Wednesday, 5 October 2011

गजल

कोनो सोहके केखनो नहि बिसारि राखब

मोनक गाछ केखनो नहि झखारि राखब


अबिते हएत मारिते रास कनैत आँखि

अहाँ थोड़ेक हँसी संगमे सम्हारि राखब


बहिते-बहैत बन्हा जाएब अहाँ बान्हसँ

संगमे हरदम कनिकबो जुआरि राखब


अबैत रहलाह नव-नव बिक्रमादित्य

कन्हासँ कहिआ इ बैताल उतारि राखब


नै कानू अबिते हएत रिलीफ लेने नेता

घर-दुआरि बना आँगन बहारि राखब



**** वर्ण---------16*******

No comments:

Post a Comment

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों