प्रियतम अहाँक सुधिमे जीनाइ भेल मुश्किल
जीवैत हम तँ छी नहि मरनाइ भेल मुश्किल
की हाल कहु करेजक टुकड़ी हजार भेलै
सभमे अहीँक छवि छल गिननाइ भेल मुश्किल
सदिखन धियानमे मुस्काइत अहीँ रहै छी
कयलौं अहाँ कि जादू सहनाइ भेल मुश्किल
बड़ मोनकेँ बुझेलौं कनिको बुझैत नहि अछि
आइब अहीँ बुझा दिअ बुझनाइ भेल मुश्किल
सदिखन हमर मनक मंदिरमे मुरुत पियाकेँ
बिन पूजने हृदयमे रहनाइ भेल मुश्किल
(मात्राक्रम 2212-122 / 2212-122)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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