Saturday, 10 December 2011

गजल


देस फँसल अछि घोटाला आ केसमे
दारू पीबि मस्त गुंडा नेता क भेषमे

पाँच बरख बहुत छै राजा बनै ले
डाँढ अहींक तॊडत अहां क देश मे

"महगी छैक ज़रूरी" दैथ ओ भाषण
सोना के जमा करत आब विदेश मे

मनुख त मरि गेल देशक लूट मे
की अहां आब तकै छी भग्नावशेष मे

जोड़ू कर एहि नेता के आगू ले अहां
बढू आ भरु खोइन्छ मा के, सनेस मे

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों