Thursday, 25 August 2011

गजल

गुंगुआइत बसात चुप्प रहू

पदुराइत बसात चुप्प रहू


चारु दिस तँ पसरि गेल धुँआ

हे पझाइत बसात चुप्प रहू


अहाँक कुंठा जड़ि जमेने अछि

किकिआइत बसात चुप्प रहू


अहूँ पर हँसत केओ-कहिओ

ठिठिआइत बसात चुप्प रहू


जे भेटत अनचिन्हारे भेटत

चिचिआइत बसात चुप्प रहू


**** वर्ण---------12*******

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों