Wednesday, 28 December 2011

गजल


प्रितक बगियामे फुल खिलैएलौं
मोनमे सुन्दर सपना सजैएलौं

प्रेमक प्रतिविम्ब पैर पंख लगा
क्षितिजमें शीशमहल बनैएलौं

पंख टूईटगेल हमर क्षणमे
दर्द ब्यथा सं हम छटपटैएलौं

सपना चकनाचूर होईत देख
भाव विह्वल चीतकार कैएलौं

कोमल फुल नै भS सकल अप्पन
कांटमें प्रेमक अंकुरण कैएलौं

कहियो तेह प्रेमक कोढ़ी खीलत
कांटक चुभन हम सहैत गेलौं
...............वर्ण१३ .....................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों