Wednesday, 24 August 2011

गजल

पतालमे जा अकास नपैत छी

डिबिआ मिझा प्रकाश तकैत छी


कागतमे लिखल कागती प्लान

घटाला कए विकास चाहैत छी


पानि सड़ि गन्हाइते रहलैक

आरिए बान्हि निकास चाहैत छी


बुड़िबक देवी कुरथी अक्षत

हम एहने विकास करैत छी


चिन्हार नहि अनचिन्हारे नीक

तँए तँ परिचय नुकबैत छी



**** वर्ण---------12*******

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों