शुक्रवार, 30 मई 2014

गजल


सजि क' एलै इजोरिया के फूल
प्राण झिकतै इजोरिया के फूल

बीछि लिअ रौद मोन भरि आँगनमे
हम तँ बिछबै इजोरिया के फूल

अंतमे संग लेल हमहीँ ठीक
छोड़ि भगतै इजोरिया के फूल

खूब बेचू अहाँ हँसी के भेद
नोर किनतै इजोरिया के फूल

जागि गेलै इयाद सभ चुपचाप
फेर कनतै इजोरिया के फूल

सभ पाँतिमे 2122+121222+1 मात्राक्रम अछि।

दोसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

बुधवार, 28 मई 2014

गजल

गजल

बस पात छलै
नै भात छलै

जे आगू छल
से कात छलै

हम साँझ छलहुँ
ओ प्रात छलै

हँसि हँसि बाजल
किछु बात छलै

हारल थाकल
अहिबात छलै

सभ पाँतिमे 2222 मात्राक्रम अछि।

सभ शेरमे दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सोमवार, 26 मई 2014

गजल


हे भोला लिअ अपन शरणमे
नहि किछु भांगट हमर मरणमे

सबतरि घुरि हम आश हारलौं 
नहि छी समरथ अपन भरणमे

मोनक मित सब दूर परल अछि
किछु नहि भेटल पुण्य हरणमे 

जीवन भरि हम मुर्ख बनल छी
भेटल सुख  भोलाक वरणमे

पापक बोझसँ थाकि गेल छी  
‘मनु’केँ लय लिअ अपन चरणमे

(मात्रा क्रम : २२२२-२१-२१२)
जगदानन्द झा ‘मनु’  

गजल

भावनामे बहू नै कखनो
दास मोनक बनू नै कखनो

चित्त एकाग्र राखू सदिखन
घोर चिन्ता करु नै कखनो

मोह माया कऽ बन्धनमे यौ
भुलि कऽ मरितो परु नै कखनो

मीठ बोली सभक लग बाजू
बात कटु सन कहू नै कखनो

बाट जे लक्ष्य धरि नै पहुँचत
ताहि बाटसँ चलू नै कखनो

कर्म आधार छी जिनगीकेँ
दूर एहिसँ रहू नै कखनो

सूत्र छी किछु सफलताकेँ ई
बात व्यर्थक बुझू नै कखनो

मात्राक्रम : 2122-12222

© कुन्दन कुमार कर्ण

गजल

बाल गजल

जाइंग द गाछीमे चुप्पे चुप्पे
नाचिंग द गाछीमे चुप्पे चुप्पे

खोलिंग द बरतन लेइंग द चिन्नी
खाइंग द गाछीमे चुप्पे चुप्पे

मारिंग द लाठी फोरिंग द माथा
भागिंग द गाछीमे चुप्पे चुप्पे

हगनी मुतनी आ छेछरिया कटनी
पादिंग द गाछीमे चुप्पे चुप्पे

बात घरैया सभ हो की छौंड़ीकेँ
बाजिंग द गाछीमे चुप्पे चुप्पे

सभ पाँतिमे 22222+22222 मात्राक्रम अछि

अधिकांश पाँतिमे दूटा अलग-अलग लघुकेँ एकटा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

मंगलवार, 20 मई 2014

गजल

हुनका चाही काबा काशी
हमरा चाही लबनी पासी

हँसि हँसि गाबै माँलक बनियाँ
उजड़ल उपटल गामक चासी

उज्जर निरमल चकमक चकमक
कारी कारी मोनक वासी

बड़ भारी अछि नामक महिमा 
तैयो दरसन के अभिलाषी

चूबै अमरित हुनकर ठोरसँ
पी पी बनलहुँ हम अविनाशी

सभ पाँतिमे 22+22+22+22 मात्राक्रम अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सोमवार, 19 मई 2014

गजल

भक्ति गजल

शिव शंकर भोला हे प्रभु
लिअ भांगक गोला हे प्रभु

टहलू भूतक संगे अहाँ
गौरी के टोला हे प्रभु

बड़का चुप्पा छै गण हिनक
नंदी बड़बोला हे प्रभु

भूतक बरियाती संग छै
बस साँपक डोला हे प्रभु

आत्मा गौरी शिव देह सम
छै सभहँक चोला हे प्रभु

सभ पाँतिमे 222+222+12 मात्राक्रम अछि।

पाँतिक अंतिम लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।


शुक्रवार, 16 मई 2014

गजल



जल्दीसँ लगबियौ बंसीमे बोर बाबा
बीतत समय तँ भेटत बस अंगोर बाबा

मारल छलहुँ पिआरक की निंदक पता नै
नहिये पता चलल जे भेलै भोर बाबा

नै कहब नै कहू हमरा दुनियाँ बुझैए
जे कोन धनसँ सुड़कै छी नित झोर बाबा

रटि वेद आ कुरानक आखर बिसरलहुँ हम
खाली इयाद रहलै हुनकर ठोर बाबा

पिच छै क्रिकेटकेँ अवसर आएत नै फेर
सिक्सक भरोसपर नै छोड़ू फोर बाबा

सभ पाँतिमे 2212+1222+2122+2 मात्राक्रम अछि।
अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु अतिरिक्त लघु अछि घुटक तौरपर।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।


गुरुवार, 15 मई 2014

गजल



तिताइन हँसी
बिसाइन हँसी

छी वैष्णव मुदा
मछाइन हँसी

पसरि गेल छै
खराइन हँसी

पिबै छी अहाँ
खटाइन हँसी

हमर ठोरपर
सड़ाइन हँसी

सभ पाँतिमे 122+12 मात्राक्रम अछि।
दोसर शेरक पहिल पाँतिक पहिल शब्दकेँ लघु मानि लेबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सोमवार, 12 मई 2014

गजल

बाल गजल


आमुन बेटी जामुन बेटी
लिच्ची सनकेँ दारुन बेटी

सरदी गरमी पुरबा पछबा
सावन भादव फागुन बेटी

धो पोछि क' सगरो चमकाबै
आँगन बासन साबुन बेटी

अनका घरकेँ पोसै पालै
हमरा घरकेँ पाहुन बेटी

सभहँक उप्पर जूति चलेतै
कानन बाजन कानुन बेटी


सभ पाँतिमे 222+222+22 मात्राक्रम अछि।
तेसर आ अंतिम शेरक पहिल पाँतिमे दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। तेनाहिते मूल शब्द "कानून" छै मुदा काफिया ओ लयकेँ रक्षा करैत "कानुन" कहल गेल अछि।
दारुण लेल दारुन कहल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

शनिवार, 10 मई 2014

गजल

लाठी लेने घूमै बौआ
सदिखन हल्ला मचबै बौआ

बाबा बूलथि नहुँए नहुँए
आगू आगू भागै बौआ

राखल छै चिन्नी कोनामे
सभटा लिल्ला जानै बौआ

रूसै फूलै कानै बाजै
झटपट तैयो मानै बौआ

ने पढ़तै ने लिखतै खाली
भरि भरि थारी खेतै बौआ

सभ पाँतिमे 222+222+22  मात्राक्रम अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शुक्रवार, 9 मई 2014

गजल

बाल गजल

कुक्कुर भूकै गाछीमे
तेल लगा ले लाठीमे

भैंसी गैया सभ संगे
मोन लगैए पाठीमे

हमरो हेतै दाढ़ी मोछ
केशो हेतै छातीमे

नै चाही सुइटर फुइटर
गर्मी लागै गाँतीमे

ठकना फेकू मखना सभ
भगलै मारा मारीमे

सभ पाँतिमे 222+222+2 मात्राक्रम अछि।
पहिल आ दोसर शेरक दोसर पाँतिमे दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। संगे संग तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतमे एकटा अतिरिक्त लघु केर छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

बुधवार, 7 मई 2014

अपने एना अपने मूँह-26



अप्रैल २०१४मे अनचिन्हार आखरपर कुल १७टा पोस्ट भेल जकर विवरण एना अछि--

जगदानंद झा मनु, अमित मिश्रक १-१टा पोस्टमे १-१टा गजल आएल।
कुंदन कुमार कर्णजीक २टा पोस्टमे २टा गजल आएल।
आशीष अनचिन्हारक १३टा पोस्टमे--
६टा गजल, २टा भक्ति गजल,३टा बाल गजल,१टा अपने एना अपने मूँह आ १टा पोस्टमे गजलकार परिचय अछि

मंगलवार, 6 मई 2014

गजल



आखर आखर जोड़ि जोड़ि क’ जीवनक ग्रन्थ लिखने छी
कोड़ो वाती तोड़ि तोड़ि क’ हम माघक जाड़ तपने छी

 
रखलौं जगमे पहिल डेग जखन सपना छोड़ि किछु नै छल
बड़ बड़ साँपक एतए धरि आबैमे जहर सहने छी

 
अप्पन जीवन केर जोड़ घटा सबटा एसगर केलौं
भूखे रहितो पेट हमर मुदा नै किनकोसँ मँगने छी

 
झोपड़ पट्टी केर भीत बनाबी दिन भरि अपन हाथसँ
दोसर दिन तोरैत लातसँ चण्डालक आँखि तकने छी

 
दू दूटा अठमासु दूध मुँहा भूखल हमर कोरामे
नै दुख सहि नेनाक देख मुँह प्रभुकेँ ‘मनु’ सुमरने छी

 
(मात्रा क्रम : २२२२-२१२११-२२२२-१२२२, सभ पांतिमे)

 

रविवार, 4 मई 2014

गजल

2.41
सुनहट फेर सगरो गाममे साँझ नै पड़ल
शाइत ताग नेहक टूटि कऽ स्वर्ग धरि चलल

मूरत माँटि सन बनि गेल माँउसक गरम तन
ने किछु फूटि रहल स्वर, ने स्वर सुनि रहल

चुप्पी लाधि बैसल अछि विपिनमे अवोध पशु
कोनो जालमे हिरणक सकल कुटुम अछि फसल

चमचम चीज जे बेसी पलटि दैछ किरणकेँ
कनिञे चमक कम राखू तँ जिनगी बनत सरल

ममता देब कतबो ढारि फइदा कहाँ "अमित"
डिबिया काल्हि ने परसू मिझा रहत, अछि बुझल

2221-2221-2212-12
अमित मिश्र

गुरुवार, 1 मई 2014

गजल



लबनी फुटैए सपनामे
पासी हँसैए सपनामे

काजरसँ पाथर पिघलल छै
टप टप चुबैए सपनामे

जागल मनोवृति सैंतल जे
बहसल लगैए सपनामे

सोहाग एहन अछि चमकल
सपना अबैए सपनामे

चिन्हार अनचिन्हारक संग
गरदनि कटैए सपनामे


सब पाँतिमे 2212+2222 मात्रा क्रम अछि।

अंतिम शेरक पहिल पाँतिकेँ अंतमे अतिरिक्त लघु लेबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

रुबाइ

आपस क दे ओ हमरा  हमर बितल दिन

किरया तोरा द दे   ओ सगर बितल दिन

रहि जाएब आब असगरे तोरा बिन

नै यादि करब संगे तोहर बितल दिन

                  ✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’


रविवार, 27 अप्रैल 2014

गजल

हमर रचना एखन धरि काँच अछि
मुदा जे अछि से सब टा साँच अछि

अहाँ उगलै छी ज्वाला बाटपर
हमर घर शब्दक लहरल आँच अछि

पिछरि रहलै रिश्ता मनुखक बहुत
लगै छै सगरो समतल खाँच अछि

रसे-रस रथ घुसकत मिथिलाक यौ
अहाँ सिखबू बरु पाठक पाँच अछि

हमर नामे सप्पत खा ले "अमित"
हमर सत हमरे झूठक जाँच अछि


*खाँच= खाधि ।चेनकेँ नचेबाक लेल पैडिलक जेहन बनाबट होइत अछि ।
1222-2222-12
अमित मिश्र

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

गजल

पानि एना बरसल रे सुगबा
खेत ओक्कर सुक्खल रे सुगबा

भोट पड़लै ढ़ाकी के ढ़ाकी
लोकतंतर तरसल रे सुगबा

धाह लगलै एते चमड़ीमे
बिलसँ ओ सभ निकलल रे सुगबा

बस अकासे बाँचल फाइलमे
माटि चम चम चमकल रे सुगबा

कामिनी कंचन कादम्बक संग
मोन सभहँक बहसल रे सुगबा

सभ पाँतिमे 2122+222+22 मात्राक्रम अछि

अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतमे एकटा अतिरिक्त लघु लेबाक छूट लेल गेल अछि।


सुझाव सादर आमंत्रित अछि

बुधवार, 23 अप्रैल 2014

गजल

कत' के कनियाँ कोने महफा हो राम
कत' के समधी कोने दुल्हा हो राम

देहक कनियाँ कर्मक महफा हो राम
सत समधी दुल्हा परमात्मा हो राम

किनकर हाथें सोहागिन बनलहुँ हम तँ
कोने सेनुरबा छै सोभा हो राम

हम जम हाथें सोहागिन भेलहुँ आइ
नोरक सेनुरबा छै शोभा हो राम

सभकेँ भेटै कर्मक फल अपने मोने
गाबै निरगुण अनचिन्हरबा हो राम

सभ पाँतिमे 222+222+222+21मात्राक्रम अछि।

अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

गजल

ओ एलै बहार एलै
सुनि मोनक पुकार एलै

गेलै मोन भरि उमंगसँ
नेहक जे हँकार एलै

हुनकर आगमनसँ हियमे
प्रीतक रस अपार एलै

दुनियाँ नीक लाग लगलै
जिनगीकेँ किनार एलै

सपना भेल एक पूरा
सुखकेँ दिन हजार एलै

मात्राक्रम: 2221-2122

© कुन्दन कुमार कर्ण

गजल


सोनाकेँ महलिया जखन टुटलै हो राम
सारा सन महलिया तखन बनलै हो राम

कानै संसार संग सुत मित सभ रहि रहि क'
छटपट्टी मोनमे हमर लगलै हो राम

काँचे बाँसक बना रहल महफा सभ कियो
पूरा भेलै जखन तखन उठलै हो राम

काठक उँचका पलंगिया सोभै बड़ बेसी
लह लह धधरासँ देहिया जरलै हो राम

जाबे धधरा रहै घरक आशा छल हमरा
पचकठिया होइते नगर छुटलै हो राम


सभ पाँतिमे 22+2221+122+2221 मात्राक्रम अछि।

चारिम आ पाँचम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम दीर्घकेँ लघु मानि लेबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

गजल

सरकारो हुनके छलै
हथियारो हुनके छलै

मूरख तूरख सभ कियो
बुधियारो हुनके छलै

गायक वादक बाइजी
दरबारो हुनके छलै

सुखलै मरलै जीव सभ
ई धारो हुनके छलै

लागल नै किछु दाम बस
पैकारो हुनके छलै

सभ पाँतिमे 2+2221+2 मात्राक्रम अछि।


सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

गजल


ई कमल सन नजरि जे लाजे झुकल अछि

प्राण लेलक हमर जे आँचर खसल अछि

 

देखलहुँ मोहिनी रूपक छवि जखन हम

भेल पहिनेसँ मनमे जेना बसल अछि

 

हम दुनू मिल जँ जीवनमे संग चलबै

प्रेम जग देखतै मनमे जे सजल अछि

 

सत कहै छी अहाँकेँ हम मानियो लिअ

बिन अहाँ सुन्न सगरो जीवन बनल अछि

 

मीत मोनक अहीँ हम्मर  सात जन्मसँ

हाँ सजन केर सुनि ली तेँ ‘मनु’ बचल अछि

 

(बहरे असम, मात्राक्रम  2122-1222-2122)

✍🏻जगदानन्द झा 'मनु'

गजल

तोरे नामे गमा देलहुँ जिनगी
आसामे तँ बिता देलहुँ जिनगी
हम तँ बेर-बेर हारि जाइत छलहुँ
हाथे पकड़ि तँ जिता देलहुँ जिनगी



गजल

चुप सन हुनकर ठोर आँखि लागैए
तैयो देहक भास किछु तँ बाजैए

एना हुनकर देह छूब' चाहै छी
जेना बच्चा आगि छूब' चाहैए

सारापर नोरक टघार छै जिनकर
मरलोमे हुनकर इयाद आबैए

पीयर हरियर नील लाल सभ
हुनके आँचर केर रंग लागैए

श्वासक डोरी टुटि खसत तकर बादे
सुनबै जे हरजाइ खूब कानैए

सभ पाँतिमे 22+2221+2122+2  मात्राक्रम अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

बुधवार, 16 अप्रैल 2014

गजल



हम अहाँ झुट्ठे के मीता छी
बिख भरल उज्जर नवनीता छी

अछि अहाँ लग कैंची ओ नेता
हम अहीं सेवामे फीता छी

चाह नै जे ओहन सासुर हो
गर्भमे अँकुरल नव सीता छी

फूसि कहतै वा सच सभ सुनबै
कोर्टमे राखल हम गीता छी

मंच सापेक्षी चिन्नी बोरल
एकटा बस हमहीं तीता छी

सभ पाँतिमे 212+222+222 मात्राक्रम अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सोमवार, 14 अप्रैल 2014

गजल



कंच संग कंचन छै
हारि संग वंदन छै

बिख ल' नाचि उठलहुँ हम
दर्द केर मंथन छै

साँप घुमि रहल सौंसे
लग लगीच चंदन छै

ठोर चूमि कहलक ओ
प्रेम पाप भंजन छै

नोर खसि पड़ल जैठाँ
भूमि ओ तँ कुंदन छै

सभ पाँतिमे 21+2122+2 मात्राक्रम अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

गजल

ऐ बाल गजलक पहिल तीन शेर आ तकर बादक तीन शेर अलग-अलग पढ़ल जाए--


बाल गजल

रसगुल्ला दे छेना दे
नै लेबौ कम पूरा दे

हमरा थारीमे पुच्छी
नै खेबौ हम मूड़ा दे

माछी खसलै थारीमे
हमरा दोसर पूआ दे

खेलहुँ माँड़े भात सदा
आइ तँ हमरा चूड़ा दे

कत्ते घुमबै गाछीमे
कनियें टा बस दूरा दे

माटरजी माँगै पैसा
हमरा पहिने पैसा दे

सभ पाँतिमे मात्राक्रम 222+222+2 अछि।

चारिम शेरक दूनू पाँतिमे 2टा लघुकेँ 1टा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

बुधवार, 9 अप्रैल 2014

अपने एना अपने मूँह-25

मार्च २०१४मे कुल २६ टा पोस्ट भेल जकर विवरण एना अछि--

मिहिर  झा जीक कुल ६टा पोस्टमे ६टा गजल आएल।
ओमप्रकाशजीक १टा पोस्टमे १टा गजल आएल।
जगदानंद झा मनुजीक २टा पोस्टमे १टा गजल आ १टा भक्ति गजल आएल।
गजेन्द्र ठाकुर जीक १टा पोस्टमे "कथा गोष्ठीमे गजलक लोकप्रियता" बला लेख आएल।
आशीष अनचिन्हारक कुल १६टा पोस्टमे-
८टा गजल, १टा अपने एना अपने मूँह, १टा आलोचना, १टा सम्मान सम्बन्धी, १टा छंद सम्बन्धी आलेख आएल संगे संग योगानंद हीराजीक ३टा आ जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल जीक १टा गजल प्रस्तुत कएल गेल।

सोमवार, 7 अप्रैल 2014

गजल



मस्जिद महँक भगवान छी हम
मन्दिर महँक रहमान छी हम

चढ़लहुँ अपन कन्हा तखन आइ
रामक बनल हनुमान छी हम

हटलो रहू सटलो रहू से
चिचिया रहल समसान छी हम

संतान अछि सैतान मीता
खाली महल दरबान छी हम

तीसी हँसल सरिसों सजल आ
गुम्हरि रहल नव धान छी हम

सभ पाँतिमे 2212+2212+2 मात्राक्रम अछि।
दोसर शेरक पहिल पाँतिक अंतमे 1टा लघु अतिरिक्त लेबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शनिवार, 5 अप्रैल 2014

गजल

बाल गजल

खिचड़ी भेटल गरम गरम
चोखा लागै लरम लरम

पापड़ घी ओ अचार सभ
हमरा मोनक भरम भरम

भोजन बादें भजन हवन
पेटक पूजा धरम धरम

चाहे जेहन लगै रहै
खेबामे नै शरम तरम

खेलहुँ खिचड़ी चमकि छमकि
भेटल मुख सुख परम परम


सभ पाँतिमे 22+22+12+12 मात्राक्रम अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

गजल

बाल गजल

नानी मौसी मामा दे
कक्का काकी बाबा दे

हमरो चाही किछु ने किछु
काशी मथुरा काबा दे

पिज्जा बर्गर चारि दिनक
मुरही भुज्जा लाबा दे

हमहूँ बनबै सोना सन
चुल्हा भट्ठी आबा दे

बरखा बुन्नी अपने छै
घैला चुकरी डाबा दे

सभ पाँतिमे 22+22+22+2 मात्राक्रम अछि।
तेसर शेरक पहिल पाँतिमे दूटा अलग लघुकेँ एकटा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।


सुझाव सादर आमंत्रित अछि

गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

गजल

बादलमे नुका जाइ छैक चान किए
अप्पन एतऽ बनि जाइ छैक आन किए

करबै नेह जे केकरो अपार हियसँ
तकरो बाद घटि जाइ छैक मान किए

राखब बात जे दाबि मोनकेँ कहुना
सभकेँ लागिये जाइ छैक भान किए

चाहब जे रही खुश सदति हँसैत मुदा
ई फुसि केर बनि जाइ छैक शान किए

कुन्दन कल्पनामे गजल कहैत चलल
सभ बुझि लेलकै प्रीत केर गान किए

मात्राक्रम: 2221-2212-12112

© कुन्दन कुमार कर्ण

सोमवार, 31 मार्च 2014

कलंकित चान

"जनकपुर ललित कला प्रतिष्ठान" द्वारा बर्ख 2013 (दिस.मे) श्री राम भरोस कापड़ि "भ्रमर"जीक कथितजल संग्रह- "अन्हरियाक चान" प्रकाशित भेल अछि। पोथीक भूमिकामे भ्रमरजी स्वीकार करै छथि जे गजलक व्याकरणपर ओ गजल नै लिखने छथि संगे-संग ओ समीक्षककेँ सेहो हिदायत देने छथिन्ह जे ओ व्याकरणक तराजूपर ऐ गजल सभकेँ नै तौलतथि। एकर मने ई भेल जे भ्रमरजी अपने मानै छथि जे हुनक गजल "अजाद गजल " आ समीक्षक तँ अजाद गजलक समीक्षा करबाक लेल स्वतंत्र छथि। संगे-संग भ्रमरजी भूमिकाक समीक्षा करबाक लेल कोनो प्रतिबंध नै लगेने छथि तँए समीक्षक भूमिकाक समीक्षा करबाक लेल सेहो स्वतंत्र छथि।ओना भ्रमरजी गजलमे व्याकरणक मजूगत स्थितिसँ परिचित छथि आ तँए ओ अपन सीमाकेँ देखार केलाह जे की स्वागत योग्य गप्प अछि। तँ चलू शुरू करी भ्रमरजीक अजाद गजलक समीक्षा आ तकर बाद हिनकर भूमिकापर।

अजाद गजलक कान्सेप्ट---
जखन कोनो भाषामे कोनो खास विधाकेँ करीब 500-600 बर्ख भ' जाइत छै तखन ओइमे परिवर्तन जरूरी भ' जाइत छै। उर्दू गजलकेँ (जँ भारतीय फारसी गजलकेँ जोड़ि देखी तँ) करीब 500-600 बर्ख भेल छै तँए 1960-70केँ दशकमे उर्दूमे अजाद गजल आएल। एकर मतलब कहल गेलै जे गजलमे बहर कोनो जरूरी नै हँ काफिया भेनाइ आवश्यक अछि ( बिना रदीफकेँ सेहो गजल होइ छै से धेआन राखब जरूरी)। ओनाहुतो बिना काफियाकेँ गजल नै होइत छै से सभ जनै छथि। जँ ऐ अधारपर देखी तँ भ्रमरजी बहुत रास कथित गजल फेल भ' जाइत अछि मने भ्रमरजीक कथित अजाद गजल सेहो अजाद गजल कहबा योग्य नै अछि। किछु उदाहरण देखू--

पोथीक पहिल कथित अजाद गजलक पहिल दू पाँति एना अछि---

ई जनक केर नगरी अपन गाम थिक
ई मिथिला बैदेहीक अपन गाम थिक
मने काफिया गायब। जँ काफिया गाएब तँ तँ गजल नाम्ना विधे गाएब। खएर एहन-एहन दोष ऐ पोथीक गजल संख्या -4,5,6,9,12,14,20,22,23,24,28,29,32,33,34,35,36,39,41 मे भेटत। ओना आन गजलमे किछु ढ़ग तँ छै जकरा काफिया नै बल्कि तुकांत कहब बेसी समीचीन। ईहो मोन राखब जरूरी जे ऐ पोथीमे कुल 44टा गजल अछि।
जँ हम नेपालीय परिसरक हिसाबसँ ऐ पोथीकेँ देखी तँ हमरा ई कहबामे कोनो संकोच नै जे राजेन्द्र विमल जीक गजलकेँ अजाद गजलक श्रेणीमे तँ राखल जा सकैए मुदा भ्रमरजीक गजल तँ अजादो गजलमे स्थान पेबाक योग्य नै अछि। सोंझ तरहें कही तँ भ्रमरजीक ऐ पोथीमे संकलित सभ रचना आन विधा तँ भ' सकैए मुदा गजल, कथित गजल वा अजाद गजल केखनो नै भ' सकैए।

मुदा जत' भ्रमरजी अपन गजल महँक दोष स्वीकार करबाक हिम्मति राखै छथि ओतए विमलजी अपन गलतीकेँ स्वीकार करबासँ हिचकै छथि।ई चारित्रिक अंतर दूनू गोटमे छनि से जिनगी भरि रहतनि तकर कोनो गारंटी हमरा लग नै अछि।

तँ आउ आब पोथीक भूमिकापर—
चूँकि व्याकरणपर हमरा नै जेबाक अछि तँ देखू भ्रमरजीक किछु बिंदु--

1) भ्रमरजी अपन भूमिकामे लिखै छथि जे " हमरा एखनो धरि पना नै अछि, हम कतेक गजल लिखने छी। साढ़े चारि दशकक साहित्यिक यात्रामे कतेको गजल लिखाएल हएत...."
यौजी सरकार, जखन अहाँकेँ अपने गजलक संख्याक बारेमे नै बूझल अछि तखन घर-आँगन, स'र-समाज, देश-विदेशक आँकड़ाक संबंधमे अहाँकेँ की बूझल हएत। भ्रमरजीक उपरोक्त कथन मात्र दंभ भरबाक लेल अछि। मनुख मात्र सभ चीजक हिसाब-किताब रखैए। भ्रमरजी सेहो रखने हेता मुदा हिनका तँ अपना-आपकेँ सुपरमैन कहेबाक छनि तँ लगा देलखिन अज्ञात संख्याकेँ जोर जे हमरा अपन गजल संख्या तँ पते नै अछि मने एते लिखलहुँ जे.......................

मोन पाड़ू आइसँ 30 बर्ख पहिने धरि जड़ल जुन्ना सन ऐंठल दू-चारि बिग्घा खेत बला सभ सेहो कहै छलै जे हमरा तँ अपन खेतो ठीकसँ नै देखल अछि। मिला लिअ भ्रमरजीक विचार।

2) भ्रमर जी फेर ओहीमे लिखै छथि जे " एहि बीच हमरा मोनमे आएल जे गजल जे काव्यविधामे बेछप रूपें रहेत अछि.............."
यौजी सरकार की ब्रम्ह बाबा रातिमे अहाँकेँ सपना देला जे उठ बच्चा काव्य गगनमे गजले टा बेछप विधा छै। आ जँ सत्ते सपना आएल तँ पहिने किएक ने आएल।

ऐ पोथीमे सभसँ आपत्तिजनक बात ई अछि जे प्रस्तुत पोथीमे "बाल-गजल" तँ संकलित अछि मुदा बाल गजलक संदर्भमे कोनो चर्चा नै बेटैत अछि। ज्ञात हो कि मात्र 2012सँ मैथिली बाल गजल शब्दावली प्रचलित अछि। अनचिन्हार आखर ओ विदेहक संयुक्त प्रयासक प्रतिफलन अछि ई बाल गजल मुदा भ्रमर जी बाल गजलक संबंधमे कोनो चरचा नै केने छथि। जेना चरचा केलासँ छोट भ' जेता तेना। ओनाहुतो हम ऐ प्रसंगकेँ अनचिन्हार आखर ओ विदेहक लोकप्रियतासँ जोड़ि क' देखैत छी। ओना भ्रमरजी प्रस्तुत पोथीक बाल गजलकेँ तेना सेट केने छथि भूमिकाक संदर्भमे जेना बुझाइत हो जे ओ मिथिला-मिहिरेक जमानासँ बाल गजल लिखैत होथि।
इतिहासकेँ भ्रमित करैत ई पोथी केक सफल हएत से कहब मोश्किल। हँ एतेक कहब कोनो मोश्किल नै जे ई पोथी मात्र राजेन्द्र विमलजीक प्रतिद्वंदितामे निकलल अछि। आ मात्र ऐ दुआरे जे नेपालमे विमल जीक बाद हमरे नाम हुअए। ओना हमरा ई कहबामे कोनो दिक्कत नै जे विमलजीक पोथी नीक छनि भ्रमरजीक अपेक्षामे।

जे पाठककेँ ई पोथी पढ़बाक इच्छा हो से ऐ लिंकपर आबि क' पढ़ि सकैत छथि-- https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/Bhramar_Gajal.pdf?attredirects=0&d=1

तकरा बाद भ्रमरजीकेँ साहसकेँ धन्यवाद दिऔन कारण ओ स्वयं ऐ पोथीक पी.डी.एफ उपल्बध करेने छथि।


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों