Saturday, 15 October 2011

गजल

धधकलै सौंसे घरक लोकवेद डिविया लुक्का भs गेलय
फेरो बेटीये भेलय सुनिते अगिलग्गिक धुक्का भs गेलय

ससुर सौस दुनु प्राणिक मुँह बिधुयैल बकोर लागल
अधकचरुस तमाकु सन धुयैन मुँह हुक्का भs गेलय

बर ओम्हर तामसेँ बताह जकाँ बौतलैल फिरै सगरे
घर मे जेना कि एखने चोरी चपाटी घरढुक्का भs गेलय

माय बाप परसौतीक गलैनक मारे कतियैल फिरैत
गरकैत फुटल फेकल खाली-पैसा वाला चुक्का भs गेलय

दर दुश्मनक करेज जुरैले तेँ ते हँस्सै-बाजै मुसकावै
मुँह लाल सिनुरिया आम डम्हकैत देखनुक्का भs गेलय

अपना बेचारी प्रसवक पीड़ो सँ बेशी मोनक बेथै मरै
मुँह फूल मौलायल वा फुलिकेँ-चुटकल फुक्का भs गेलय

’शांतिलक्ष्मी’ तेँ समाजक आचार देखि भालरि सन काँपय
कलपैत छाति पर दनदन बरसैत मुक्का भs गेलय

.........................वर्ण २२.........................

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों