Saturday, 20 August 2011

गजल

एहने अहाँक प्रेम छल पछाति जानल हम

खाली मूहँक तँ छेमछल पछाति जानल हम


आगि लागल छै घर मे चिन्ताक गप्प नहि कोनो

कारण अपने टेम छल पछाति जानल हम


सड़ैत देखलिऐक किच्छोके कादो मे सदिखन

अपने घरक हेम छल पछाति जानल हम


कोंढ़ीके सुँघलकै आ बजरखसुआ चलि गेलै

दाइ ओ नकली भेम छल पछाति जानल हम


कानून तँ बनै छै आ टूटै छै बेर-बेर देशमे

लोके लेल नेम-टेम छल पछाति जानल हम


**** वर्ण---------18*******

2 comments:

  1. sundar gazal, 18 varnak saral varnik chhand me, "छल पछाति जानल हम" रदीफ, मुदा काफिया "म" पहिल तीन शेरमे अछि मुदा अन्तिम दू शेरमे "म्म" भऽ गेल अछि, माने गरबड़ा गेल अछि।

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  2. सुझाओ लेल आभारी छी। काफिया दुरुस्त कए देल गेल अछि।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों