Friday, 14 October 2011

गजल

मिलत जखन आन्खि से आन्खि तखन पता चलत
हिलत जखन करेज कनी तखन पता चलत

एखन त बौराई टौवाइ छी मदमस्त भेल रहू
कन्छी मुस्की जे बेधत हृदय तखन पता चलत

दियौ गप उडाउ खिल्ली अहां छी मनमत्त अबूझ
आन्खि से जखन निन्न उडत तखन पता चलत

मुस्काई छी उधियाय छी त अबढन्ग बनल रहू
अधर से जे अधर मिलत तखन पता चलत

बिसरब दुनिया ओ भज़ार ई ठीक सत्य वचन
जखन होएत वाक हरण तखन पता चलत

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों