Tuesday, 13 September 2011

गजलक संक्षिप्त परिचय भाग-18

खण्ड-18

असमान बहर -- एहि खण्डमे कुल 213 गोट बहर अछि मुदा मात्र 13 टा प्रचलित अछि। एकरा हम असमान बहर एहि द्वारे कहैत छिऐक जे एहिमे हरेक पाँतिमे कमसँ-कम अनिवार्य रुपसँ तीनटा ध्वनिके समान रुपमे प्रयोग करए पड़ैत छैक। ऐ वर्गक बहर लेल जे अनिवार्य तीन टा रुक्न छै सएह टा देबै तँ नीक रहत कारण दू बेर देबै तँ छह टा हएत आ एनाहिते बढ़ैत रहत जे अनुपयुक्त हएत। आ एहि खण्डक आर अन्य बहर लेल एहने सन बूझू। एकर विवरण निच्चा देल जा रहल अछि--

ऐ असमान बहरक दू भागकेँ हमरा लोकनि देखी। पहिल भाग ओ भेल जाहिमे तीनटा अलग-अलग रुक्नकेँ एक पाँतिमे एक बेरमे प्रयोग कए जाइत छै। आ दोसर भाग ओ भेल जाहिमे दूटा एक समान रुक्न आ एकटा दोसर रुक्न लेल जाइत छै। तँ पहिने देखी ओ बहर जाहिमे तीनटा अलग-अलग रुक्नकेँ एक पाँतिमे एक बेरमे प्रयोग कए जाइत छै--

1) फऊलुन + फाइलुन + फाइलातुन ( एकर दूटा आर रूप हेतै)
a) फाइलुन + फाइलातुन+फऊलुन
b) फाइलातुन + फऊलुन + फाइलुन
एनाहिते निच्चो बला सभक दू-दूटा आर रूप हेतै। कुल मिला ऐ खण्डमे 45 टा बहर प्राप्त भेल।
2) फऊलुन + मफाईलुन + मुस्तफइलुन
3) फऊलुन + मुफाइलतुन + मुतफाइलुन
4) फाइलुन + फाइलातुन + मफाईलुन
5) फाइलुन + मुस्तफइलुन + मुफाइलतुन
6) फाइलुन + मुतफाइलुन + मफऊलातु
7) फाइलातुन + मफाईलुन + मुस्तफइलुन
8) फाइलातुन + मुफाइलतुन + मुतफाइलुन
9) मफाईलुन + मुस्तफइलुन + मुफाइलतुन
10) मफाईलुन + मुतफाइलुन + मफऊलातु
11) मुस्तफइलुन + मुफाइलतुन + मुतफाइलुन
12) मुफाइलतुन + मुतफाइलुन + मफऊलातु
13) मफऊलातु + मुतफाइलुन + मुफाइलतुन
14) मफऊलातु + मुस्तफइलुन + मफाईलुन
15) मफऊलातु + फाइलातुन + फाइलुन
आब आबी दोसर भागमे जाहिमे दूटा एक समान रुक्न आ एकटा दोसर रुक्न लेल जाइत छै...........
हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकर तीन रूप हेतै )
फाइलातुन+ फाइलातुन+ मफाईलुन ( मने--दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ+ दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ+ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ)
मफाईलुन+फाइलातुन+ फाइलातुन
फाइलातुन+मफाईलुन+फाइलातुन
) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै )
मफाईलुन+ मफाईलुन+फाइलातुन
फाइलातुन+मफाईलुन+ मफाईलुन
मफाईलुन+फाइलातुन+मफाईलुन
) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
फाइलातुन+ फाइलातुन+ मुस्तफइलुन
मुस्तफइलुन+फाइलातुन+ फाइलातुन
फाइलातुन+ मुस्तफइलुन+फाइलातुन
) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मुस्तफइलुन +मुस्तफइलुन + फाइलातुन
फाइलातुन+मुस्तफइलुन +मुस्तफइलुन
मुस्तफइलुन +फाइलातुन+मुस्तफइलुन
) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
फाइलातुन +फाइलातुन + मुफाइलतुन
मुफाइलतुन+फाइलातुन +फाइलातुन
फाइलातुन +मुफाइलतुन+ फाइलातुन
) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मुफाइलतुन+ मुफाइलतुन+फाइलातुन
फाइलातुन +मुफाइलतुन+ मुफाइलतुन
मुफाइलतुन+ फाइलातुन+मुफाइलतुन
) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
फाइलातुन+ फाइलातुन+मुतफाइलुन
मुतफाइलुन +फाइलातुन+ फाइलातुन
फाइलातुन+ मुतफाइलुन+फाइलातुन
) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मुतफाइलुन +मुतफाइलुन + फाइलातुन
फाइलातुन+मुतफाइलुन +मुतफाइलुन
मुतफाइलुन +फाइलातुन+मुतफाइलुन
) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
फाइलातुन+ फाइलातुन+मफऊलात
मफऊलात +फाइलातुन+ फाइलातुन
फाइलातुन+ मफऊलात +फाइलातुन
) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मफऊलात +मफऊलात + फाइलातुन
फाइलातुन+मफऊलात +मफऊलात
मफऊलात +फाइलातुन+मफऊलात
अं) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
मफाईलुन +मफाईलुन + मुस्तफइलुन
मुस्तफइलुन+मफाईलुन +मफाईलुन
मफाईलुन +मफाईलुन+मफाईलुन
अः) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाईलुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मुस्तफइलुन+ मुस्तफइलुन+ मुफाईलुन
मुफाईलुन+मुस्तफइलुन+ मुस्तफइलुन
मुस्तफइलुन+मुफाईलुन+ मुस्तफइलुन
) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
मफाईलुन+ मफाईलुन+ मुफाइलतुन
मुफाइलतुन+मफाईलुन+ मफाईलुन
मफाईलुन+ मुफाइलतुन + मफाईलुन
) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मुफाइलतुन +मुफाइलतुन +मफाईलुन
मफाईलुन +मुफाइलतुन +मुफाइलतुन
मुफाइलतुन +मफाईलुन+मुफाइलतुन

आब आगूक हरेक वर्ग लेल एनाहिते तीन-तीनटा बहर बनैत रहत। हम समयक अबाभकेँ कारणै नै दए रहल छी। अहाँ सभ समय-समय पर एकरा बनबैत रहब। आब ऐठाम देखू जे कुल मिला कए ऐ विवरणमे 56 टा वर्ग अछि आ हरेक वर्गमे तीन-तीन टा बहर अछि मने ऐ खण्डमे कुल 168 टा बहर भेल--
) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग( एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ढ़) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर एक बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर एक बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
क्ष) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
त्र) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ज्ञ) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
लृ) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
कृ) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
खृ) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
गृ) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
घृ) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
चृ) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
छृ) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

मुदा ऐ 213 बहरमेसँ मात्र तेरहे टा बहु-प्रचलित छै। आ बाद बाँकी केर उपयोग मुजाइफ रूपमे होइत छै। आब अहाँ सभ जरूर कहब जे जखन मात्र तेरहे टा बहर प्रचलित छै तखन एतेक देबाक कोन काज। मुदा बेसी प्रचलित नै हेबाक मतलब ई नै छै जे ई गलत छै। वस्तुतः बहरक प्रयोग अभ्यास पर निर्भर छै आ हरेक शाइर अपना हिसाबसँ बहरक चुनाब करैत छथि। भए सकैए जे जाहि बहरकेँ अरबी जीह पर कठिनाह लागल हो से मैथिलीमे सहज लागए तँए ई सभ देल गेल अछि। ऐठाम ई कहब कोनो बेजाए नै जे किछु बहर जे अरबीमे प्रचलित अछि से फारसीमे नै आ जे फारसीमे प्रचलित अछि से उर्दूमे नै। तँए हम ई पूरा-पूरी सूची देलहुँ। तँ देखी ई तेरह टा बहुप्रचलित बहर आ ओकर नामकेँ। ई तेरहटा बहर एना अछि---
) बहरे खफीफ--एकर मूल ध्वनि छैक "फाइलातुन+मुस्तफइलुन+फाइलातुन"। एकर ढ़ाँचा छैक--
2122 + 2212 + 2122
देखू ई उदाहरण जे की बाल मुकुन्द जी द्वारा कहल गेल गजल अछि-

गजल

आँखि सूतल छै मोन जागल कियै छै
गाछ सूखल छै पात लागल कियै छै

भटकि रहलौँ हम नौकरी लेल जुग मेँ
भाग फूटल छै आस लागल कियै छै

प्रेम मेँ हुनकर टूटि गेलै करेजा
शांत मन तैयोँ आगि लागल कियै छै

गाम रहि रहि केँ याद आबैत रहतै
मोन विचलित छै फेर भागल कियै छै

अपन पीड़ा बेसी बुझाएत तैयोँ
शीश काटल छै देह लागल कियै छै

राति दिन ई सोचैत बाजै मुकुन्दा
नाम ई ओकर आब पागल कियै छै

बहरे  खफीफ ,मात्रा क्रम 2122+2212+2122

) बहरे जदीद एकर मूल ध्वनि छैक "फाइलातुन+फाइलातुन+मुस्तफइलुन"। एकर ढ़ाँचा छैक--
2122 + 2122 + 2212
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे जदीदमे अछि--


चादरो फाटल सड़ल बड उठबै कखन
बाढ़ि एलै भासलै घर बनतै कखन

कोन कोना नाह भेटत मजधार मे
राति दिनकर दिन कऽ चन्ना बूझै कखन

चोरि भेलै चैन आ चाहो के अमल
देह टूटै दोष अनका देबै कखन

डाँग लागै दैब के अधगेरे जखन
पानि मानव एक बूँदो माँगै कखन

बेचबै बेटा जँ जिनगी बचतै तखन
अमित कह ने पानि सगरो घटतै कखन

फाइलातुन+फाइलातुन+मुस्तफइलुन
2122 + 2122 + 2212 एक बेर सब पाँति मे (बहरे जदीद)
) बहरे सरीअ एकर मूल ध्वनि छैक " मुस्तफइलुन+मुस्तफइलुन+मफऊलात" । एकर ढ़ाँचा छैक--
2212 + 2212 + 2221
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे सरीअमे अछि--

भेटल अहाँके संग हमरा जहियेसँ
जिनगी हमर लेलक करोटो तहियेसँ

हम एकरा की कहब छल एहन भाग
बैसल छलौँ हम बाटमे दुपहरियेसँ

गेलौँ शिखरपर भेल जे एगो स्पर्श
जुड़ि गेल श्वास प्राण संगे तहियेसँ

छी ग्यानके पेटी अहाँ जादू गजल
शाइरक कोनो कलम लागै हँसियेसँ

हम भेल नतमस्तक लिखब कोना शब्द
शाइर अमित छी संग हमरा जहियेसँ

मुस्तफइलुन+मुस्फइलुन+मफऊलात
(2212 + 2212 + 2221) बहरे सरीअ

) बहरे करीब एकर मूल ध्वनि छैक " मफाईलुन+मफाईलुन+फाइलातुन"। एकर ढ़ाँचा छैक--
1222 + 1222 + 2122
देखू बाल मुकुन्द पाठक द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे करीबमे अछि--

बिना दागक हमर छल ई चान सन मुँह
कुकर्मी नोचि लेलक मिल राण सन मुँह

कि सपना देखलौँ आ लुटि गेल जिनगी
घटल एहन बनल देखूँ आन सन मुँह

रमल रहियै अपन धुनमेँ आ कि एलै
चिबा गेलै हमर सुन्नर पान सन मुँह

बनल नै स्त्री समाजक उपभोग चलते
किए तैयो मनुख नोचै चान सन मुँह

हमर सभ लूटि गेलै ईज्जत व चामोँ
कि करबै जी कऽ लेने छुछुआन सन मुँह

बहरे करीब मने "मफाईलुन+मफाईलुन+फाइलातुन"
मात्रा क्रम 1222 + 1222 + 2122 बहरेकरीब
) बहरे मुशाकिल-- एकर मूल ध्वनि छैक " फाइलातुन+मफाईलुन+मफाईलुन । एकर ढ़ाँचा छैक--
2122 + 1222 + 1222
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे मुशाकिलमे अछि--

हमर नेहक सजा जिनगी जड़ा देलक
गीत दर्दक बना जिनगी कना देलक

छै अनचिन्हार अपने नाम एखन यौ
खेल झूठक जमा जिनगी हरा देलक

नोर बहतै तऽ हमरे पर हँसत दुनियाँ
कसम झूठे गना जिनगी लिखा देलक

जहर के प्रेम मे खूनो जहर भेलै
दाँत विरहक गड़ा जिनगी विषा देलक

गाम उजड़ल शहर कानल हँसल जतऽ ओ
भवर एहन फँसा जिनगी बझा देलक

नै मवाली अहाँ हमरा कहू देखिकऽ
नेह पागल बना जिनगी डरा देलक

जीब कोना बचल जिनगी कहू एखन
अमित मौतसँ सटा जिनगी मुआ देलक

फाइलातुन+मफाईलुन+मफाईलुन (2122 + 1222 + 1222) बहरे मुशाकिल

) बहरे कलीब एकर मूल ध्वनि छैक "फाइलातुन+फाइलातुन+मफाईलुन" । एकर ढ़ाँचा छैक--
2122+ 2122 +1222
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे कलीबमे अछि--

युग विज्ञानक शोध एखन कऽ देखै छी
अपन मन परबोध एखन कऽ देखै छी

रहत जगमे अमर मानव मरत दानव
नव मशीनक रोध एखन कऽ देखै छी

भाग बनतै मात्र दस खा कऽ रसगुल्ला
शक्ति के हम बोध एखन कऽ देखै छी

सत्त सी ओ टू बनल झूठ आँक्सीजन
कार्बनक अबरोध एखन कऽ देखै छी

डाहि हम संस्कार संस्कृति मुस्कै छी
मान लेल क्रोध एखन कऽ देखै छी

देश चलबै छी तऽ सब राज के देखू
जोड़ि कर अनुरोध एखन कऽ देखै छी

बहरे कलीब

) बहरे असम एकर मूल ध्वनि छैक फाइलातुन+ मफाईलुन +फाइलातुन । एकर ढ़ाँचा छैक-
2122+ 1222 +2122
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे असममे अछि--

आब आगिक पता पुछतै पानि ऐठाँ
नै जड़त यौ कतौ घर लिअ जानि ऐठाँ

कखन धरि लोक जड़तै चुप जानवर बनि
तोड़बै जउर से लेतै ठानि ऐठाँ

छै दहेजो तऽ महगाई कम कहाँ छै
ओझरी सोझरेतै लिअ मानि ऐठाँ

बदलतै समय सगरो नवका जमाना
नै जँ बदलत तऽ ओ मरतै कानि ऐठाँ

जे जनम देलकै हुनका बिसरलै सब
माँथ पर जनकके रखतै फानि ऐठाँ

भाइ मे उठमबजड़ा नै आब हेतै
आइ तऽ स्वर्ग के देबै आनि ऐठाँ

आगि पर पानि नेहक हँसि ढ़ारि दिअ ने
अमित सब के मिला सुख लिअ सानि ऐठाँ

फाइलातुन+मफाईलुन+फाइलातुन
(2122+ 1222 +2122) बहरे असम
) बहरे कबीर एकर मूल ध्वनि छैक मफऊलातु+ मफऊलातु +मुस्तफइलुन। एकर ढ़ाँचा छैक--
2221 +2221+ 2212
देखू पंकज चौधरी "नवलश्री द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे कबीरमे अछि--

एलै घोर कलयुग हरत अन्हार के
सभटा बदलि गेलै नियम संसारकें

पछ्बा रीत अबिते भेल सभकिछु खतम
चरित्र के हनन आ पतन संस्कारकें

साहित्येसँ छै शोभा समाजक अपन
साहित्यक तऽ काजे सृजन शृंगारकें

बिलटत सभ कला सेहो कलाकार सन
भेटत मान जाधरि नै कलाकारकें

मायसँ मोह आ ने मातृभूमिसँ मुदा
सभ बैसल करू गप अपन अधिकारकें

बाजब "नवल" हमहूँ बेर एतै जहन
सय सोनारकें आ एक लोहारकें

मफऊलातु+मफऊलातु+मुस्तफइलुन ( दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व+ दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व +दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ सँ बनल बहरे कबीर )
) बहरे सगीर एकर मूल ध्वनि छैक मुस्तफइलुन +फाइलातुन +मुस्तफइलुन। एकर ढ़ाँचा छैक
 2212+ 2122+ 2212
) बहरे सरीम एकर मूल ध्वनि छैक मफाईलुन +फाइलातुन +फाइलातुन । एकर ढ़ाँचा छैक---
1222 + 2122 + 2122
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे सरीममे अछि--


किए एखन मोन हमर शाइर बनल छै
लिखल जेकर नाम ओ एखन कटल छै

बनाबी हम रूप जे शब्दक नगरमे
नगर ओकर नैनके लागै जहल छै

गजल जेहन हम लिखै सबदिन छलौँ से
कहाँ हमरा मोनमे ओहन गजल छै

दिनक काटै रौद रातिक चान धधकै
बहर मारै जान पथ काँटक बनल छै

कखन हारब जीवनक अनमोल पारी
अमित जा धरि छी करै शेरक कहल छै

मफाईलुन+फइलातुन+फइलातुन (बहरे सरीम)

) बहरे सलीम एकर मूल ध्वनि छैक  "मुस्तफइलुन +मफऊलातु+मफऊलातु"। एकर ढ़ाँचा छैक---
2212 + 2221 + 2221
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे सलीममे अछि--

खिड़कीसँ सीधे देखै छलौँ हम चान
घन तिमिर मोनक छाँटै छलौँ हम चान

हेतै अपन फेरो भेँट ओतै जा कऽ
तेँ जागि आशा लगबै छलौँ हम चान

दिन भरि समाजक पहरा कतेको नयन
छवि संग तोहर भटकै छलौँ हम चान

लागै तरेगण लोचन पलक झपकैत
बनि मेघ घोघट लागै छलौँ हम चान

शुभ राति फेरो भेटब अमिय नेहक लऽ
सब दिन अमित नव आबै छलौँ हम चान

मुस्तफइलुन+मफऊलातु+मफऊलातु
{दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व} बहरे सलीम
)बहरे हमीद एकर मूल ध्वनि छैक "मफऊलातु+मुस्तफइलुन+मफऊलातु"। एकर ढ़ाँचा छैक--
2221 + 2212 + 2221
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे हमीदमे अछि--

नै जीयत शराबक नशा लागल लोक
कोना हँसत कोनो दुखक खेहारल लोक


काठी फेकबै आगि उठतै बोतलसँ
नै रहतै जवानी अपन जाड़ल लोक


के कानत कतौ आन लेए कऽह एतऽ
नै छै समय ककरो अपन भागल लोक

दै छै साँस कखनो अपन धोखा आब
एहन नेहमे छै किए पागल लोक

जड़तै एक दोसर सँ जिनगी मे जखन
कटतै घेँट अपने सबर हारल लोक

क्षण भरि के नवल दोस्त नै चाही आब
हमरा अमित चाही अपन झाड़ल लोक

मफऊलातु+मुस्तफइलुन+मफऊलातु (बहरे हमीद)

) बहरे हमीम एकर मूल ध्वनि छैक "फाइलातुन+ मुस्तफइलुन+ मुस्तफइलुन" ।एकर ढ़ाँचा छैक--
2122 + 2212 + 2212
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे हमीममे अछि--

आइ नौला* मे माछ चल मारब कने
जाल मच्छरदानी वला फेकब कने

बहुत टिकुला छै खसल गाछी भरल छै
ओकरो झोरी भरि कऽ चल आनब कने

माछ चटनी खाएब रोटी भात रौ
डोलपाती चल संग मे खेलब कने

छोट बौआ छी पैघ सन छै सोच रौ
आब कखनो संसार नै बाँटब कने

एक छी हम सब एक थारी मे रहब
अमित नवका मिथिला अपन माँगब कने

फाइलातुन+मुस्तफइलुन+मुस्तफइलुन (बहरे हमीम)

ऐकेँ अतिरिक्त केओ चारि-चारिटा रुक्नक समूह सेहो बना सकैत छथि। मुदा ऐठाम ई मोन राखू जे गजल पूरा-पूरी उच्चारण आ संगीतक नियम पर आधारित छै तँए बड़का-बड़का पाँति गेबामे नै बनतै तँए ई चारि आ ओहिसँ बेसी रुक्न बला गजलक सफलता बहुत कम्म भेटतै। आ जखन देखिए रहल छिऐ जे जखन 213 मे टा मात्र तेरहे टा प्रचलित छै जे की तीन रुक्नक समूह थिक। तखन चारि आ ओहिसँ बेसी बलाक सफलता कतेक हेतै से अंदाजा लगा सकैत छी अहाँ।
ऐठाम ई स्पष्ट करब जरूरी अछि जे खाली अरबी बहरपर लिखब अभीष्ट नै। वर्णवृतक कोनो मात्राक्रम हो आ सही रदीफ काफिया केर प्रयोग भेल हो तँ ओ गजल भेल। उपरका बहर सभ अरबी-फारसी-उर्दूमे प्रचलित अछि। मैथिलीमे कोन ढ़ाँचा (उच्चारण आ संगीतक हिसाबें) फिट बैसत तकर निर्धारण अगामी 100-150 बर्खमे हएत। तँए जे ढ़ाँचा वर्णवृतक हो से उपयोग करू। तँ किछु एहन गजल देखू जे की अन्य मात्राक्रमपर अछि। आ ई सभ उदहारण राजीव रंजन मिश्र जीक छन्हि---
1

एक झोंका पवनकेँ गुजरि गेल देखू
मोन मारल सिनेहक सिहरि गेल देखू

कान सुनलक जँ किछुओ हुनक बोल नेहक
सोह बिसरल उचाटे नमरि गेल देखू

चानकेँ आसमे छल चकोरक नजरि धरि
राति कारी अमावस पसरि गेल देखू

के बुझत बात डाहल हदासल हियाकें
गाछ रोपल सवाँरल झखरि गेल देखू

बाट जोहब सदति बस बनल भाग टा तैं
नोर राजीव नैनक टघरि गेल देखू

2122 122 1221 22

2

हियक अहलादकेँ फुसियाएब मोसकिल छल
सुनल सभ बातकेँ बिसराएब मोसकिल छल

उगल छल चान जे पूनमकेर रातिमे ओ
तकर मारल हियक सरियाएब मोसकिल छल

सलटि लेलहुँ जगतकेँ सहजेसँ नित मुदा बस
बढल अनुरागकेँ अनठाएब मोसकिल छल

गुलाबक फूलसन जगती खुब बिहुँसलए धरि
भरल मधुमासमे मुसकाएब मोसकिल छल

बड़ा राजीव छल ललसा दौग मारएकेँ
झटकि धरि डेग नित चलि पाएब मोसकिल छल

122 212 2221 2122

3

बस मान खातिर नै बजबाक चाही कखनो
हिय तोड़ि लोकक नै चलबाक चाही कखनो

बाजब तऽ बाजू छाती ठोकि सत टा सदिखन
बेकार फुइसक नै हकबाक चाही कखनो

जे बेश हल्लुक बुझना गेल देखति माँतर
से बाट चटदनि नै धरबाक चाही कखनो

नै ऊक बिनु फूकक छजलै गऽ ककरो से बुझि
बुधि ज्ञान सहजे नै तजबाक चाही कखनो

राजीव अलगे करमक धाह आ चमकी तैं
कुटिचालि कथमपि नै रचबाक चाही कखनो

221 222 221 2222

4

जिनगी जीबाक नाम रहल सभदिन
नुनगर सेकल बदाम रहल सभदिन


बेसी फटिया कऽ मोन चढ़ा भखने
लोकक दरजा तऽ आम रहल सभदिन

चारि आखर सिनेहक बले देखल
भरिगर सुधिगर तमाम रहल सभदिन

सुख दुख सहबाक नाम कलाकारी
भागक तखने सलाम रहल सभदिन

के कहलक जे सुरा तऽ रमनगर छै
मारुक जोहक तऽ जाम रहल सभदिन

मानब राजीव बात सदति ठोकल
करनी टाकेँ तऽ दाम रहल सभदिन

2222 121 1222

राजीव जीक ऐ चारू गजलसँ अहाँ सभकेँ ई अनुमान लागि गेल हएत जे जँ अरबी मे मान्य ढ़ाँचा नहियो ल कऽ आन वर्णवृतक ढ़ाँचामे गजल संभव छै। आ हम फेर कहब जे ई निर्णय भविष्यमे हेतै जे कोन ढाँचा नीक आ कोन नै नीक।

ऐठाम आब कने रुकि कऽ मैथिलीमे बाल गजल आ भक्ति गजलक दर्शन कऽ ली। पहिने तीन टा भक्ति गजल दऽ रहल छी आ तकर बाद तीन टा बाल गजल---

ई जगदानंद झा "मनु"जीक भक्ति गजल अछि---


नै अहाँ केर बिसरी नाम हे भगवन
होइ कखनो अहाँ नै बाम हे भगवन

सुख कि भेटे  दुखे जीवनक रस्तापर
संगमे रहथि सदिखन राम हे भगवन

हम बनेलौं सिया मंदिर अपन मनकेँ
आब कतए अहाँकेँ ठाम  हे भगवन

आन नै आश कोनो बचल जीवनकेँ
अपन दर्शनक टा दिअ दाम हे भगवन

मनु अहाँकेँ करैए जोड़ि कल विनती
तोड़ि फेरसँ तँ अबियौ खाम्ह हे भगवन

(बहरे मुशाकिल, मात्रा कर्म – 2122+1222+1222)

आब अमित मिश्रजीक लिखल ई भक्ति गजल देखू--


आइ नाँचल मधुवन झूमि राधा संग
प्रेममे नाँचल गोपी तँ कान्हा संग

खा कऽ मक्खन खेलथि खेल नटखट चोर
साँझ धरि जंगलमे रहि कऽ मीता संग

नाथि देलनि नागक नाँक यमुना जा कऽ
माँथपर चढ़ि केलनि नाँच यमुना संग

फोड़ि देलनि चूड़ी तोड़ि देलनि हार
जखन रचलनि मोनक रास राधा संग

गायपर बैसल बजबैथ वंशी मधुर
कान्हपर चढ़ि घूमथि गाम बाबा संग

फाइलातुन+मफऊलातु+मफऊलातु
2122+2221+2221

आ अंतमे राजीव रंजन मिश्रजीक लिखल ई भक्ति गजल देखू—


जन्म लेला माधव कि गाबू बधैय्या
आबि गेला मोहन मुरारी कन्हैय्या

नन्द बाबा पुलकित यशोदा निछावर
मोहि रहलै बिहुँसब अठन्नी रुपैय्या

सोनाकेँ पलनामे झुलै झूला ललना
ठोप कारी रहि रहि लगाबै छै मैय्या

देखि लीला अजगुत अचंभामे नारद
नाचि रहला शंकर मगन ता ता थैय्या

नंदलाला राजीवकेँ बड सुखकारी
तीन लोकक मालिक जगतकेँ खेवैय्या

212222122222

भक्ति गजल देखलाक बाद बाल गजल देखू---

पहिने पंकज चौधरी नवल श्रीजीक ई बाल गजल देखू---

दू टा बस सोहारी चाही
माँ कम्मे तरकारी चाही

पुरना छिपलीमे नै खेबौ
हमरो नवका थारी चाही

हमहूँ जेबै इसकुल बाबू
पूरा सभ तैयारी चाही

हाटसँ आनू पोथीबस्ता
मौजाजूता कारी चाही

इसकूलक जलखैमे हलुआ
पूरी आ तरकारी चाही

छीटब बीया गाछो रोपब
आँगन लग फुलवारी चाही

"नवल"सँ नै हम लट्टू माँगब
हमरो कठही गाड़ी चाही

 मात्रा क्रम : आठ टा दीर्घ सभ पांतिमे  

आब मिहिर झाजीक ई बाल गजल देखू-

माय तरेगन तोडि दे   
भानस बासन छोडि दे
 
खिस्सा राजा भोज के
कहिके घूरो कोडि दे

खेबौ दाना फोँक नै
मूँगफली तूँ फोडि दे

छूछे चूडा पात पर
दहियो कनिये पोडि दे

टूटल घोडा टाँग गै
माटि लगा के जोडि दे

2222212

आ अंतमे कुन्दन कुमार कर्णजीक ई बाल गजल देखू--

पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ
आगू बढबै अपने ठोस आंटसँ

संस्कृति अप्पन कहियो छोडब नै
अलगे रहबै कूसंगत कऽ लाटसँ

फुलिते रहबै सदिखन फूल बनि नित
डेरेबै नै कोनो चोख कांटसँ

हिम्मत जिनगीमे हेतैक नै कम
चलबै आगू बाधा केर टाटसँ

बच्चा बुझि मानू कमजोर नै यौ
चमकेबै मिथिलाकेँ नाम ठाटसँ

मात्राक्रम: 2222222122

आशा अछि जे बाल ओ भक्ति गजलक संदर्भमे किछु बुझबामे आएल हएत।

मुजाइफ बहर
तँ आउ आब देखी मुजाइफ बहरकेँ। मुजाइफ बहरसँ पहिने एकरा दोबारा देखू--                                                                                                                                              कोनो शेरक दूनू पाँतिकेँ छह खण्डमे बाँटल जाइत छै--
a) सदर-- पहिल पाँतिक पहिल खण्डकेँ सदर कहल जाइत छै। मने पहिल पाँतिक शुरूआत सदर भेल।

b) हश्व-- सदर केर बाद बला खण्डकेँ हश्व कहल जाइत छै। हश्व मने विकास, वस्तुतः पाँतिमे निहित भावनाक विकास एही खण्डमे होइत छै।

c) अरूज-- पहिल पाँतिक अन्तिम खण्डकेँ अरूज कहल जाइत छैक। अरुज मने उत्कर्ष, वस्तुतः भावनाक उत्कर्ष एही खण्डमे हइत छै।

d) इब्तदा-- शेरक दोसर पाँतिक पहिल खण्डकेँ इब्तदा कहल जाइत छै। इब्तदा मने सेहो प्रारंभे होइत छै मुदा सदर आ इब्तदा दुन्नूमे ई अंतर छै जे सदर कोनो विचार भए सकैए मुदा सदरक समर्थनमे आएल प्रारंभकेँ इब्तदा कहल जाइत छै।

e) हश्व-- दोसर पाँतिक बिचलका भागकेँ पहिनेहे जकाँ हश्व कहल जाइत छै।

f) जरब--दोसर पाँतिक अन्तिम खण्डकेँ जरब कहल जाइत छै। जरब मने अन्त।

उदारहरण लेल अमित मिश्र जीक एकटा शेर देखू--

हमर मुस्की/सँ हुनका आ/गि लागल यौ   (1222/1222/1222)
हुनक कनखी/सँ तऽरका आ/गि लागल यौ (1222/1222/1222)

हमर मुस्की-- सदर
सँ हुनका आ --हश्व
गि लागल यौ-- अरूज
हुनक कनखी-- इब्तदा
सँ तरका आ-- हश्व
गि लागल यौ--जरब

ई तँ छल तीन रुक्न बला शेर तँ मामिला फरिछा गेल मुदा कम-बेसी रुक्न बला लेल एना मोन राखू--

1) जँ शेरक हरेक पाँतिमे दूटा रुक्न छै तँ ओहिमे हश्व नै होइत छै खाली सदर, अरूज, इब्तदा आ जरब होइत छै।
2) जँ शेरक हरेक पाँतिमे तीनटा रुक्न छै तँ पूरा शेरमे दूटा हश्व हेतै आ एक-एकटा सदर, अरूज, इब्तदा आ जरब हेतै। उपरका उदाहरण तीनेटा बला रुक्न पर अछि।

3) जँ शेरक हरेक पाँतिमे चारिटा रुक्न छै तँ पूरा शेरमे चारिटा हश्व हेतै आ एक-एकटा सदर, अरूज, इब्तदा आ जरब हेतै।

4) जँ शेरक हरेक पाँतिमे पाँचटा रुक्न छै तँ पूरा शेरमे छह टा हश्व हेतै आ एक-एकटा सदर, अरूज, इब्तदा आ जरब हेतै।

5) जँ शेरक हरेक पाँतिमे छह टा रुक्न छै तँ पूरा शेरमे आठ टा हश्व हेतै आ एक-एकटा सदर, अरूज, इब्तदा आ जरब हेतै।

एतेक देखलाक बाद ई बुझना जाइत अछि जे कोनो शेरक पहिल पाँतिक पहिल रुक्न " सदर " भेल आ अंतिम रुक्न " अरुज " भेल आ बचल बीच बला रुक्नकेँ " हश्व " कहल जाइत छै। तेनाहिते कोनो शेरक दोसर शेरक पहिल रुक्नकेँ " इब्तदा " कहल जाइत छै आ अंतिम रुक्नकेँ " जरब " आ बीचमे बचल रुक्नकेँ " हश्व " कहल जाइत छै। आब एनाहिते एक पाँतिमे जतेक रुक्न हो तकरा बाँटि सकै छी।
मुदा शेरक ई बाँट बखरा मात्र वर्णवृत बलामे नै लागत। उदाहरण लेल मानू जे अहाँ  2222112121 बला मात्रा क्रम लेलहुँ। मुदा ई मात्रा क्रम किनको  लेल 222-2112-121 भऽ सकैए आ ऐमे ओ तँ किनको लेल 22-2211-2121 सेहो भऽ सकैए । आब लोक घनचक्करमे पड़ता जे ऐमे कोन तरहँसँ छह भागमे बाँटी। तँए हमर ई स्पष्ट मानब अछि जे जा धरि मैथिलीक अपन निज मात्राक्रम नै हो ताधरि ई नियम मात्र अरबी बहरमे प्रचलित मात्राक्रम जेना122+122+122 वा 2122+2122+2122 आदि सभपर लागत। सरल वार्णिक बहरमे सेहो ई नियम नै लागत। मूल रुक्नमे एकटा निश्चित नियमसँ मात्राकेँ घटा कऽ सेहो बहर बनाएल जाइत छै आ एहन बहर सभकेँ मुजाइफ बहर कहल जाइत छै। मुजाइफ बहर मात्र सालिम बहरसँ बनि सकैए। मुजाइफ बहरमे घटल रुक्न सभ ठाम नै आबि सकैए ओकर स्थान अरबी-फारसी-उर्दू गजलमे सुनिश्चित छै आ मुजाइफ रुक्न ठीक ओही स्थानपर एबाक चाही।  अरबी-फारसी-उर्दू मिला कऽ कुल 60-62 टा एहन नियम छै जाहि अधारपर मुजाइफ बहर बनाएल जाइत छै मुदा गजलमे मुख्यतः 14-15 टा नियम लागै छै। ऐ नियम सभहँक विवरण निच्चा देल जा रहल अछि (मुजाइफ बहर लेल हिंदी अंग्रेजीक कोनो पोथी मने जे की हमरा लग रेफरेन्स रूपमे अछि से एकमत नै अछि। सभ अलग-अलग फर्मूला लगेने छथि। ऐ अवस्थामे हमरा जे विश्वसनीय लागल तकरे  अधार मानलहुँ अछि ।)—
1) महजूफ--- जै अर्कानक अन्तमे दू वा ओइसँ बेसी दीर्घ रहैत छै ताहिमहँक अन्तिम दीर्घ हटा देलासँ महजूफ नामक जिहाफ बनै छै जेना
122 केर अन्तिम दीर्घ हटेलासँ 12 बचै छै
1222 केर अन्तिम दीर्घ हटेलासँ 122 बचै छै
2122 केर अन्तिम दीर्घ हटेलासँ 212 बचै छै.. आदि।
महजूफ जिहाफ शेरक अरूज आ जरब मात्रमे आबि सकैए।
एकटा उदाहरण लिअ--
1222+1222+122
1222+1222+122
ई मुजाइफ बहरक लक्षण। मानू जे आब जँ कोनो शाइर
122+1222+1222
122+1222+1222 लेता तँ अरबी-फारसी-उर्दूक हिसाबें ई मुजाइफ बहर नै हएत। कहबाक मतलब जे घटाएल रुक्न लेल जे स्थान निश्चित कएल गेल छै से वएह रहबाक चाही। मुदा मैथिलीमे हमरा जनैत एखन एहन निर्णय करब कने जल्दबाजी हएत कारण एखन मैथिली गजलक अपन बहर वा कही जे निज मात्राक्रम बनबाक प्रकियामे अछि आ तँए हमरा जनैत मैथिलीमे मुजाइफ बहरकेँ हरेक स्थानपर राखल जाए। आ जखन निज मात्रा क्रम निश्चित भए जाए तखने निश्चित स्थान बला नियम लागू कएल जाए। अर्थात
122+1222+1222
122+1222+1222
ई मात्रा क्रम मैथिलीमे मुजाइफ बहर हएत । वा 1222+122+1222 सेहो मुजाइफ बहर भऽ सकैए। आब आगू देल जा रहल हरेक मुजाइफ रुक्न लेल एहने सन बूझल जाए।
2) मख्बून--- जै अर्कानक शुरूआत दीर्घसँ हो तैमहँक पहिल दीर्घक बदलामे लघु लेलासँ मख्बून जिहाफ बनै छै। जेना
212 केर पहिल दीर्घक स्थानपर लघु लेलासँ 112
2122 केर पहिल दीर्घक स्थानपर लघु लेलासँ 1122
2212 केर पहिल दीर्घक स्थानपर लघु लेलासँ 1212 आदि।
ई जिहाफ शेरक कोनो स्थानपर लेल जा सकैए आ मैथिलीमे एहने सन रहत।
3)मतव्वी--- जै अर्कानक शुरूमे दू वा दूसँ बेसी दीर्घ हो तैमे दोसर दीर्घक स्थानपर लघु लेलाँ मतव्वी जिहाफ होइत छै। जेना
2212 केर शुरूसँ दोसर दीर्घक स्थानपर लघु लेलासँ 2112
2221 केर शुरूसँ दोसर दीर्घक स्थानपर लघु लेलासँ 2121 आदि। ई जिहाफ शेरक कोनो स्थानपर लेल जा सकैए आ मैथिलीमे एहने सन रहत।
4)मक्फूफ--- जै रुक्नक अन्तमे दीर्घ हो ओकरा हटा लघु देलासँ मक्फूफ जिहाफ बनै छै। जेना
1222 केर अन्तिम दीर्घ हटा कऽ लघु देलासँ 1221
2122 केर अन्तिम दीर्घ हटा कऽ लघु देलासँ 2121
2212 केर अन्तिम दीर्घ हटा कऽ लघु देलासँ 2211 आदि। ऐ जिहाफकेँ सदर, हश्व एवं इब्तदा ,हश्वमे स्थान निश्चित छै मुदा मैथिलीमे उपरका हिसाबें राखल जाए।
5)मारफो-- 2221 केर लघु हटा कऽ दोसर दीर्घकेँ बदलामे  लघु देलासँ मारफो जिहाफ होइ छै। जेना
2221 केर बदलामे 212। ई मात्र अरूज आ जरबमे आबि सकैए। मैथिलीमे सभ ठाम देलासँ नीक।
6)मक्तूअ---2212 केर मुजाइफ वा मारफो मुजाइफमे बीच बला लघु हटा देलासँ मक्तूअ जिहाफ होइ छै। जेना 212 केर लघु हटा देलासँ 22। ई जिहाफ शेरक कोनो स्थानपर लेल जा सकैए आ मैथिलीमे एहने सन रहत। 
7)मश्कूल--- 2212 केर पहिल आ अन्तिम दीर्घक बदलामे लघु देलासँ मश्कूल जिहाफ बनै छै। जेना
2212 केर बदलामे 1121। सदर-इब्तदा-हश्व एकर स्थान छै मुदा मैथिलीमे उपरकाँ हिसाबेँ देखू।
8)मक्बूज---जै अर्कानक अन्तमे दूटा दीर्घ हो तकर अन्तसँ पहिल दीर्घक स्थानपर लघु बना देलासँ मक्बूज जिहाफ होइत छै। तेनाहिते जै अर्कानक अन्तमे तीनटा दीर्घ हो तकर अन्तसँ दोसर दीर्घक स्थानपर लघु देलासँ मक्बूज जिहाफ होइ छै। जेना--
122 केर अन्तसँ पहिल दीर्घक बदलामे लघु देलासँ 121
1222 केर अन्तसँ दोसर दीर्घक स्थानपर लघु देलासँ 1212। ई जिहाफ शेरक कोनो स्थानपर लेल जा सकैए आ मैथिलीमे एहने सन रहत।
9)अस्लम-- 122 केर लघु हटा देलासँ अस्लम जिहाफ बनै छै। जेना 122 केर बदलामे 22। ई जिहाफ शेरक कोनो स्थानपर लेल जा सकैए आ मैथिलीमे एहने सन रहत।
10) अखरब--- 1222 केर लघु हटा कऽ अन्तिम दीर्घकेँ बदलामे लघु देलासँ अखरब बनै छै। जेना-1222 केर बदलामे 22 सदर आ इब्तदा एकर स्थान छै। मैथिलीमे उपरका हिसाबसँ देखू।
11) मन्हूर--- 2221 केर अन्तसँ 221 हटा देलासँ मन्हूर बनै छै। जेना 2221 बदलामे 2 अरूज आ जरब एकर स्थान छै। मैथिलीमे उपरका हिसाबसँ देखू।
12) अस्तर--- 1222 केर लघु हटा कऽ बिचला दीर्घक स्थानपर लघु देलासँ अस्तर बनै छै। जेना 1222 बदलामे 212। एकर स्थान अरूज आ सदर-इब्तदा-हश्व छै। मुदा मैथिलीमे उपरकाँ हिसाबसँ देखू।
13) अखरम---1222 केर लघु हटा देलासँ अखरम बनै छै। जेना 1222 बदलामे 222। एकर स्थान सदर-इब्तदा छै। मैथिलीमे उपरका हिसाबसँ देखू।
14) अबतर----122 केर 12 आ 1222 केर 122 हटा देलासँ अबतर बनै छै। मने 122 बदलामे 2 वा 1222 बदलामे 2। अरूज-जबर एकर स्थान छै मुदा मैथिलीमे सभ स्थानपर दिऔ।
ऐ जिहाफ सभहँक अलावे असरम, मुस्बबा,  मजाल,मुरफ्फल,मुख्लला,मतमूस,अजल,अश्तर, आरज आदि-आदि नाना प्रकारक जिहाफ होइ छै। मुदा बहुत रास जिहाफ गजल छोड़ि आन-आन विधामे लागै छै। जिज्ञासु आन-आन रूपें एकरा आनि सकै छथि।
ऐकेँ अलावे बहुत बेर दूटा वा तीन टा जिहाफ (दू टा बेसी बेर ) आबै छै। तकरो मुजाइफ बहर मानल जाइत छै। जेना--मक्बूज महजूफ ( 12112112112 ) आदि आर बहुत रास एहन उदहारण छै पाठक मूल अरबी-फारसी-उर्दू अरूजक पोथीसँ सहायता प्राप्त कऽ सकै छथि। ऐमे मुजाइफ केर निश्चित स्थानक हिसाबसँ राखल जाइत छै। मुदा मैथिलीमे उपरका हिसाबसँ देखू। मुजाइफ बहरक नाम सालिम वा मुरक्बबे जकाँ होत छै बस खाली जिहाफक नाम आ सालिम वा मुरक्बबक बदलामे मुजाइफ सेहो आबि जाइ छै। जेना  बहरे मुतकारिब मुसद्दस महजूफ मुजाइफ,मुतकारिब मुसम्मन मक्बूज आदि। शाइर आन नाम सभ एनाहिते बना सकै छथि।


No comments:

Post a Comment

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों