शनिवार, 31 दिसंबर 2011

गजल

प्रियतम अहाँक सुधिमे रहनाइ भेल मुश्किल

जीवैत  हम तँ छी नहि मरनाइ भेल मुश्किल

 

की हाल कहु करेजक टुकड़ी हजार भेलै

सभमे अहीँक छवि अछि गननाइ भेल मुश्किल

 

छी नींद चैन सबपर  कब्जा अपन क लेने

कयलौं पिया कि जादू सुतनाइ भेल मुश्किल

 

बड़ मोनकेँ बुझेलौं ई किछु बुझैत नहि अछि
आइब कनी बुझा दिअ बुझनाइ भेल मुश्किल

 

सदिखन ‘मनु’क हृदय मंदिरमे मुरुत अहीँकेँ

बिन पूजने अहाँकेँ  सहनाइ भेल मुश्किल

 

(मात्राक्रम 2212-122 / 2212-122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों