Wednesday, 12 December 2012

गजल

गजल

करेजा ओकरो बड कानले हेतै 
जँ सपना अपन हाथसँ तोड़ने हेतै

पड़ल जानपर धर्मो सब बिसरऽ पड़तै 
सही कम फूसि बहुते बाजने हेतै

जँ भोरक शीत कारी रूपकेँ धरतै
सड़कपर रौद्र घटना उचरले हेतै

कहै छै मूर्ख जकरा लोक जग भरिकेँ
उहो किछु किछु भविष्यक सोचने हेतै

अपन लघु रोजगारे टा बचल साधन
कते शिक्षित नगरमे भटकले हेतै

कला जीबाक बड गामक पढ़ू जिनगी*
बिसाढ़सँ "अमित" जिनगी भेटले हेतै

मफाईलुन
1222 तीन बेर
बहरे-हजज
*गामक जिनगी(साहित्यकार जगदीश प्रसाद मण्डलक लघु कथा संग्रह)

अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों