Friday, 9 December 2011

गजल



शिशु सिया उपमा उपमान छियै हमर आयुष्मति बेटी
मैत्रेयी गार्गीक कोमल प्राण छियै हमर आयुष्मति बेटी

टिमकैत कमलनयन, धव-धव माखन सन कपोल
पुर्णमासीक चमकैत चान छियै हमर आयुष्मति बेटी

बिहुसैत ठोर मे अमृतधारा बिलखैत ठोर सोमरस
शिशु स्वरुपक श्रीभगवान छियै हमर आयुष्मति बेटी

नौनिहाल किहकारी सरस मिश्रीघोरल मनोहर पोथी
दा-दा-ना-ना-माँ सारेगामा गान छियै हमर आयुष्मति बेटी

सकल पलिवारक अलखतारा जन्मपत्रीक सरस्वती
अपन मैया-पिताश्रीक जान छियै हमर आयुष्मति बेटी

ज्ञानपीठक बेटी छियै सुभविष्णु मिथिलाक दीप्त नक्षत्र
मातृ पितृ कुलक अरमान छियै हमर आयुष्मति बेटी

"शांतिलक्ष्मी" विदेहक घर-घर देखय इयह शिशुलक्ष्मी
बेटीजातिक भविष्णु गुमान छियै हमर आयुष्मति बेटी

..................वर्ण २२................

ई गजल " मिथिला-दर्शन" केर अंक मइ-जून २०१२मे प्रकाशित भेल।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों