं लागए
सुनिकेँ रहू, उत्तर जुनि कहू

काँट भरल छै बाट जिनगीक
'मुकुन्द' नहुँ-नहुँ बढ़ैत रहू

 वर्ण-12
 © बाल मुकुन्द पाठक

गजल

जे रहैत छल लगमे, ओ दूर भ' गेल
हमर सौंसे करेज भूरे-भूर भ' गेल

बहुते यत्नसँ, घर प्रेमक बनेलहुँ
छुटिते संग सब, चकनाचूर भ' गेल

हाव-भाव ओकर ततेक ने बदलल
ओ बैर नहि रहल, ओ अंगूर भ' गेल

जाहि प्रश्नक उत्तर, बूझल नै हमरा
वैह प्रश्न किएक सोझाँ हुजूर भ' गेल

घुरि आउ मुकुन्द, अहाँ कोनो शर्त पर
आब शर्त सब हमरा, मंजूर भ' गेल

वर्ण-15.

 © बाल मुकुन्द पाठक

रविवार, 21 जून 2015

गजल

साँच नेह कहियो धोखा नै दए छै
मोनमे बिछोड़क फोंका नै दए छै

एक बेर जे बुझियौ छुटि गेल संगी
बेर-बेर किस्मत मौका नै दए छै

देखियोक लगमे अन्ठा देत सदिखन
एक छुटलहा हिय टोका नै दए छै

त्याग साधना आ नित चाही तपस्या
साँच नेह ईश्वर ओना नै दए छै

दोहराक कुन्दन नेहक बात नै कर
साँझमे पराती शोभा नै दए छै

मात्राक्रम : 212-122-222-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

रविवार, 17 मई 2015

गजल

घर छोडि डरमे जी रहल छी
Kundan Kumar Karna
एहन शहरमे जी रहल छी

दिन राति छी काटैत एना
जेना कहरमे जी रहल छी

संसार अपनेमे मगन छै 
भगवान भरमे जी रहल छी

प्रकृतिसँ हारल अछि परिस्थिति
कालक असरमे जी रहल छी

मजबूर छी जिनगीसँ कुन्दन
तँइ एसगरमे जी रहल छी

मात्राक्रम : 221-222-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

गुरुवार, 14 मई 2015

गजल

सम्पूर्ण भूकम्प पीड़ित आ एहि कारणे अपना सभक बीचसँ गुजरलप्रति श्रद्धाञ्लीस्वरूप समर्पित ई गजल

जै ठाँ छल काइल नित जिनगीक मुस्कान
तै ठाँ बस नोरक रहि गेलै किए स्थान

हे ईश्वर ई केहन खेल प्रकृति केर
लोकक घर जेना अछि बनि गेल शमसान

गजलक अक्षर-अक्षर कानैत अछि आब
कहि धरती कोना यौ बनि गेल बइमान

कहियो सुन्नरता जै देशक रहल शान
छन भरिमे सभ ओ मेटा गेल पहचान

आशा मोनक कुन्दन अछि जीविते मोर
उगबे करतै जिनगीमे एक दिन चान

मात्राक्रम : 222-222-221-221

© कुन्दन कुमार कर्ण

बुधवार, 13 मई 2015

गजल



भेटैत रहिहें कहियो काल
देखैत रहिहें कहियो काल

ई प्राण बनलौ तोरे लेल
झीकैत रहिहें कहियो काल

चर्चा हमर बस उड़िते रहतौ
सूनैत रहिहें कहियो काल

सुइटर सनक छै ई जीबन से
बूनैत रहिहें कहियो काल

हम फूल तों भमरा बनि बनि कऽ
सूँघैत रहिहें कहियो काल

सभ पाँतिमे 2212+2+2221 मात्राक्रम अछि।
तेसर आ चारिम शेरक दोसर पाँतिक अंतिम दीर्घकेँ संस्कृत परम्परानुसार लघु मानल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों