Tuesday, 25 December 2012

मैथिलीक युवा तुर्कक पोथी (बहर युक्त गजल संग्रह सहित)- "हम पुछैत छी", "अनचिन्हार आखर", "निश्तुकी", "अर्चिस", "वर्णित रस", "मोनक बात", "नव अंशु"

5 comments:

  1. ki arbi mey samdaun, udasi, sohar, batgabni, chhamaasa aadi likhal jaa sakait achhi?

    jau nahi ta maithili mey ghazal kona sambhav achhi.

    aasha achhi javaab avasya deb .

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    1. अनका लेल तँ गजल सम्भव होइ कि नै अहाँ लेल तँ आरामसँ सम्भव अछि रोशन कुमार झा (नामी चोर आ लेखक "राड़केँ सुख बलाय) जी, अनकर मैथिली गजल अपना नामसँ पोस्ट क' दियौ भ' गेल अहाँ लेल सम्भव।

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  2. अनका लेल तँ गजल सम्भव होइ कि नै अहाँ लेल तँ आरामसँ सम्भव अछि रोशन कुमार झा (नामी चोर आ लेखक "राड़केँ सुख बलाय) जी, अनकर मैथिली गजल अपना नामसँ पोस्ट क' दियौ भ' गेल अहाँ लेल सम्भव।

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  3. Ki aha saabit ka sakai chhi je ham kinko rachna va lekh chora apna naam sa chhaplahu achhi?

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  4. Hammra bujhal chhal je hamar savaalak javaab aha lag hoyat takhan ne aha deb.
    Ja ahi annjaan chhi ta hamra ki gyyan deb .

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों