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अहाँ मुस्किया त' दिअ लिखब हजार गजल
कने कनखिया त' दिअ बनत बजार गजल
अहाँक सब अदा सँ नव शब्द भेटै यै
आइ टूस्किया त' दिअ चलत बहार गजल
अहाँ मुस्किया त' दिअ लिखब हजार गजल
कने कनखिया त' दिअ बनत बजार गजल
अहाँक सब अदा सँ नव शब्द भेटै यै
आइ टूस्किया त' दिअ चलत बहार गजल
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