Tuesday, 13 December 2011

गजल


खेत हो कि छौंड़ी पटा लिअ
पेट हो कि जिनगी सजा लिअ


प्रेम लेल माथो झुका लिअ
बेर पर तँ गरदनि कटा लिअ


हाथ जोड़ि कहलक इ मछरी
धार हो कि मोइन बचा लिअ


बेर-बेर सरकार तोड़ू
आ अपन इमानो बचा लिअ


देखबे करत ओ अहाँकेँ
दाइ अपन घोघ तँ उठा लिअ




दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ +ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ+ ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ मने फाइलुन-फऊलुन-फऊलुन केर हरेक पाँतिमे प्रयोग

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों