Thursday, 13 October 2011

गजल

आन्खि खोलि देखू प्रकाश भ गेल
आबो जागू देखू प्रकाश भ गेल

अदौ स पडल रसातल छोडू
उपर ताकू ई आकाश भ गेल

उत्थान लेल आहांक जीजीविषा
देखू आई ओ स्वप्न आश भ गेल

लोक भेटल जीवन यात्रा मध्य
किछु लोक ओही मे ख़ास भ गेल

जागल लोक ओ समाज जागल
देखू मिथिला के विकास भ गेल

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों