Wednesday, 14 December 2011

गजल

छोड़ि दिऔ हाथ देखिऔ केम्हर जाइ छै
जेतै त ओ उम्हरे सब जेम्हर खाइ छै

बेच देत आब सर्वस्व माटि आ माय के
ओकरा ले त सबसे नमहर पाइ छै

पराकास्ठा केलक, जनता देलक दन्ड
अंततः आब ओ रने बने छिछियाइ छै

घोटाला करै काल किछु नै छलैक ध्यान
पाइ खेलक आब जेलक हवा खाइ छै

बचल भज़ार लागल एख़नो लूट मे
मदति के आस मे आई ओ रिरियाइ छै

No comments:

Post a Comment

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों